काशी तमिल संगमम् 4.0 : नमो घाट पर काशी की काष्ठ-कला की अनूठी छटा

‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करते हुए काशी तमिल संगमम् 4.0 इस समय नमो घाट पर अपनी सांस्कृतिक भव्यता के साथ गतिशील है”

वाराणसी 05 / 12 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

जहां उत्तर भारत की प्राचीन परंपराएं और तमिल संस्कृति का गहन संबंध जीवंत रूप में प्रकट हो रहा है। ‘तमिल करकलाम’ की थीम पर आधारित यह आयोजन सांस्कृतिक संवाद, ज्ञान-परंपरा और कला विरासत के संरक्षण का संदेश लेकर चल रहा है।

इसी क्रम में स्टॉल संख्या 29 जिसे वाराणसी के प्रतिष्ठित डीसी हैंडीक्राफ्ट्स द्वारा सजाया गया है, आगंतुकों के बीच अत्यधिक लोकप्रियता हासिल कर रहा है। इस स्टॉल पर प्रदर्शित हर कलाकृति न केवल काशी की सात पीढ़ियों पुरानी काष्ठ-परंपरा का प्रमाण है, बल्कि इसके पीछे खड़े कलाकारों की संघर्ष, समर्पण और सफलता की प्रेरक कथा भी कहती है।

वाराणसी के ओम प्रकाश शर्मा और नंद लाल शर्मा इस विशिष्ट काष्ठ-कला के सातवीं पीढ़ी के कलाकार हैं। आज वे इस कला के शहर के अकेले संरक्षक हैं, जो हाथों की निपुणता और वर्षों की साधना से लकड़ी में अद्वितीय सजीवता पैदा करते हैं।

वे केवल पारंपरिक कारीगर नहीं, बल्कि काष्ठ-कला के शिक्षक भी हैं, जो इस विरासत को बचाए रखने के लिए NIFT रायबरेली सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्यशालाएँ आयोजित करते रहे हैं।

लेकिन उनकी यात्रा हमेशा इतनी आसान नहीं रही। एक समय ऐसा भी आया जब वे आर्थिक कठिनाइयों और इस कला की घटती मांग के कारण गहरी निराशा में थे। तभी वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन ने उनके जीवन को नया मोड़ दिया।

प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से उनका उत्साह बढ़ाया, उन्हें अपनी विरासत को जीवित रखने के लिए प्रेरित किया और काशी तमिल संगमम् जैसे बड़े मंचों से उनकी कला को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का अवसर प्रदान किया।

नंद लाल शर्मा कहते हैं कि प्रधानमंत्री के प्रेरणा-संदेश ने उन्हें केवल आशा ही नहीं बल्कि एक नयी दृष्टि और दिशा भी प्रदान की, और आज उनकी कला देश-विदेश में प्रशंसा पा रही है।

डीसी हैंडीक्राफ्ट्स की काष्ठ-कला न केवल भारत में प्रिय है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी है। उनकी उत्कृष्ट कृति ‘राज गद्दी – राम दरबार’ को वर्ष 2022 के G7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री द्वारा इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो को भेंट किया जाना वाराणसी की कला परंपरा के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। नमो घाट पर लगे इस स्टॉल पर आगंतुक बड़े उत्साह के साथ स्थानीय कला को अपनाते दिखाई देते हैं। 

एक आगंतुक शिवम सिंह ने अपने परिवार के सभी सदस्यों के लिए लकड़ी के चाबी के छल्ले खरीदे और इस बात पर अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त की कि उन्हें इतनी सूक्ष्म, सुंदर और किफायती कलाकृति मिल रही है, जिसे वह वाराणसी की विरासत का अमूल्य उपहार मानते हैं।

स्टॉल का सबसे आकर्षक केंद्र उनकी भव्य पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति है, जिसे कलाकारों ने पूरी तरह हाथ से, बिना किसी मशीन के छह महीनों की साधना में तैयार किया है। लगभग ₹1,20,000 लागत वाली यह कलाकृति कालमा, कदम और गूलर जैसी लकड़ियों के संयोजन से तैयार की गई है।

जिनका रंग और सुगंध चंदन जैसा प्रतीत होता है। कलाकार बताते हैं कि उनकी लघु काष्ठ-कला केवल दोपहर 12 से 2 बजे तक प्राकृतिक धूप में ही बनाई जा सकती है, क्योंकि कृत्रिम प्रकाश में वह सूक्ष्मता संभव नहीं होती। यह तथ्य उनकी कला को और भी रहस्यमय और अद्वितीय बनाता है।

नमो घाट पर काशी तमिल संगमम् 4.0 में डीसी हैंडीक्राफ्ट्स का स्टॉल केवल एक व्यावसायिक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, कारीगरी, धैर्य और सांस्कृतिक गौरव का सजीव मंच है।

ओम प्रकाश और नंद लाल शर्मा की यात्रा यह सिद्ध करती है कि जब परिश्रम, परंपरा और सही दिशा मिलती है तो स्थानीय कला न केवल राष्ट्रीय पहचान बनती है, बल्कि वैश्विक मंचों पर भी चमकती है।

यह स्टॉल वास्तव में काशी तमिल संगमम् की उस भावना को मूर्त रूप देता है, जिसका उद्देश्य भारत की विविधता को एकसूत्र में पिरोना और उसकी सांस्कृतिक जड़ों को नई पीढ़ियों तक पहुँचाना है।

PREMIUM NEWS

अपनी Premium Membership चुनें

Premium articles बिना restriction पढ़ें।

Monthly

₹99/month

30 days Premium access

You have successfully subscribed to the newsletter

There was an error while trying to send your request. Please try again.

The Politics Again will use the information you provide on this form to be in touch with you and to provide updates and marketing.