जौनपुर : पूर्वांचल विश्वविद्यालय फ़र्ज़ी डिग्री का नया मामला, महिला ने पाई शिक्षिका की नौकरी
“वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री से नौकरी करने का एक और मामला सामने आया है। मामला बस्ती जिले के परमहंस किंकर दास उच्चतर पूर्व माध्यमिक विद्यालय से जुड़ा है। यहां तैनात एक महिला शिक्षिका उर्मिला सिंह ने पूविवि की फर्जी डिग्री और मार्कशीट से नौकरी हासिल की थी। राज्यपाल से शिकायत के बाद मामले की जांच के दौरान इसका खुलासा हुआ है”
जौनपुर 17 / 04 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट
मीडिया रिपोर्ट की माने तो राज्यपाल तक पहुंची शिकायत में बताया कि बस्ती कस्बे निवासी उर्मिला सिंह ने वर्ष 2000 में दुर्गा पीजी कॉलेज, चंडेश्वर, आजमगढ़ के नाम से बीएड की फर्जी डिग्री और मार्कशीट तैयार करवाई। पूर्वांचल विश्वविद्यालय के चार्ट की प्रक्रिया में हेराफेरी कर यह डिग्री मान्य बनवा दी गई। फिर इस फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर वर्ष 2009 में बस्ती के विद्यालय में नौकरी पा ली।
यह मामला तब उजागर हुआ जब विद्यालय के प्रबंधक ने महिला शिक्षिका के दस्तावेजों को लेकर संदेह प्रकट करते हुए राज्यपाल को शिकायत पत्र भेजा। राज्यपाल के ओएसडी पंकज एल. जानी ने तत्काल विश्वविद्यालय को पत्र भेजकर पूरे मामले की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच समिति का गठन किया। प्रारंभिक जांच में ही यह पुष्टि हो गई कि उर्मिला सिंह के दस्तावेज फर्जी हैं। बुधवार को विश्वविद्यालय ने विद्यालय को एक पत्र भेजकर शिक्षिका का बयान दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
पूविवि की परीक्षा तंत्र पर उठ रहे सवाल-मंगलवार को अंबेडकर नगर टांडा निवासी मिथलेश कुमारी द्वारा बलिया के मनोहर टाउन पीजी कॉलेज के माध्यम से वर्ष 2006 में दूसरे के नाम पर बीएड की फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनवाकर शिक्षक पद प्राप्त करने का मामला सामने आया था।
इस मामले ने पहले ही विश्वविद्यालय प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया था, और अब उर्मिला सिंह के प्रकरण ने विश्वविद्यालय की जांच प्रक्रिया में कर्मचारी संलिप्तता और पूरे परीक्षा तंत्र की पारदर्शिता पर प्रश्न चिह्न लगा दिए हैं। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चार्ट में नाम, अंक और रोल नंबर बदलने की प्रक्रिया कोई एक आदमी अकेले नहीं कर सकता।
इसमें एक पूरी श्रृंखला शामिल होती है। ऐसे में क्लर्क, डाटा एंट्री ऑपरेटर, यहां तक की कुछ शिक्षकों की भी मिलीभगत की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। जब तक इन सबकी भूमिका की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक इस गहरी साजिश का पर्दाफाश असंभव है।
“उर्मिला सिंह के फर्जी बीएड डिग्री मामले की जांच चल रही है। जांच के प्रथम पहलू पर डिग्री व मार्कशीट की भूमिका संदिग्ध है। ऐसे में उसे फर्जी करार दे सकते हैं। वही उच्चतर पूर्व माध्यमिक विद्यालय के प्रबंधन समिति को विश्वविद्यालय की तरफ से पत्र भेजा जा रहा है”-डॉ.विनोद कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक, पूर्वांचल विश्वविद्यालय।











