जौनपुर: उद्यान विभाग ने किया हाई-टेक नर्सरी और खेतों का सघन निरीक्षण
जौनपुर में उद्यान विभाग का सघन निरीक्षण: हाई-टेक नर्सरी और केला किसानों के खेतों का लिया जायजा”
जौनपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : वरुण यादव की रिपोर्ट
जनपद में उद्यान विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत और गुणवत्ता परखने के लिए प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है।
इसी कड़ी में उपनिदेशक उद्यान (वाराणसी मण्डल) और जिला उद्यान अधिकारी, जौनपुर की संयुक्त टीम ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों का सघन स्थलीय निरीक्षण किया।
इस दौरान अधिकारियों ने राजकीय पौधशालाओं से लेकर किसानों के खेतों तक का जायजा लिया और उन्नत खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
हाई-टेक नर्सरी और पौधशालाओं का सघन निरीक्षण
निरीक्षण दल ने सबसे पहले राजकीय पौधशाला (पॉलिटेक्निक), राजकीय पौधशाला (बक्शा) और कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा में स्थापित अत्याधुनिक हाई-टेक नर्सरी का गहन अवलोकन किया।
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अधिकारियों ने यहां उत्पादित किए जा रहे पौधों, हाइब्रिड किस्मों, ड्रिप/माइक्रो-इरीगेशन सिस्टम और पौधों के रख-रखाव का बारीकी से परीक्षण किया।
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निरीक्षण के दौरान कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि किसानों को केवल उच्च गुणवत्ता वाले, रोगमुक्त और प्रमाणीकृत (Certified) पौधे ही उपलब्ध कराए जाएं ताकि उनकी पैदावार बेहतर हो सके।
पारंपरिक खेती छोड़ किसान ने उगाए मटर और मिर्च, कमा रहे भारी मुनाफा
इसके बाद अधिकारियों की टीम ने जौनपुर के ग्राम बेसहूपुर पहुंचकर प्रगतिशील किसान समर बहादुर सिंह के प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया।
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किसान समर बहादुर ने पी.डी.एम.सी. (PDMC) योजना के तहत अपने 3.8 हेक्टेयर खेत में ‘मिनी स्प्रिंकलर’ (आधुनिक सिंचाई प्रणाली) लगवाया है।
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इस तकनीक की मदद से उन्होंने पारंपरिक गेहूं और धान की खेती छोड़कर मटर और मक्का का सफल व लाभकारी उत्पादन किया और वर्तमान में मिर्च की खेती कर रहे हैं।
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किसान ने अधिकारियों के सामने योजना के प्रति पूर्ण संतुष्टि व्यक्त करते हुए इसे अपनी आय दोगुनी करने में बेहद लाभकारी बताया।
बदलापुर के केला किसानों को दी गई ‘टिशू कल्चर’ की ट्रेनिंग
निरीक्षण के अंतिम चरण में, अधिकारियों ने बदलापुर क्षेत्र के केला उत्पादक किसानों के खेतों का भ्रमण एवं स्थलीय सत्यापन किया।
टीम ने केले की फसल में कीट-बीमारी प्रबंधन, पौध-संरक्षण और ड्रिप सिंचाई व्यवस्था की समीक्षा की।
मौके पर ही किसानों से बातचीत करते हुए उपनिदेशक और जिला उद्यान अधिकारी ने उन्हें ‘टिशू कल्चर’ (Tissue Culture) केला बागवानी की नवीन तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों के बारे में विस्तार से मार्गदर्शन दिया।
अधिकारियों ने निर्देश दिया है कि ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई समेत उद्यान विभाग की विभिन्न अनुदान योजनाओं से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ा जाए, ताकि वे खेती में तकनीकी का इस्तेमाल कर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।











