जौनपुर: हर घर तिरंगा अभियान तेज, 4 लाख झंडों की सिलाई पूरी
जौनपुर: ‘हर घर तिरंगा’ के लिए 4 लाख झंडों की सिलाई पूरी, 300 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने संभाला मोर्चा”
जौनपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : वरुण यादव की रिपोर्ट
स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर जनपद जौनपुर में ‘हर घर तिरंगा अभियान 2026’ की तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं।
जिलाधिकारी श्री सैमुअल पॉल एन. के निर्देशन में इस महाभियान को सफल बनाने के लिए जिले के विभिन्न विकास खंडों में स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं ने मोर्चा संभाल लिया है।
इन महिलाओं द्वारा देशभक्ति के जज्बे के साथ तिरंगा झंडों की सिलाई का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
4 लाख से अधिक तिरंगों की सिलाई पूरी
प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस वर्ष जौनपुर जनपद में 05 लाख तिरंगा झंडों की सिलाई का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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अच्छी बात यह है कि इस लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 04 लाख से अधिक झंडों की सिलाई पूरी की जा चुकी है।
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इस कार्य में जनपद के अलग-अलग विकास खण्डों की लगभग 300 स्वयं सहायता समूहों की दीदियां (महिलाएं) दिन-रात मेहनत कर रही हैं।
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इस अभियान से जहां एक ओर देशभक्ति का संचार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और अतिरिक्त आय का बेहतरीन अवसर भी प्राप्त हो रहा है।
अधिकारियों ने लिया सिलाई केंद्रों का जायजा
अभियान की प्रगति परखने के लिए उपायुक्त (स्वतः रोजगार), जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) और जिला मिशन प्रबन्धक की संयुक्त टीम ने विकास खण्ड धर्मापुर, मुफ्तीगंज और केराकत में संचालित तिरंगा सिलाई केंद्रों का सघन दौरा किया।
निरीक्षण के दौरान धर्मापुर में ‘वैष्णवी महिला स्वयं सहायता समूह’ (दशरथपुर) एवं ‘उत्कर्ष महिला स्वयं सहायता समूह’ तथा मुफ्तीगंज में ‘यमुना आजीविका स्वयं सहायता समूह’ (निशान) एवं ‘पयहारी बाबा महिला स्वयं सहायता समूह’ (कुंडी) की महिलाएं पूरी लगन से तिरंगे सिलती हुई पाई गईं।
अन्य विभागों से भी झंडे खरीदने की अपील
जिलाधिकारी श्री सैमुअल पॉल एन. ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि झंडों की सिलाई का यह कार्य समयबद्ध और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा कराया जाए।
साथ ही, डीएम ने एक सराहनीय पहल करते हुए जनपद के अन्य सरकारी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे भी अपनी आवश्यकता के अनुसार तिरंगा झंडे ‘राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ से जुड़ी इन महिलाओं से ही खरीदें।
इससे न केवल अभियान को गति मिलेगी, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को भी और अधिक आर्थिक मजबूती मिलेगी।











