Ayush Ministry launches Ayush Suraksha portal to stop misleading medicine advertisements.

आयुष दवाओं के भ्रामक विज्ञापनों पर सरकार सख्त, नया पोर्टल लॉन्च

आयुष दवाओं के भ्रामक विज्ञापनों पर सरकार सख्त: नकेल कसने के लिए ‘आयुष सुरक्षा’ पोर्टल लॉन्च, 3 साल में 34 हजार शिकायतें”

 नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

आयुष दवाओं के नाम पर झूठे दावे और गुमराह करने वाले विज्ञापनों (Misleading Advertisements) के जरिए उपभोक्ताओं को ठगने वालों पर अब केंद्र सरकार ने शिकंजा कस दिया है।

आयुष मंत्रालय ने ऐसे विज्ञापनों और दवाओं के साइड इफेक्ट्स (ADRs) पर नजर रखने के लिए वर्ष 2025 में एक नया IT-आधारित ऑनलाइन पोर्टल “आयुष सुरक्षा” (Ayush Suraksha) लॉन्च किया है।

यह जानकारी आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में दी।

3 साल में सामने आए 34 हजार से ज्यादा भ्रामक विज्ञापन

लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन सालों में आयुष दवाओं के गुमराह करने वाले विज्ञापनों की बाढ़ सी आ गई है।

मंत्रालय के फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम के तहत वर्ष 2023 में 7,771, वर्ष 2024 में 10,161 और वर्ष 2025 में 16,129 शिकायतें दर्ज की गईं। पिछले तीन वर्षों में कुल मिलाकर 34,061 भ्रामक विज्ञापनों की पहचान की गई है।

‘आयुष सुरक्षा’ पोर्टल से राज्यों में हो रही त्वरित कार्रवाई

नए पोर्टल के लॉन्च होने के बाद से राज्यों ने ऐसे विज्ञापनों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी है। तमिलनाडु में सबसे ज्यादा 3,079 विज्ञापनों पर कार्रवाई हुई।

वहीं, मध्य प्रदेश में 1115 शिकायतें मिलीं जिनमे से 661 पर एक्शन हुआ। इसके अलावा दिल्ली में 459, ओडिशा में 447 और उत्तराखंड में 300 मामलों पर सीधे तौर पर कार्रवाई की गई है।

अवैध विज्ञापनों को रोकने के लिए सरकार के 4 बड़े कदम:

  1. फार्माकोविजिलेंस नेटवर्क: आयुष मंत्रालय 2018 से दवाओं की सुरक्षा के लिए ‘फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम’ चला रहा है (जिसे 2021 में AOGUSY योजना में शामिल किया गया)। इसके तहत 1 नेशनल, 5 इंटरमीडियरी और 97 पेरिफेरल सेंटर्स काम कर रहे हैं।

  2. नोडल ऑफिसर की नियुक्ति: इंटरनेट पर गलत दावों को ब्लॉक करने के लिए ‘ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ आयुर्वेद, नई दिल्ली’ के कोऑर्डिनेटर को नोडल ऑफिसर नियुक्त किया गया है। यह अधिकारी भ्रामक विज्ञापन दिखाने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को सीधे नोटिस जारी कर सकता है।

  3. कड़े कानून का इस्तेमाल: ‘ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज़ एक्ट, 1954’ के तहत राज्यों को प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ऐसे विज्ञापनों को तत्काल रोकने के अधिकार दिए गए हैं।

  4. जन-जागरूकता: देश भर में अब तक 4,165 जागरूकता कार्यक्रम चलाकर 3.71 लाख से अधिक लोगों को जागरूक किया गया है। साथ ही 100 से ज्यादा प्रमुख अखबारों में पब्लिक नोटिस जारी कर जनता से झूठे दावों पर विश्वास न करने की अपील की गई है।

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि होम्योपैथी और आयुर्वेद के नाम पर बिना सबूत वाले दावे करने वाली कंपनियों पर अब ‘नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी एक्ट’ और अन्य कड़े कानूनों के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।