जौनपुर कलेक्ट्रेट में भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ प्रदर्शन करते किसान

जौनपुर: भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन

जौनपुर: भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ किसानों का हल्ला बोल, समझौते को बताया ‘डेथ वारंट’

जौनपुर: वरुण यादव की रिपोर्ट

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement) का जमीनी स्तर पर कड़ा विरोध शुरू हो गया है।

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में ‘भारतीय किसान मजदूर जनसेवा यूनियन’ ने इस समझौते को तत्काल रद्द करने की मांग करते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

यूनियन का दावा है कि यह समझौता देश के किसानों, खेत मजदूरों और आर्थिक संप्रभुता के लिए एक बड़ा खतरा है।

पीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

बुधवार को यूनियन के जिलाध्यक्ष रवि प्रकाश सिंह के नेतृत्व में ‘देश बचाओ मोर्चा’ के बैनर तले किसानों और कार्यकर्ताओं ने जौनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया।

  • प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम संबोधित एक ज्ञापन सौंपा।

  • संगठन ने स्पष्ट मांग की है कि भारत सरकार इस मुक्त व्यापार समझौते को तत्काल प्रभाव से वापस ले, ताकि देश के आम नागरिकों और किसानों के हितों की रक्षा की जा सके।

ट्रेड डील को बताया किसानों का ‘डेथ वारंट’

इस प्रस्तावित समझौते को लेकर किसानों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। संगठन ने इसे किसानों के लिए सीधे तौर पर एक ‘डेथ वारंट’ करार दिया है।

  • जिलाध्यक्ष रवि प्रकाश सिंह ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील से न केवल किसानों, बल्कि देश के पशुपालकों, छोटे व्यापारियों और लघु उद्योगों पर बेहद बुरा असर पड़ेगा।

  • उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समझौते से भारत की खाद्य और आर्थिक संप्रभुता खतरे में पड़ जाएगी।

  • इसके लागू होने से भारतीय कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

दी देशव्यापी जनआंदोलन की चेतावनी

‘देश बचाओ मोर्चा’ ने केंद्र सरकार को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि सरकार किसानों की इस जायज मांग को अनदेखा करती है और समझौते को आगे बढ़ाती है, तो देशभर में एक व्यापक जनआंदोलन छेड़ा जाएगा।

यह आंदोलन पूरी तरह से लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से होगा, लेकिन इसके बाद पैदा होने वाले हालात की पूरी जिम्मेदारी भारत सरकार की होगी।