जौनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन करते किसान और मजदूर संगठन के लोग
जौनपुर: कलेक्ट्रेट में गूंजा किसानों का नारा, अखिल भारतीय किसान खेत मजदूर संगठन ने किया देशव्यापी संघर्ष का ऐलान; राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन”
जौनपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : अब्दुल हई ( राजा ) की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिला कलेक्ट्रेट परिसर में बुधवार को किसानों और मजदूरों की समस्याओं को लेकर एक बार फिर बड़ा आंदोलन सुलग उठा।
‘The Politics Again’ की ग्राउंड ब्यूरो रिपोर्ट के अनुसार, अखिल भारतीय किसान खेत मजदूर संगठन ने कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी विभिन्न ज्वलंत मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ एक नए देशव्यापी संघर्ष का बिगुल फूंक दिया।
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में भारत के राष्ट्रपति को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा।
📜 कृषि कानूनों की वापसी और अधूरे वादों का आरोप
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संगठन के वरिष्ठ नेता राजनाथ यादव ने जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा। उनके वक्तव्य के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
ऐतिहासिक आंदोलन की याद: राजनाथ यादव ने कहा कि केंद्र सरकार ने साल 2020 में तीन विवादित कृषि कानून पारित किए थे, जिसके खिलाफ संयुक्त मोर्चा के बैनर तले देश के किसानों ने एक ऐतिहासिक आंदोलन लड़ा। अंततः प्रधानमंत्री को उन कानूनों को वापस लेना पड़ा था।
सशर्त वापसी और वादाखिलाफी: किसानों ने दिसंबर 2020 में सरकार के आश्वासनों के बाद अपना आंदोलन सशर्त वापस लिया था।
संगठन का आरोप है कि इतने साल बीत जाने के बाद भी केंद्र सरकार ने अपने वादों को पूरा नहीं किया है, जिससे देश के अन्नदाताओं और मजदूरों में असंतोष की आग फिर से भड़क रही है। इसी के चलते अब देशव्यापी संघर्ष का निर्णय लिया गया है।
🌾 एमएसपी कानून और बिजली संशोधन बिल पर आर-पार की मांग
संगठन ने देश के राष्ट्रपति से अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए किसानों को न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। सौंपे गए ज्ञापन में शामिल प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
MSP गारंटी कानून: स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों (C2+50) पर आधारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) कानून को तुरंत देश भर में लागू किया जाए और फसलों की सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाए।
सस्ती कृषि सामग्री: किसानों को खेती के लिए आवश्यक खाद, बीज और डीजल की पर्याप्त आपूर्ति बेहद रियायती और रियायती दरों पर दी जाए।
बिजली बिल और स्मार्ट मीटर: बिजली संशोधन विधेयक 2021 को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए और ग्रामीण क्षेत्रों में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
इसके साथ ही किसानों और मजदूरों के लिए मुफ्त बिजली की व्यवस्था की जाए।
🛠️ मजदूरों के लिए ₹30,000 न्यूनतम वेतन और संपूर्ण कर्ज माफी
मजदूरों और गरीब किसानों की दयनीय स्थिति को रेखांकित करते हुए संगठन ने श्रम कानूनों में बदलाव की मांग की है:
लेबर कोड की वापसी: कॉर्पोरेट हितों के लिए लाए गए चार लेबर-कोड बिलों को तुरंत वापस लिया जाए।
न्यूनतम वेतन की गारंटी: बढ़ती कमरतोड़ महंगाई से निपटने के लिए मजदूरों का न्यूनतम मासिक वेतन बढ़ाकर 30,000 रुपये लागू किया जाए।
कर्ज मुक्ति: देश के सभी सीमांत किसानों और खेतिहर मजदूरों के तमाम छोटे-बड़े कर्ज पूरी तरह माफ किए जाएं।
फर्जी मुकदमों की वापसी: पूर्व के आंदोलनों के दौरान जेल में बंद किए गए मजदूरों और किसानों पर दर्ज सभी कथित फर्जी मुकदमे वापस लेकर उन्हें ससम्मान रिहा किया जाए।
🚜 ‘बुलडोजर कार्रवाई’ पर तुरंत रोक लगाने की अपील
ज्ञापन के अंत में संगठन ने एक बेहद संवेदनशील मुद्दे को उठाते हुए भूमिहीन और मध्यम वर्गीय परिवारों के आशियानों की सुरक्षा की मांग की है।
संगठन का कहना है कि ग्राम समाज की भूमि पर वर्षों से जो भूमिहीन, गरीब किसान और आम मजदूर अपने घर बनाकर रह रहे हैं, उन पर होने वाली किसी भी प्रकार की बुलडोजर कार्रवाई को तुरंत रोका जाए।
उन जमीनों को सरकारी दस्तावेजों में ‘आबादी’ के रूप में दर्ज कर उन्हें मालिकाना हक दिया जाए। साथ ही एलपीजी, डीजल और पेट्रोल की बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेकर आम जनता को राहत दी जाए।
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