आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा खामेनेई

ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई की पड़ोसी देशों को चेतावनी | The Politics Again

‘हमारे या उनके, तय करें मुस्लिम देश’, पिता की मौत के बाद ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई की पहली और खुली चेतावनी’

तेहरान /नई दिल्ली  (The Politics Again): संतोष सेठ की रिपोर्ट 

अमेरिका और इजरायल के साथ जारी विनाशकारी युद्ध में अपने पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद, ईरान के नए सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा खामेनेई (Ayatollah Seyyed Mojtaba Khamenei) ने सत्ता संभालते ही बेहद आक्रामक तेवर दिखाए हैं।

गुरुवार को अपने पहले सार्वजनिक बयान में मुज्तबा खामेनेई ने पड़ोसी मुस्लिम बहुल और खाड़ी देशों को एक तरह से कड़े शब्दों में हड़काते हुए ‘अल्टीमेटम’ दे दिया है।

उन्होंने स्पष्ट कहा है कि इन देशों को यह तय करना होगा कि वे इस युद्ध में किसके साथ खड़े हैं— ईरान के या फिर अमेरिका और इजरायल के?

‘विदेशी सैन्य अड्डे तुरंत बंद करें पड़ोसी’

यह ईरान के इतिहास में पहली बार है जब सुप्रीम लीडर का पद पिता से सीधे बेटे को सौंपा गया है। मुज्तबा खामेनेई ने अपने कड़े संदेश में कहा:

  • रुख स्पष्ट करें: “क्षेत्र के देशों को हमारी मातृभूमि पर आक्रमण करने वालों और हमारे लोगों के हत्यारों के बारे में अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।”

  • अड्डे बंद करने की चेतावनी: “दुश्मन ने पिछले कई सालों से कुछ पड़ोसी देशों में जो सैन्य अड्डे बनाए हैं, हाल के हमलों में उनका इस्तेमाल किया गया। मैं उन्हें सलाह देता हूं कि वे उन अड्डों को जल्द से जल्द बंद कर दें।”

  • खामेनेई ने दावा किया कि अमेरिका का सुरक्षा और शांति स्थापित करने का दावा महज एक झूठ है।

‘जंग जारी रहेगी और होर्मुज स्ट्रेट भी बंद रहेगा’

नए सुप्रीम लीडर ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान इस युद्ध से पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता की इच्छा के मुताबिक उनकी यह जंग जारी रहेगी और दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्ग होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को भी बंद ही रखा जाएगा।

  • उन्होंने हिजबुल्लाह, यमन (हूती) और इराकी लड़ाकों का शुक्रिया अदा करते हुए उनकी ‘बहादुरी’ की तारीफ की।

  • गौरतलब है कि हिजबुल्लाह ने भी लेबनान की तरफ से इजरायल के खिलाफ एक नया मोर्चा खोल दिया है।

‘हरेक शख्स की शहादत का बदला लिया जाएगा’ भावुक होते हुए मुज्तबा खामेनेई ने अपने पिता (आयतुल्लाह अली खामेनेई) की मौत और उनकी विरासत को संभालने की चुनौती का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि उनके लिए उस आसन पर बैठना बहुत मुश्किल है जिस पर कभी महान खुमैनी और उनके पिता बैठते थे।

  • “मुझे शहादत के बाद उनके (पिता के) शरीर के पास जाने का सम्मान मिला। मैं सबको आश्वस्त करता हूं कि हम अपने शहीदों के खून का बदला लेकर रहेंगे। यह बदला सिर्फ महान नेता की शहादत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मुल्क के हरेक शख्स की शहादत का बदला लिया जाएगा।”

क्या खाड़ी देश देंगे खामेनेई की धमकियों का जवाब?

कूटनीतिक और रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि मुज्तबा खामेनेई की इन खुली धमकियों (विशेषकर अमेरिकी सैन्य अड्डे बंद करने की) का जवाब देना सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, कतर और अन्य खाड़ी देशों के लिए बेहद मुश्किल है।

  • अमेरिकी सुरक्षा छतरी: ये सभी देश अमेरिका के साथ एक मजबूत सुरक्षा गठबंधन (Security Alliance) में बंधे हुए हैं।

  • इन देशों में मौजूद अमेरिकी अड्डे ही ईरान और अन्य बाहरी खतरों से उनकी सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी हैं।

  • इन अड्डों को बंद करने का सीधा मतलब अमेरिका से अपनी सैन्य और आर्थिक सुरक्षा दांव पर लगाना होगा। यही वजह है कि खाड़ी देश शायद ही ईरान के इस सवाल का कोई सीधा या आक्रामक जवाब दें।

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