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हाथों में ईरान का झंडा, मोजतबा खामेनेई बने ईरान के नए सुप्रीम लीडर | The Politics Again

“ईरान में मोजतबा खामेनेई युग की शुरुआत: बने नए ‘सुप्रीम लीडर’, पिता की हत्या के बाद संभाली कमान “

तेहरान (The Politics Again): संतोष सेठ की रिपोर्ट 

मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण युद्ध और अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हवाई हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में मचे सियासी घमासान पर अब विराम लग गया है।

ईरान की शक्तिशाली धार्मिक संस्था ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने एक विशेष बैठक के बाद सर्वसम्मति से मोजतबा खामेनेई को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का तीसरा ‘सुप्रीम लीडर’ (सर्वोच्च नेता) घोषित कर दिया है।

इस बड़े ऐलान के साथ ही यह साफ हो गया है कि ईरान की सत्ता पर कट्टरपंथी विचारधारा की पकड़ अभी भी बेहद मजबूत है।

इजराइल पहले ही ऐलान कर चुका है कि ईरान का अगला सुप्रीम लीडर उसका ‘टारगेट’ होगा, ऐसे में मोजतबा की ताजपोशी ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव को एक नए चरम पर पहुंचा दिया है।

आईने में दिखा नया अक्स: ऐसे हुआ ऐलान

नए सुप्रीम लीडर की घोषणा का तरीका बेहद प्रतीकात्मक रहा। दिवंगत अयातुल्ला अली खामेनेई के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक तस्वीर साझा की गई।

इस तस्वीर में अयातुल्ला खामेनेई आईने के सामने खड़े हैं, लेकिन आईने में जो प्रतिबिंब (Reflection) उभर रहा है, वह मोजतबा खामेनेई का है, जिनके हाथों में ईरान का झंडा है। यह तस्वीर सत्ता के निर्बाध हस्तांतरण का स्पष्ट संदेश है।

कौन हैं मोजतबा खामेनेई? ‘पर्दे के पीछे का सबसे ताकतवर चेहरा’

मोजतबा खामेनेई लंबे समय से ईरान की राजनीति के सबसे प्रभावशाली व्यक्ति माने जाते रहे हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा ‘पर्दे के पीछे’ से काम किया।

  • जन्म और शिक्षा: 1969 में पवित्र शिया शहर मशहद में जन्मे मोजतबा ने प्रसिद्ध धार्मिक केंद्र ‘कोम’ (Qom) के इस्लामिक सेमिनरी में पढ़ाई की है। उन्हें शिया इस्लामी परंपरा में ‘होजतुल इस्लाम’ का उच्च धार्मिक दर्जा प्राप्त है।

  • राष्ट्रवादी कट्टरपन: युवावस्था में उन्होंने ईरान-इराक युद्ध में हिस्सा लिया था, जिसने उनकी विचारधारा को अत्यधिक कट्टर और राष्ट्रवादी बना दिया।

  • सत्ता के ‘गेटकीपर’: उन्होंने कभी सरकार में कोई आधिकारिक पद नहीं संभाला, लेकिन वे अपने पिता के सबसे करीबी सलाहकार और सत्ता के ‘गेटकीपर’ (Gatekeeper) माने जाते थे।

IRGC का समर्थन और परमाणु कार्यक्रम की चाबी

ईरान के सुप्रीम लीडर का पद देश का सबसे शक्तिशाली पद है। अब मोजतबा के हाथों में देश की विदेश नीति, रक्षा नीति और सबसे अहम ‘परमाणु कार्यक्रम’ (Nuclear Program) का रिमोट कंट्रोल होगा।

पश्चिमी देशों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) और सुरक्षा एजेंसियों के बेहद करीबी मोजतबा परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई आक्रामक रुख अपना सकते हैं।

कांटों भरा ताज: अंदरूनी विरोध और बाहरी खतरे

मोजतबा खामेनेई की राह इतनी आसान नहीं होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘वंशवाद’ के आरोप के चलते ईरान के भीतर कुछ वर्गों में उनके नेतृत्व को लेकर कड़ा विरोध देखने को मिल सकता है।

वहीं, अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहे सीधे टकराव के बीच, मोजतबा की विदेश नीति और उनका अगला कदम ही यह तय करेगा कि मध्य पूर्व का यह युद्ध किस दिशा में जाएगा।

Santosh SETH

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