ईरान युद्ध: ट्रंप और नेतन्याहू में दरार, हमले रोकने पर विवाद
ईरान युद्ध पर अमेरिका और इजरायल में भारी दरार: ट्रंप ने रोके हमले तो भड़के नेतन्याहू; बैक-चैनल कूटनीति और सीनेट में घमासान”
वाशिंगटन/यरुशलम: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
पश्चिम एशिया में सुलग रहे ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका और इजरायल के बीच के रणनीतिक मतभेद अब पूरी तरह से खुलकर दुनिया के सामने आ गए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) के बीच बुधवार को हुई एक टेलीफोन वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।
ट्रंप द्वारा ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमलों को अचानक रोकने के फैसले से नेतन्याहू बेहद नाराज हैं।
ट्रंप और नेतन्याहू के बीच 1 घंटे की तनावपूर्ण बातचीत
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक फोन पर बातचीत हुई।
नेतन्याहू की आपत्ति: इस बातचीत में नेतन्याहू ने सख्त लहजे में कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को टालना एक ‘बड़ी गलती’ है।
उनका मानना है कि सैन्य दबाव कम करने से ईरान को संभलने का समय मिल जाएगा, जिसका वह गलत फायदा उठा सकता है।
ट्रंप का तर्क: दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि सैन्य दबाव के साथ-साथ कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को पूरी तरह खत्म नहीं किया जाना चाहिए।
खाड़ी देशों का दबाव और 30 दिन के समझौते का ड्राफ्ट
सूत्रों के अनुसार, ट्रंप ने इस फैसले के पीछे मध्यस्थ देशों के प्रयासों का हवाला दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच एक ‘प्रारंभिक समझौता पत्र’ तैयार करने की कोशिश चल रही है, ताकि युद्ध को समाप्त कर आगे की वार्ताओं का रास्ता खोला जा सके।
समझौते के बिंदु: इस प्रस्तावित योजना के तहत लगभग 30 दिनों तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत की जा सकती है।
अरब देशों की अपील: कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे अमेरिकी सहयोगियों ने तनाव को कम करने की अपील की थी। इन देशों को आशंका है कि व्यापक युद्ध से पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता और वैश्विक तेल आपूर्ति पर विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है।
रणनीति में भारी अंतर: अमेरिका बनाम इजरायल
| देश और नेता | ईरान युद्ध पर मुख्य रणनीति | कूटनीतिक दृष्टिकोण |
| अमेरिका (डोनाल्ड ट्रंप) | संयम बरतना, लक्षित हमलों को फिलहाल रोकना। | समझौते के लिए कूटनीतिक रास्ते खुले रखना। |
| इजरायल (बेंजामिन नेतन्याहू) | बिना रुके कठोर और आक्रामक सैन्य कार्रवाई। | कूटनीति को ईरान के लिए ‘समय हासिल करने की चाल’ मानना। |
अमेरिका के भीतर भी राजनीतिक घमासान तेज
ईरान युद्ध केवल कूटनीतिक मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि अमेरिका की घरेलू राजनीति में भी बवाल मचा रहा है।
अमेरिकी सीनेट में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव आगे बढ़ाया गया है, जो राष्ट्रपति ट्रंप को अमेरिकी कांग्रेस की अनुमति के बिना ईरान के खिलाफ युद्ध जारी रखने से रोक सकता है।
1973 युद्ध अधिकार कानून: डेमोक्रेट्स और कई रिपब्लिकन सांसदों का तर्क है कि 1973 के कानून के अनुसार राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की मंजूरी के लंबे समय तक युद्ध नहीं लड़ सकते।
व्हाइट हाउस का बचाव: इसके विपरीत, ट्रंप समर्थकों का तर्क है कि राष्ट्रपति ने देश की सुरक्षा के लिए संवैधानिक अधिकारों के तहत ही यह कार्रवाई की है।
पाकिस्तान के रास्ते हो रही है सीक्रेट बातचीत
इन सबके बीच एक बड़ा कूटनीतिक संकेत ईरान की तरफ से भी मिला है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच पाकिस्तान के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान लगातार जारी है। यह स्पष्ट करता है कि पर्दे के पीछे संवाद की प्रक्रिया अब भी चल रही है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नेतन्याहू के आक्रामक रुख और ट्रंप की कूटनीतिक दुविधा के बीच पश्चिम एशिया का यह शक्ति संतुलन किस करवट बैठता है।
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