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‘रूस से तेल खरीदना बंद?’: भारत का अमेरिका को दो टूक जवाब, कहा- 1.4 अरब लोगों का हित सर्वोपरि; व्यापार शुल्क घटकर 18% हुआ

“रूसी तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका द्वारा किए गए दावों पर भारत ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है”

नई दिल्ली:”The Politics Again” संतोष सेठ की रिपोर्ट 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में साफ कर दिया कि भारत की ऊर्जा नीति किसी दूसरे देश के दबाव या घोषणा से नहीं, बल्कि अपने 1.4 अरब नागरिकों की जरूरतों से तय होती है।

अमेरिका ने हाल ही में दावा किया था कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गया है। इस दावे की हवा निकालते हुए जायसवाल ने कहा,

“ऊर्जा सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हम अपनी खरीद में विविधता (Diversification) लाते रहेंगे ताकि देश में तेल की सप्लाई, कीमत और रणनीतिक संतुलन बना रहे।”

वेनेजुएला के लिए भी दरवाजे खुले

भारत ने केवल रूस ही नहीं, बल्कि वेनेजुएला को लेकर भी अपना रुख साफ किया। प्रवक्ता ने बताया कि वेनेजुएला भारत का पुराना ऊर्जा साझेदार रहा है।

प्रतिबंधों के कारण बीच में खरीद रुकी थी, लेकिन भारत ने दरवाजा बंद नहीं किया है। अगर वाणिज्यिक लाभ (Commercial viability) दिखा, तो भविष्य में वहां से भी तेल आयात पर विचार होगा।

बड़ी खबर: अमेरिका ने घटाया टैरिफ, अब 18% लगेगा शुल्क

भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में एक बड़ी राहत की खबर भी सामने आई है। पीएम मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बातचीत का असर दिखने लगा है।

  • नया नियम: अब भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में केवल 18% शुल्क (Tariff) लगेगा।

  • फायदा: विदेश मंत्रालय ने इसे भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ा अवसर बताया है। अमेरिका ने भी स्पष्ट किया है कि यह दर दोनों देशों के लिए लाभकारी होगी।

ईरान में फंसे नाविकों को राहत

ईरान में पकड़े गए 16 भारतीय नाविकों के मामले में भी सरकार सक्रिय है। भारतीय अधिकारियों को उन तक ‘कांसुलर एक्सेस’ मिल गया है।

अच्छी खबर यह है कि 8 नाविक रिहा कर दिए गए हैं और वे जल्द घर लौटेंगे। बाकी 8 की रिहाई के लिए प्रयास जारी हैं।

निष्कर्ष: भारत की ‘इंडिया फर्स्ट’ नीति

इस प्रेस वार्ता से एक संदेश साफ गया है—भारत सुनता सबकी है, लेकिन करता अपने मन की है। चाहे रूसी तेल हो, अमेरिकी व्यापार हो या वेनेजुएला से संबंध, हर फैसले के केंद्र में केवल ‘भारत का हित’ (National Interest) है।

Santosh SETH

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