भारत और न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्रियों के बीच 2030 के रोडमैप पर समझौता

भारत-न्यूज़ीलैंड रणनीतिक साझेदारी: ‘रोडमैप 2030’ को मंजूरी

भारत-न्यूज़ीलैंड के बीच ‘रणनीतिक साझेदारी 2030’ को ऐतिहासिक मंजूरी, 35 हज़ार करोड़ के व्यापार से लेकर रक्षा तक… पढ़ें 6 बड़े स्तंभों की पूरी डिटेल”

ऑकलैंड/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारत और न्यूज़ीलैंड के संबंधों में एक नए और ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत हुई है। 11 जुलाई 2026 को न्यूज़ीलैंड के ऑकलैंड में भारत और न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्रियों के बीच हुई उच्च-स्तरीय बैठक में ‘भारत-न्यूज़ीलैंड रणनीतिक साझेदारी’ की आधिकारिक घोषणा की गई।

दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने अगले चार वर्षों में आपसी सहयोग और संयुक्त कार्रवाई को दिशा देने के लिए एक साझा ढांचे के रूप में ‘2030 के रोडमैप’ को अपनी मंजूरी दे दी है।

इस रोडमैप को मुख्य रूप से 6 बड़े स्तंभों (Pillars) में बांटा गया है, जो दोनों देशों के भविष्य के संबंधों की रूपरेखा तय करेंगे। आइए जानते हैं इन 6 स्तंभों के बारे में:

स्तंभ I: राजनीतिक और राजनयिक भागीदारी

कूटनीतिक स्तर पर संबंधों को और मज़बूत करने के लिए दोनों देशों ने कई अहम फैसले लिए हैं:

  • प्रधानमंत्रियों, विदेश मंत्रियों और कैबिनेट मंत्रियों के बीच नियमित मुलाकातें और आपसी दौरे होंगे।

  • दोनों देशों की संसदों के बीच आधिकारिक यात्राओं को बढ़ावा दिया जाएगा।

  • ‘रणनीतिक साझेदारी और 2030 के रोडमैप’ को लागू करने के लिए भारत के विदेश मंत्रालय (सचिव स्तर) और न्यूज़ीलैंड के विदेश मामलों के मंत्रालय के बीच सालाना बैठकें होंगी।

स्तंभ II: रक्षा और सुरक्षा सहयोग

राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य सहयोग इस साझेदारी का एक अहम हिस्सा है:

  • सैन्य युद्धाभ्यास: दोनों देशों की सेनाओं (समुद्री, हवाई, ज़मीनी) के बीच युद्धाभ्यास और जवानों का आदान-प्रदान किया जाएगा।

  • समुद्री सुरक्षा: इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) के तहत समुद्री सुरक्षा पर विशेष फोकस रहेगा और सालाना समुद्री सुरक्षा वार्ता शुरू की जाएगी।

  • आतंकवाद और साइबर सुरक्षा: आतंकवाद-रोधी (CT) मामलों पर एक संयुक्त कार्य समूह (JWG) बनाया जाएगा। साथ ही, साइबर सुरक्षा संवाद पर काम होगा।

  • NIA और पुलिस सहयोग: नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने और कानून व्यवस्था के लिए भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और न्यूज़ीलैंड पुलिस के बीच आधिकारिक समझौता किया जाएगा।

स्तंभ III: व्यापार और आर्थिक सहयोग

अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए 2030 तक कई बड़े लक्ष्य रखे गए हैं:

  • व्यापार होगा दोगुना: 2030 तक दोनों देशों के बीच सामान और सेवाओं के आपसी व्यापार को दोगुना करके NZ$7 बिलियन (लगभग ₹35,000 करोड़) तक पहुँचाने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है।

  • मुक्त व्यापार समझौता (FTA): भारत-न्यूज़ीलैंड FTA को जल्द और प्रभावी ढंग से लागू करने पर ज़ोर दिया जाएगा।

  • कृषि और डेयरी: बागवानी, वानिकी (Forestry), पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान और तकनीकी ज्ञान का आदान-प्रदान होगा।

  • सीधी उड़ानें (Direct Flights): पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एयरलाइंस को दोनों देशों के बीच बिना रुके सीधी उड़ानें शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

स्तंभ IV: लोग, संस्कृति और खेल

दोनों देशों के नागरिकों को एक-दूसरे के करीब लाने के लिए कई पहल की गई हैं:

  • प्रवासी भारतीय समुदायों को भागीदार बनाया जाएगा। खेल (स्पोर्ट्स) और पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में विशेषज्ञों का आदान-प्रदान होगा।

  • समुद्री कर्मचारियों की योग्यता (Seafarer Certificates) की मान्यता को मज़बूत किया जाएगा।

  • गुजरात के लोथल में स्थित ‘राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर’ और न्यूज़ीलैंड मैरीटाइम म्यूज़ियम के बीच अहम सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

स्तंभ V: शिक्षा, अनुसंधान, विज्ञान और आपदा प्रबंधन

  • दोनों देशों के शिक्षा प्रणालियों के बीच जानकारी साझा करने के लिए संस्थागत साझेदारियां बढ़ाई जाएंगी।

  • न्यूज़ीलैंड, ‘अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA)’ और ‘वैश्विक बायोफ्यूल्स गठबंधन (GBA)’ के साथ जुड़कर स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन पर भारत का साथ देगा।

  • भारत के NDMA और न्यूज़ीलैंड के NEMA के बीच आपदा प्रबंधन, इमरजेंसी प्रतिक्रिया और क्षमता निर्माण पर सहयोग होगा।

स्तंभ VI: क्षेत्रीय और बहुपक्षीय सहयोग

वैश्विक मंचों पर भारत और न्यूज़ीलैंड एक सुर में बात करेंगे:

  • इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों (UNCLOS) का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

  • UNSC में भारत का समर्थन: संयुक्त राष्ट्र में सुधारों का समर्थन किया जाएगा, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का न्यूज़ीलैंड पुरज़ोर समर्थन करेगा।

(नोट: यह 2030 का रोडमैप भविष्य के सहयोग के लिए एक रणनीतिक दिशा-निर्देश है, यह कोई कानूनी या वित्तीय रूप से बाध्यकारी समझौता नहीं है।)