भारत-EU FTA: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद अब भारत की ‘आर्थिक स्ट्राइक’, पाकिस्तान और बांग्लादेश के टेक्सटाइल बाजार में मची खलबली

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सैन्य कार्रवाई से अभी पाकिस्तान पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था कि भारत ने एक नया और घातक ‘आर्थिक मोर्चा’ खोल दिया है”

नई दिल्ली/ब्रूसेल्स: ‘ThePoliticsAgain’ संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने दक्षिण एशिया के व्यापारिक समीकरणों को हमेशा के लिए बदल दिया है।

इस समझौते ने नई दिल्ली को वह शक्ति दे दी है, जिससे इस्लामाबाद और ढाका की रातों की नींद हराम हो गई है।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश (EU बाजार में)

मापदंड (Parameters) 🇮🇳 भारत (India) 🇵🇰 पाकिस्तान (Pakistan) 🇧🇩 बांग्लादेश (Bangladesh)
EU के साथ व्यापारिक दर्जा FTA पार्टनर (Strategic Partner) GSP+ (प्राथमिकता दर्जा) EBA (एवरीथिंग बट आर्म्स – LDC)
टेक्सटाइल पर टैरिफ (शुल्क) 0% (पहले 12% था) 0% (शर्तों के अधीन) 0% (कोटा-फ्री)
समुद्री उत्पादों पर टैरिफ 0% (पहले 26% था) 0% 0%
EU के साथ कुल व्यापार (2024) €120 बिलियन €12 बिलियन €22.2 बिलियन
टेक्सटाइल पर निर्भरता विविध निर्यात (IT, Pharma, Auto, Textile) अत्यधिक (EU को 75.8% निर्यात केवल टेक्सटाइल) अत्यधिक (EU को 94% निर्यात केवल टेक्सटाइल)
भविष्य की चुनौती गुणवत्ता और क्षमता बढ़ाना GSP+ दर्जा छिनने का डर (मानवाधिकार मुद्दे) LDC (अविकसित देश) का दर्जा खत्म होने का डर
राजनीतिक प्रभाव स्थिर और मजबूत ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और आंतरिक अस्थिरता का असर राजनीतिक परिवर्तन और लेबर इश्यू

 

टेक्सटाइल किंग बनने की जंग: भारत का पलड़ा भारी

अब तक, पाकिस्तान और बांग्लादेश यूरोपीय बाजार में अपने टेक्सटाइल (कपड़ा) उद्योग के दम पर टिके हुए थे।

उन्हें GSP+ और EBA (एवरीथिंग बट आर्म्स) जैसी योजनाओं के तहत विशेष छूट मिलती थी, जबकि भारतीय सामानों को भारी टैरिफ (टेक्सटाइल पर 12% और समुद्री उत्पादों पर 26%) चुकाना पड़ता था।

लेकिन इस FTA ने खेल पलट दिया है। अब भारत के 93% उत्पादों को यूरोपीय संघ में ‘ड्यूटी-फ्री’ (शून्य शुल्क) एंट्री मिलेगी।

इसका सीधा मतलब है कि भारतीय कपड़ा अब यूरोपीय बाजारों में पाकिस्तान और बांग्लादेश के कपड़ों की कीमतों को कड़ी टक्कर देगा, वह भी बेहतर गुणवत्ता के साथ।

पाकिस्तान में डर: “यह एक नया आर्थिक युद्ध है”

पाकिस्तानी मीडिया हाउस ‘डॉन’ (Dawn) की रिपोर्ट के मुताबिक, वहां के टेक्सटाइल निर्यातकों में भारी घबराहट है।

एक व्यापारिक संगठन के पदाधिकारी ने इसे भारत द्वारा खोला गया “आर्थिक मोर्चा” करार दिया है। आंकड़े गवाह हैं:

  • यूरोपीय संघ पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है (2024 में €12 बिलियन का व्यापार)।

  • पाकिस्तान के कुल टेक्सटाइल निर्यात का 75.8% हिस्सा यूरोप जाता है।

  • अब जब भारतीय माल पर से 12% का टैक्स हट गया है, तो पाकिस्तानी निर्यातकों का ‘प्राइस एडवांटेज’ पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

बांग्लादेश की चुनौती: EBA का कवच हुआ कमजोर

बांग्लादेश के लिए यूरोप उसका सबसे बड़ा बाजार है (2024 में €22.2 बिलियन)। बांग्लादेश का 94% निर्यात टेक्सटाइल पर निर्भर है।

अब तक ‘सबसे कम विकसित देश’ (LDC) होने के नाते उसे छूट मिलती थी, लेकिन भारत के FTA ने उस छूट के महत्व को कम कर दिया है।

भारतीय मैन्युफैक्चरिंग की विशाल क्षमता और अब ‘जीरो ड्यूटी’ एक्सेस बांग्लादेशी गारमेंट इंडस्ट्री के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा कर सकती है।

“भारत की दोहरी जीत विशेषज्ञों का मानना है कि 2024 में बिना किसी छूट के भी भारत-EU व्यापार €120 बिलियन का था। अब FTA लागू होने के बाद यह आंकड़ा आसमान छू सकता है।

भारत ने न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है, बल्कि कूटनीतिक रूप से अपने पड़ोसियों को आर्थिक मोर्चे पर घेर लिया है”

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