काशी में टूटी 483 साल पुरानी परंपरा, रामलीला के दौरान नहीं पढ़ी गई नमाज
काशी में टूटी 483 साल पुरानी ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ की परंपरा: लाटभैरव रामलीला में नीम के पेड़ के विवाद पर मुस्लिम पक्ष ने नहीं पढ़ी नमाज”
वाराणसी (काशी): द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
धार्मिक सद्भाव और ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ की मिसाल मानी जाने वाली काशी की लाटभैरव रामलीला में मंगलवार को एक 483 साल पुरानी ऐतिहासिक परंपरा टूट गई।
आदमपुर क्षेत्र के लाट भैरव मंदिर परिसर में हर साल रामलीला (जयंत नेत्र भंग प्रसंग) के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करते थे।
एक तरफ रामायण की चौपाइयां गूंजती थीं, तो दूसरी तरफ कुरान की आयतें पढ़ी जाती थीं। लेकिन इस बार अजान तो हुई, मगर परिसर में नमाजियों की कतार नहीं लगी।
इस ऐतिहासिक परंपरा के टूटने का मुख्य कारण मंदिर परिसर में स्थित एक ‘नीम के पेड़’ को लेकर दोनों पक्षों के बीच उपजा विवाद बताया जा रहा है।
क्यों नहीं पढ़ी गई नमाज? (विवाद की मुख्य वजह)
मुस्लिम पक्ष ने रामलीला के दौरान नमाज का बहिष्कार कर अपना विरोध दर्ज कराया है।
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मुस्लिम पक्ष का आरोप: मुतवल्ली अनीसुर्रहमान का कहना है कि नमाज डर की वजह से नहीं, बल्कि विरोध में नहीं पढ़ी गई।
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उनका दावा है कि परिसर का नीम का पेड़ उनका है, लेकिन रामलीला कमेटी के लोग पिछले 15 दिनों से उस पर लाल चुनरी और धागा बांध रहे हैं, और उस पर ‘राम’ लिख दिया जाता है। शिकायत करने पर सुनवाई नहीं होती और पुलिस धमकाती है।
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हिंदू पक्ष का तर्क: श्री आदि रामलीला लाट भैरव वरुणा संगम के संरक्षक रोहित जायसवाल ने इन आरोपों को खारिज किया है।
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उनका कहना है कि नीम के पेड़ पर कई वर्षों से नवमी और अन्य त्योहारों पर ‘मां शीतला’ की पूजा होती है। यह पेड़ हमेशा से हिंदू पक्ष का रहा है और उनके पास इसके पूरे कागजात मौजूद हैं।
रामलीला जारी रही, मुफ्ती ने जताई चिंता
इस विवाद और नमाजियों के न आने पर रामलीला समिति के प्रधान व्यास दयाशंकर त्रिपाठी ने निराशा जताते हुए कहा कि यह 483 वर्षों से आपसी सद्भाव का संदेश देता आ रहा था।
उन्होंने इसे रामलीला और मंदिर के प्रति विरोध के रूप में देखा। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच रामलीला का मंचन अपने निर्धारित समय (शाम 6 बजे) पर जारी रहा और ‘जयंत नेत्र भंग’ की लीला संपन्न हुई।
वहीं, मुफ्ती-ए-बनारस, मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने नमाज न पढ़े जाने पर कहा कि, “मस्जिद में नमाज किसी भी हाल में रुक नहीं सकती। एक व्यक्ति पढ़े या 100, लेकिन नमाज अदा होनी ही चाहिए।”
📊 लाटभैरव रामलीला विवाद (एक नज़र में)
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प्रमुख बिंदु (Key Highlights) |
विस्तृत विवरण (Details) |
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📍 स्थान |
लाट भैरव मंदिर परिसर, आदमपुर क्षेत्र (वाराणसी)। |
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🕰️ टूटी परंपरा |
483 साल पुरानी गंगा-जमुनी तहजीब की परंपरा (रामलीला और नमाज एक साथ)। |
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🌳 विवाद का कारण |
परिसर में स्थित ‘नीम का पेड़’, जिस पर दोनों पक्ष अपना दावा कर रहे हैं। |
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🕌 मुस्लिम पक्ष का दावा |
पेड़ उनका है; चुनरी बांधने और ‘राम’ लिखने के विरोध में (मगरिब की) नमाज नहीं पढ़ी। |
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🕉️ हिंदू पक्ष का दावा |
पेड़ पर वर्षों से ‘मां शीतला’ की पूजा होती है; उनके पास जमीन के कागजात मौजूद हैं। |
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🎭 रामलीला का प्रसंग |
जयंत नेत्र भंग प्रसंग (मंचन निर्धारित समय पर शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ)। |











