भारत और ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक सीटीईए (CETA) लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
भारत-ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता (CETA) लागू, स्कॉच व्हिस्की से लेकर कारें होंगी सस्ती; जानें किसे मिलेगा फायदा”
नई दिल्ली: भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक नए युग की शुरुआत हुई है। दोनों देशों के बीच बहुप्रतीक्षित ‘व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता’ (CETA) आज से लागू हो गया है।
इसे पिछले कुछ वर्षों में भारत के सबसे बड़े और व्यापक मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) में से एक माना जा रहा है।
सरकार का दावा है कि इस बड़े कदम से देश के किसानों, श्रमिकों, एमएसएमई (MSME), निर्यातकों और सेवा क्षेत्र को जबरदस्त लाभ मिलेगा।
यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में लागू होने वाला छठा मुक्त व्यापार समझौता है। इससे पहले भारत मॉरीशस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ईएफटीए (यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ) और ओमान के साथ ऐसे सफल समझौते लागू कर चुका है।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इसे भारत के व्यापारिक इतिहास का एक अहम पड़ाव बताते हुए कहा कि यह केवल टैरिफ घटाने वाला समझौता नहीं है, बल्कि व्यापार, निवेश, सेवाओं और रोजगार के नए अवसरों का एक व्यापक ढांचा है।
सीईटीए (CETA) के तहत भारत और ब्रिटेन सैकड़ों उत्पादों पर आयात शुल्क को या तो कम करेंगे या पूरी तरह समाप्त कर देंगे। 30 अध्यायों वाले इस समझौते को भारत का सबसे व्यापक एफटीए माना जा रहा है।
99% ड्यूटी फ्री एक्सेस: इस करार से भारत के करीब 99 फीसदी निर्यात को ब्रिटिश बाजार में बिना किसी शुल्क (ड्यूटी फ्री) के पहुंच मिलेगी।
ब्रिटिश कंपनियों को मौका: पहली बार ब्रिटेन की कंपनियों को भारत सरकार की करीब 40 हजार उच्च मूल्य वाली निविदाओं (Tenders) में भाग लेने का अवसर मिलेगा।
आईटी सेक्टर को राहत: ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ के तहत भारत से ब्रिटेन जाने वाले कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को पहले पांच वर्षों तक ब्रिटेन में कोई सोशल सिक्योरिटी (सामाजिक सुरक्षा) योगदान नहीं देना होगा।
इस एफटीए में भारत ने पहली बार ब्रिटेन में बनी पूरी तरह तैयार कारों और ट्रकों पर बड़ी सीमा शुल्क रियायत दी है:
पूरी तरह बनी कारों पर आयात शुल्क 110 फीसदी से घटाकर चरणबद्ध तरीके से 10 फीसदी किया जाएगा। पेट्रोल-डीजल कारों को शुरुआत से ही यह रियायत मिलेगी।
भारतीय ईवी (EV) उद्योग को सुरक्षा देने के लिए इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन कारों को यह छूट छठे वर्ष से दी जाएगी।
पहले 15 वर्षों में रियायती शुल्क पर 3.78 लाख ब्रिटिश यात्री वाहनों के आयात की अनुमति होगी।
शराब: स्कॉच व्हिस्की समेत कई प्रीमियम विदेशी शराबों पर मौजूद 150 फीसदी आयात शुल्क पहले चरण में घटकर 75 फीसदी और दस वर्षों के भीतर 40 फीसदी रह जाएगा।
क्या-क्या होगा सस्ता?: ब्रिटेन से आयातित सैल्मन मछली, लैम्ब (भेड़ का मांस), मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, चॉकलेट, सॉफ्ट ड्रिंक्स, कॉस्मेटिक्स, साबुन, परफ्यूम, शेविंग क्रीम और नेल पॉलिश आदि सस्ते होंगे।
इस समझौते से भारत के रेडीमेड गारमेंट और टेक्सटाइल, फुटवियर, कालीन उद्योग, प्रोसेस्ड फूड, अनाज, फल और सब्जियां, मसाले, मछली और समुद्री उत्पाद, मांस, ऑटोमोबाइल व मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है।
हालांकि, भारत ने अपने घरेलू बाजार को बचाने के लिए सेब, अखरोट, व्हे, सोने की ईंटों व स्मार्टफोन जैसे संवेदनशील उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है। वहीं, ब्रिटेन ने भी चावल और चीनी को इससे बाहर रखा है।
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