हिमाचल / सोलन : भारी बारिश से दरके पहाड़, कई मकान हुए क्षतिग्रस्त

“सोलन जिले में बरसात का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार व मंगलवार को हुई बारिश से सोलन जिला में जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ है”

सोलन 03 / 09 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

औद्योगिक क्षेत्र बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने तबाही मचाई हुई है। मंगलवार को नालागढ़ में तीन कच्चे और तीन पक्के मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं, दो गौशालाएं ढह गई हैं और दो रिटेनिंग वॉल भी टूटकर धराशायी हो चुकी हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक तीन कच्चे मकान क्षतिग्रस्त होने से करीब दो लाख रुपए का नुकसान हुआ है, जबकि तीन पक्के मकान टूटने से पंद्रह लाख रुपए से अधिक का आर्थिक आकलन दर्ज किया गया है। इसके अलावा दो गौशालाओं के गिरने से ढाई लाख रुपए का नुकसान हुआ है।

वहीं दो रिटेनिंग वॉल्स ढहने से आसपास के घरों और भूमि पर खतरा और बढ़ गया है। प्रभावित परिवारों में प्रीम लाल पुत्र बख्शू राम निवासी कांडो, अजीत कुमार पुत्र मथुरा सिंह निवासी वार्ड नं.-7 नालागढ़, जय लाल पुत्र राम निवासी मंगलपुर, सुभाष चंद निवासी भटोली कलां, संदीप कुमार पुत्र महेंद्र सिंह निवासी बग्लान, राजेंद्र सिंह पुत्र धर्म सिंह निवासी रजवाहन लूनुस, गुरुदत्त पुत्र सूरज सिंह निवासी डडोवाल, बृजलाल पुत्र राम निवासी मंगलपुर, कर्मवीर लाल पुत्र दीप चंद और राजेश्वर सिंह पुत्र नारायण सिंह निवासी वार्ड नं.- 9 नालागढ़ शामिल हैं।

उपमंडल अधिकारी नालागढ़ राजकुमार ने कहा की प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है और टीमों को नुकसान का निरीक्षण करवाने के निर्देश जारी किए हैं।

औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में दिन-रात बरसते पानी ने पहाड़ों को दरकने पर मजबूर कर दिया है और गांवों को खौफ के साए में ढकेल दिया है। उपमंडल नालागढ़ के तहत धर्माणा, सौर, लूनुस और डोली पंचायत के लोग अपने ही घरों से बेघर हो गए हैं।

कहीं दीवारें धंस गईं, कहीं छतें टूटकर गिर गईं, तो कहीं खेत दरारों से चीरते चले गए। मवेशी खुले आसमान के नीचे तिरपालों में बंधे हैं और महिलाएं, बच्चे दूसरों के घरों या पंचायत भवनों में शरण लिए हुए हैं।

प्रशासन के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि अब तक 60 से ज्यादा मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिनमें से पांच पूरी तरह ढह गए। इस आपदा से 96 लाख रुपए से अधिक का नुक़सान आंका गया है।

प्रशासन का आकलन है कि रविवार रात से जारी बारिश से सिर्फ पांच पूरी तरह ढहे मकानों से ही लगभग 95 लाख रुपए का नुक़सान हुआ है। आंशिक क्षति वाले छह घरों का हिसाब जोड़ें तो कुल आंकड़ा 96.34 लाख रुपए से ऊपर जा पहुंचा है।

कालका-शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग-पांच पर सनवारा के पास हुए भारी भूस्खलन के कारण वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई है। पहाड़ी से अचानक मलबा और चट्टानें सडक़ पर आ गिरने से दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

यह भूस्खलन इतना बड़ा था कि इसने न केवल हाइवे को बंद कर दिया है, बल्कि इसके ठीक ऊपर से गुजर रही कसौली रोड को भी खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की है।

दत्यार से धर्मपुर तक पहाड़ी वाली लेन को बंद कर दिया गया है और ट्रैफिक को दूसरी लेन से डायवर्ट किया जा रहा है, जिससे जाम की स्थिति और भी गंभीर हो गई है ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर मौजूद रहे और मलबे को हटाने का काम तेजी से चल रहा है।

हालांकि, भारी मात्रा में मलबा होने के कारण सडक़ को पूरी तरह से खोलने में समय लग सकता है। इसके अलावा, चक्कीमोड़ के पास भी भूस्खलन के कारण यातायात को वन-वे कर दिया गया है, जिससे पूरे मार्ग पर आवाजाही धीमी हो गई है।

परवाणू से कैथलीघाट तक के पूरे खंड में जगह-जगह सडक़ पर मलबा गिरा हुआ है, जिससे वाहन चालक डर के साये में सफर कर रहे हैं। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे धैर्य रखें और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें।

बरसात ने जहां लोक निर्माण विभाग को भी खासी चपत लगाई है। सोमवार व मंगलवार को हुई बारिश से सोलन जिला में जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ है और लोक निर्माण विभाग की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। इस बारिश के चलते विभाग को 8 करोड़ 58 लाख रुपए का नुकसान हो गया है।

वहीं, जिला की 115 सडक़ें अवरूद्ध हैं, जिन्हें खोलने के लिए विभाग के कर्मचारी फील्ड में डटे हुए हैं, लेकिन भारी बारिश के चलते उन्हें भी कार्य करने में काफी दिक्कतें पेश आ रही हैं।

इस बारिश से एचआरटीसी के भी दो दर्जन से अधिक रूट प्रभावित हुए हैं और जल शक्ति विभाग की परियोजनाओं सहित विद्युत बोर्ड को भी नुकसान पहुंचा है। कहीं डंगे गिरे हैं, कहीं भूस्खलन हुआ है तो कहीं मलबा आने से मकान ढह गए हैं या फिर मकानों को खतरा पैदा हो गया है।

बारिश से वैसे तो सभी विभागों को खासा नुकसान हुआ है, लेकिन सबसे अधिक नुकसान लोक निर्माण विभाग को झेलना पड़ा है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे की बारिश में ही अकेले लोनिवि के 8 करोड़ 58 लाख 7 हजार रुपए डूब गए हैं।

इनमें सबसे अधिक 29 करोड़ 84 लाख 81 हजार का नुकसान नालागढ़ मंडल को हुआ है। जबकि सोलन मंडल को 70 लाख, कसौली मंडल को 1 करोड़ 80 लाख 15 हजार व अर्की मंडल को 3 करोड़ 62 लाख 82 हजार का नुकसान पहुंचा है।

उधर, बारिश के चलते सोलन डिपो के भी दो दर्जन से अधिक रूट प्रभावित हुए हैं। वहीं, राजगढ़ मार्ग पर जगह-जगह आए भूस्खलन से इस रूट पर जाने वाले सभी बसें बंद हो गई हैं।

इन दो दिनों की बारिश का प्रकोप कुछ ऐसा रहा कि सोमवार से मंगलवार तक जिला में कुल 115 मार्ग अवरूद्ध हो गए। इनमें नालागढ़ मंडल में सबसे अधिक 29 मार्ग अवरूद्ध हुए हैं, जबकि अर्की में 27 मार्ग, कसौली में 16 मार्ग और सोलन मंडल में 14 मार्ग शामिल हैं।

इन मार्गों के बंद होने की सूचना के बाद तुरंत ही लोनिवि के कर्मी फील्ड में डटे रहे मंगलवार दोपहर बाद तक उन्होंने भारी बारिश के बीच भी कुल 51 मार्गों को बहाल कर दिया है। वहीं, 35 मार्ग ऐसे हैं, जो कि अभी भी अवरूद्ध हैं और आने वाले एक-दो दिनों में ही इनके खुलने के आसार हैं। (एचडीएम)

पीडब्ल्यूडी के नुकसान का आंकड़ा 90 करोड़ के पार

बरसात के इस सीजन में विभाग के चारों मंडलों को खासा नुकसान पहुंचा है। अब तक विभाग को कुल 90 करोड़ 42 लाख 88 हजार रुपए का नुकसान हो चुका है। इसमें सबसे अधिक 29 करोड़ 84 लाख 81 हजार का नुकसान नालागढ़ मंडल को हुआ है।

कसौली मंडल भी पीछे नहीं है और अब तक इस मंडल में 29 करोड़ 42 लाख 83 हजार रुपए की चपत लग चुकी है। वहीं, अर्की मंडल में 24 करोड़ 93 लाख 4 हजार व सोलन मंडल में 6 करोड़ 22 लाख 20 हजार का नुकसान हुआ है।

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