Jaunpur Heatwave Cattle Care Guidelines

जौनपुर में गोवंशों के लिए हीट वेव अलर्ट, चारे को लेकर चेतावनी

जौनपुर: भीषण गर्मी में गोवंशों के लिए अलर्ट जारी, हरे चारे में ‘जहर’ बनने का खतरा; पशुपालन विभाग ने जारी की सख्त गाइडलाइन

जौनपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

उत्तर प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और जानलेवा लू (Heatwave) का असर अब इंसानों के साथ-साथ पशुओं पर भी भारी पड़ रहा है।

इसे देखते हुए जौनपुर के मुख्य पशुचिकित्साधिकारी ने निदेशक (प्रशासन एवं विकास, पशुपालन विभाग, यूपी) के आदेश पर गोआश्रय स्थलों और पशुपालकों के लिए एक विशेष और सख्त गाइडलाइन जारी की है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तेज गर्मी और पानी की कमी के कारण पशुओं के चारे में ‘विषाक्तता’ (जहर) पैदा होने का खतरा बढ़ गया है, इसलिए उनके खान-पान और रख-रखाव में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

गोआश्रय स्थलों (गौशालाओं) के लिए मूलभूत व्यवस्थाएं

लू से बचाव के लिए गौशालाओं में निम्नलिखित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं:

  • शेड की सुरक्षा: गर्म हवाओं से बचाव के लिए गोवंश शेड को चारों ओर से टाट अथवा बोरे से ढका जाए। संभव हो तो दिन में टाट के पर्दों को पानी से भिगोया जाए ताकि अंदर का तापमान कम रहे।

  • स्वच्छ पेयजल: पशुओं के पीने के लिए स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था हो। पानी की चरनी को नियमित रूप से चूने अथवा ब्लीचिंग पाउडर से साफ किया जाए ताकि शैवाल (Algae) के कारण जल प्रदूषित न हो।

  • रात्रि ड्यूटी: सभी गो आश्रय स्थलों पर रात्रिकालीन गो सेवक/चौकीदार अनिवार्य रूप से नियुक्त किए जाएं। साथ ही, सभी पशु चिकित्साधिकारी अपने मुख्यालयों पर ही रात्रि निवास करेंगे।

हरे चारे को लेकर बड़ी चेतावनी: बन सकता है जहर

विभाग ने पशुपालकों को आगाह किया है कि गर्मी के मौसम में बोए जाने वाले हरे चारे (विशेषकर चरी और सूडान ग्रास) में पानी की कमी के कारण ‘हाइड्रोसाइनिक एसिड’ और ‘नाइट्राइट विषाक्तता’ होने की प्रबल संभावना रहती है। इससे बचाव के लिए:

  • चरी के खेत में समय-समय पर पर्याप्त सिंचाई की जाए।

  • जिस खेत में यूरिया डाला गया हो, वहां सिंचाई के कम से कम एक दिन बाद ही चारा काटकर खिलाएं।

  • पशुओं को केवल हरा चारा न खिलाएं। आहार में 20 प्रतिशत हरे चारे के साथ 80 प्रतिशत गेहूं का भूसा मिलाकर दें।

  • हरे चारे को काटने के बाद एक दिन खेत में ही छोड़ दें, उसके बाद कुट्टी काटकर खिलाएं। दुर्गंध आने पर संदिग्ध चारे का प्रयोग बिल्कुल न करें।

दवाओं का स्टॉक और टीकाकरण अभियान तेज

संभावित बीमारियों और साइनाइड पॉइज़निंग से निपटने के लिए सभी पशु चिकित्सालयों को ‘सोडियम थायोसल्फेट’ (Sodium Thiosulphate) और कीटनाशकों के जहर से बचाने वाले ‘विशिष्ट एंटीडोट’ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके साथ ही, गला घोंटू (H.S.), लंगड़िया (B.Q.) तथा अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाव का टीकाकरण प्राथमिकता पर कराने को कहा गया है।

यदि वृद्धावस्था या गंभीर बीमारी से किसी गोवंश की मृत्यु होती है, तो शव को 6-07 फीट गहरे गड्ढे में दफनाकर निस्तारित करने के आदेश दिए गए हैं।

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