पूर्वी उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में भूजल पीने योग्य, मऊ बलिया सुरक्षित श्रेणी में

“पूर्वी उत्तर प्रदेश में भूजल प्रदूषण, विशेष रूप से आर्सेनिक संदूषण, और इसके समाधान के लिए केंद्र तथा राज्य सरकारों द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में आपने विस्तृत जानकारी प्रदान की है”

नई दिल्ली 09 / 12 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

यहाँ इस लेख के प्रमुख बिंदुओं और भूजल प्रबंधन के लिए सरकार की पहलों का सार प्रस्तुत किया गया है:


💧 पूर्वी उत्तर प्रदेश में भूजल की स्थिति

केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (CGWB) की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश के मऊ और बलिया जिलों में भूजल निष्कर्षण की स्थिति संतोषजनक है:

  • निष्कर्षण चरण (Stage of Extraction – SoE): मऊ और बलिया दोनों जिले ‘सुरक्षित’ श्रेणी के अंतर्गत आते हैं।

  • अति-दोहन की स्थिति: इस क्षेत्र का कोई भी जिला ‘अति-दोहित’ या ‘गंभीर’ श्रेणी में नहीं है।

  • प्रदूषण: हालांकि कुछ छिटपुट पॉकेटों में आर्सेनिक संदूषण की सूचना मिली है, फिर भी समग्र रूप से भूजल सामान्यतः पीने योग्य है।


🏛️ भूजल प्रबंधन में सरकारी पहलें (केंद्र सरकार)

चूँकि ‘जल’ राज्य का विषय है, केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करके राज्य सरकारों के प्रयासों का समर्थन करती है।

1. जल संरक्षण और संचयन

  • जल शक्ति अभियान (JSA):

    • वर्ष 2019 से कार्यान्वित किया जा रहा है।

    • यह जल संचयन और कृत्रिम पुनर्भरण कार्यों के जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन के लिए विभिन्न योजनाओं और निधियों का अभिसरण करता है।

    • वर्तमान में, JSA 2025 का कार्यान्वयन अति-दोहित और गंभीर जिलों पर विशेष ध्यान देने के साथ किया जा रहा है।

  • ‘जल संचय जन भागीदारी’:

    • माननीय प्रधानमंत्री द्वारा वर्षा जल संचयन को जन आंदोलन बनाने के लिए शुरू किया गया है।

    • इसका लक्ष्य सामुदायिक स्वामित्व को बढ़ावा देकर स्थानीय जल चुनौतियों के अनुरूप लागत-प्रभावी समाधान विकसित करना है।

  • मिशन अमृत सरोवर:

    • उद्देश्य: देश के प्रत्येक जिले में कम से कम 75 जल निकायों का विकास और पुनरुद्धार करना।

    • परिणाम: लगभग 69,000 अमृत सरोवरों का निर्माण/पुनरुद्धार किया गया है, जिससे जल भंडारण और भूजल पुनर्भरण में वृद्धि हुई है।

2. मॉनिटरिंग और मैपिंग

  • भूजल प्रबंधन और विनियमन स्कीम (GWM और R):

    • CGWB द्वारा कार्यान्वित।

    • भूजल स्तर और गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग और विवेकपूर्ण भूजल विनियमन इसके प्रमुख स्तंभ हैं।

  • नेक्यूम (National Aquifer Mapping and Management) कार्यक्रम:

    • नेक्यूम 1.0 के सफल समापन के बाद, नेक्यूम 2.0 की शुरुआत की गई है।

    • यह कार्यक्रम विशेष रूप से जल की कमी वाले और गुणवत्ता प्रभावित पॉकेटों पर ध्यान केंद्रित करता है।

3. पेयजल गुणवत्ता और आपूर्ति

  • जल जीवन मिशन (JJM) – हर घर जल:

    • उद्देश्य: देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पर्याप्त मात्रा में, निर्धारित गुणवत्ता का, और नियमित आधार पर संदूषण मुक्त नल का पीने योग्य जल उपलब्ध कराना।

    • उत्तर प्रदेश को आवंटन: वर्ष 2019 से अब तक JJM के तहत केंद्रीय हिस्सेदारी के रूप में $\text{₹}60,816$ करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

    • गुणवत्ता मानक: नल के जल सेवा वितरण के लिए बीआईएस:10500 मानकों को अपनाया गया है।

    • परीक्षण: लगभग 2180 जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। फील्ड टेस्ट किट (FTK) के माध्यम से परीक्षण के लिए प्रत्येक गांव से 5 व्यक्तियों (विशेषकर महिलाओं) को प्रशिक्षित किया जाता है।

    • सामुदायिक जल शोधन संयंत्र (CWPP): राज्यों को गुणवत्ता प्रभावित रिहाइशों में अंतरिम उपाय के रूप में CWPP स्थापित करने की सलाह दी गई है।

4. आर्सेनिक संदूषण का समाधान

  • सीमेंट सीलिंग तकनीक:

    • CGWB द्वारा गहरे आर्सेनिक मुक्त जलभृतों का उपयोग करने के लिए यह अभिनव तकनीक विकसित की गई है।

    • अब तक 525 आर्सेनिक सुरक्षित अन्वेषण कुओं का निर्माण किया गया है।

    • उत्तर प्रदेश में योगदान: राज्य में 294 कुएं शामिल हैं, जिनमें मऊ में 3 और बलिया जिले में 53 कुएं हैं।

    • उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा इस तकनीक का व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है, जिससे 9 जिलों में 204 आर्सेनिक सुरक्षित कुओं से 5 लाख निवासियों को लाभ मिला है।

5. योजनाओं का अभिसरण

  • भूजल प्रबंधन के लिए अधिकांश योजनाएं राज्य और केंद्रीय योजनाओं, जैसे मनरेगा (MNREGA) और पीएमकेएसवाई (PMKSY) के साथ अभिसरण के माध्यम से शुरू की जाती हैं।

  • मनरेगा के तहत, कम से कम 60% व्यय प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (NRM) से संबंधित सार्वजनिक कार्यों, जैसे जल संरक्षण और जल संचयन संरचनाओं के निर्माण पर किया जाना अनिवार्य है।

यह जानकारी जल शक्ति राज्यमंत्री श्री राज भूषण चौधरी द्वारा लोकसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में प्रदान की गई है।

Santosh SETH

Recent Posts

चावल की महंगाई पर सरकार की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 4 बड़े फैसले

चावल की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार का बड़ा 'एक्शन': व्यापारियों के लिए…

21 hours ago

कैंसर की 137 दवाएं 70% तक सस्ती, मरीजों को 3357 करोड़ की बचत

कैंसर के मरीजों के लिए बड़ी राहत: 137 जीवनरक्षक दवाएं हुईं 70% तक सस्ती, सरकार…

21 hours ago

जौनपुर: दिशा समिति की बैठक में किये गए पांच बड़े फैसले

जौनपुर 'दिशा' समिति की बैठक: विकास कार्यों की हुई गहन समीक्षा, सांसद बाबू सिंह कुशवाहा…

21 hours ago

जौनपुर: किसानों की आय बढ़ाने की पहल, 200 कृषकों को बंटे मुफ्त प्याज बीज

जौनपुर के किसानों के लिए खुशखबरी: उद्यान विभाग ने 200 कृषकों को बांटे 'मुफ्त प्याज…

22 hours ago

जौनपुर: रोजगार मेले में जनपद के 589 युवाओं को मिला रोजगार

जौनपुर रोजगार मेला: युवाओं के सपनों को मिली उड़ान, 22 कंपनियों ने 589 अभ्यर्थियों को…

22 hours ago

दिवाली: खुशियों का पर्व या प्रदूषण का संकट? पर्यावरण बनाम राजनीति का द्वंद्व

प्रकाश का पर्व या सांसों का संकट? दिवाली पर प्रदूषण और उस पर होती 'सियासत'…

22 hours ago