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जल की कमी तथा भूजल स्तर में गिरावट संबंधी समस्याएँ और सरकारी प्रयास

“देश के कुछ क्षेत्रों में विभिन्न कारणों, जैसे बढ़ती मांग, अनिश्चित वर्षा, बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण और शहरीकरण के कारण जल की कमी और भूजल भंडार में गिरावट आई है”

नई दिल्ली 09 / 12 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

हालांकि, केंद्र सरकार राज्यों के प्रयासों का समर्थन करने के लिए कई पहलें चला रही है, जिसके परिणामस्वरूप देश की समग्र भूजल स्थिति में सुधार हुआ है।


📈 भूजल स्थिति में सुधार (2017-2025)

केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (CGWB) के आंकड़ों के अनुसार, सरकार के निरंतर प्रयासों से देश की भूजल स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है:

  • कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण: वर्ष 2017 में $432$ BCM (बिलियन क्यूबिक मीटर) से बढ़कर 2025 में $448.52$ BCM हो गया है।

  • सुरक्षित आकलन इकाइयों का प्रतिशत: $62.6\%$ से बढ़कर $73.14\%$ हो गया है।

  • अति-दोहित इकाइयों का प्रतिशत: $17.2\%$ से घटकर $10.8\%$ रह गया है।


🌊 जल और भूजल संरक्षण के लिए प्रमुख पहलें

केंद्र सरकार भूजल संसाधनों के सतत विकास और प्रबंधन के लिए विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के माध्यम से राज्य सरकारों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

1. जल संचयन एवं पुनर्भरण

योजना का नाम उद्देश्य और मुख्य कार्य प्रमुख उपलब्धि
जल शक्ति अभियान (JSA) जल संचयन और कृत्रिम पुनर्भरण कार्यों के कार्यान्वयन हेतु निधियों का समन्वय करना। वर्तमान में JSA 2025 अति-दोहित जिलों पर केंद्रित है। पिछले 4 वर्षों में लगभग $1.21$ करोड़ जल संरक्षण और कृत्रिम पुनर्भरण कार्य पूरे किए गए हैं।
‘जल संचय जन भागीदारी’ वर्षा जल संचयन को जन आंदोलन बनाना; सामुदायिक स्वामित्व के माध्यम से लागत प्रभावी, स्थानीय समाधान विकसित करना। सामुदायिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देकर जल स्थिरता प्राप्त करना।
मिशन अमृत सरोवर देश के प्रत्येक जिले में कम से कम 75 जल निकायों का विकास और पुनरुद्धार करना। लगभग $69,000$ अमृत सरोवरों का निर्माण/पुनरुद्धार।
भूजल के कृत्रिम पुनर्भरण के लिए मास्टर योजना – 2020 देश में $185$ BCM जल दोहन/संचयन के लिए लगभग $1.42$ करोड़ वर्षा जल संचयन संरचनाओं के निर्माण की रूपरेखा तैयार करना। यह राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए उपयुक्त हस्तक्षेपों हेतु एक विस्तृत टूल है।

2. भूजल प्रबंधन और दक्षता

  • अटल भूजल योजना:

    • उद्देश्य: सामुदायिक नेतृत्व वाले सहभागी भूजल प्रबंधन की प्रभावकारिता को प्रदर्शित करना।

    • कार्यान्वयन: 7 राज्यों के 80 जल की कमी वाले जिलों में लागू। इसमें चेक डैम, तालाब, सूक्ष्म सिंचाई आदि को बढ़ावा दिया गया।

  • नेक्यूम (National Aquifer Mapping) 2.0 कार्यक्रम:

    • CGWB द्वारा शुरू किया गया।

    • उद्देश्य: विशेष रूप से जल की कमी वाले और गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए विस्तृत, वैज्ञानिक डेटा प्रदान करना जो स्थायी भूजल प्रबंधन के लिए सटीक निर्णय लेने में सहायक हो।

  • प्रति बूंद अधिक फसल योजना:

    • कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा 2015-16 से कार्यान्वित।

    • फोकस: भूजल के संरक्षण के लिए सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation) के माध्यम से खेत स्तर पर जल उपयोग दक्षता में वृद्धि करना।

3. पेयजल आपूर्ति और शहरी जल प्रबंधन

  • जल जीवन मिशन (JJM) – हर घर जल:

    • उद्देश्य: देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पर्याप्त मात्रा में, निर्धारित गुणवत्ता वाला और नियमित आधार पर संदूषण मुक्त नल का पेयजल उपलब्ध कराना।

    • अद्वितीय दृष्टिकोण: यह मिशन मांग-आधारित, समुदाय-नेतृत्व वाले दृष्टिकोण को अपनाता है और वर्षा जल संचयन तथा ग्रे-वाटर प्रबंधन जैसे उपायों को अनिवार्य घटक बनाता है।

  • अमृत और अमृत 2.0 स्कीम:

    • आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा कार्यान्वित।

    • उद्देश्य: शहरी क्षेत्रों में स्थायी पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करना, जल आपूर्ति योजनाओं का विस्तार करना और नल के पेय जल कनेक्शन प्रदान करना।

ये कदम सरकार की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जबकि यह मानते हुए कि सतत प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है।

Santosh SETH

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