BSNL की शानदार वापसी: राजस्व 25,000 करोड़ के पार, 1 लाख 4G टावर लगे
BSNL की शानदार वापसी : राजस्व 25,000 करोड़ के पार, स्वदेशी 4G और ₹1 के SIM से फिर जीता जा रहा जनता का भरोसा”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
कभी घाटे और खराब नेटवर्क के लिए संघर्ष करने वाला सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) अब अपनी शानदार वापसी की कहानी लिख रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, महज दो सालों के भीतर BSNL डिजिटल समावेश और राष्ट्रीय विकास का एक अहम जरिया बनकर उभरा है।
केंद्रीय संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने डीडी इंडिया (DD India) को दिए एक विशेष साक्षात्कार में BSNL के इस ऐतिहासिक कायाकल्प, स्वदेशी 4G के विस्तार और भविष्य के रोडमैप पर विस्तार से चर्चा की।
वित्तीय कायाकल्प: एबिट्डा (EBITDA) 50 करोड़ से 7,000 करोड़ पहुंचा
डॉ. पेम्मासानी ने BSNL के आर्थिक सुधार को काबिले-तारीफ बताते हुए कुछ बेहद उत्साहजनक आंकड़े साझा किए:
राजस्व में उछाल : पिछले दो वर्षों में BSNL का राजस्व ₹21,000 करोड़ से बढ़कर ₹25,000 करोड़ हो गया है, जो 20-25% की मजबूत वृद्धि दर्शाता है।
मुनाफे की ओर मजबूत कदम : सबसे बड़ी उपलब्धि कंपनी का एबिट्डा (EBITDA) है, जो महज ₹50 करोड़ से छलांग लगाकर लगभग ₹7,000 करोड़ तक पहुंच गया है। यह बेहतर परिचालन क्षमता का साफ संकेत है।
ऑपरेशनल सुधार: 50 हजार टावरों की बदली गई बैटरी
राज्य मंत्री ने बताया कि यह बदलाव कॉरपोरेट अनुशासन और व्यवस्थित कार्यप्रणाली से संभव हुआ है।
अपटाइम (Uptime) का लक्ष्य: पहले आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में टावर अपटाइम केवल 75% था, जिसे सुधारने के लिए 95% का नया लक्ष्य निर्धारित किया गया।
इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड: देशभर में 50,000 टावरों पर बैटरियां बदली गईं, पावर प्लांट अपग्रेड किए गए और पुरानी केबलों को बदला गया।
स्वदेशी 4G तकनीक : दुनिया के टॉप 5 देशों में शामिल हुआ भारत
BSNL की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक स्वदेशी 4G तकनीक का तेजी से विस्तार रहा है। डॉ. पेम्मासानी ने बताया,
“हमने महज एक साल के भीतर 1,00,000 टावरों पर स्वदेशी 4G सेवा शुरू कर दी है, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप है। भारत अब दुनिया का केवल पांचवां ऐसा देश बन गया है, जिसके पास इतनी उन्नत स्वदेशी 4G तकनीक है।”
₹1 में सिम और डाकघरों के जरिए घर-घर पहुंच
जनता का भरोसा फिर से जीतने के लिए BSNL एक आक्रामक और व्यावहारिक रणनीति अपना रहा है:
निजी टेलीकॉम कंपनियों के मुकाबले BSNL के टैरिफ (रिचार्ज प्लान) काफी सस्ते हैं।
लोग नेटवर्क को आजमा सकें, इसके लिए भारतीय डाकघरों के जरिए मात्र 1 रुपये में सिम कार्ड दिए जा रहे हैं।
डाक कर्मचारियों की मदद से ग्रामीण इलाकों में घर-घर जाकर BSNL की बेहतर सेवाओं के प्रति जागरूकता फैलाई जा रही है।
नक्सल प्रभावित और दूरदराज के 35,000 गांवों में कनेक्टिविटी
डॉ. पेम्मासानी ने बताया कि BSNL ने उन दुर्गम और वामपंथी उग्रवाद (नक्सल प्रभावित) वाले इलाकों तक नेटवर्क पहुंचाया है, जहां कोई निजी कंपनी नहीं जाना चाहती।
ऐसे 35,000 गांवों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से करीब 25,000 गांवों में टावर लगाए जा चुके हैं और 10,000 पर काम चल रहा है।
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में कनेक्टिविटी पहुंचने से स्थानीय लोग सीधे प्रशासन से जुड़ रहे हैं, जिससे उग्रवाद कम हो रहा है और विकास पहुंच रहा है।
भारतनेट (BharatNet) और भविष्य का विजन
हर ग्राम पंचायत तक हाई-स्पीड फाइबर पहुंचाने के लिए भारतनेट परियोजना के तहत लगभग ₹1,40,000 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। इसका लक्ष्य पहले चरण में 1.5 करोड़ ग्रामीण परिवारों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाना है।
साक्षात्कार के अंत में राज्य मंत्री ने अगले पांच वर्षों के लिए BSNL के विजन को तीन शब्दों में परिभाषित किया: “विश्वसनीय, गौरवपूर्ण और लाभदायक।”
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