SEMICON India 2026 के माध्यम से भारत दुनिया के सामने अपने 1.27 लाख करोड़ रुपये के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और चिप निर्माण क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है।
‘SEMICON India 2026’: सिलिकॉन की दुनिया में भारत की दमदार दस्तक, चिप पावरहाउस बनने की कहानी”
नई दिल्ली: संतोष सेठ, संपादक (THE POLITICS AGAIN)
17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारका स्थित ‘यशोभूमि’ में प्रतिष्ठित SEMICON India 2026 का भव्य उद्घाटन करेंगे।
इस वैश्विक सम्मेलन में दुनिया भर की दिग्गज चिप कंपनियों के प्रतिनिधि, निवेशक और नीति-निर्माता एक मंच पर जुटेंगे।
भारत, जिसने एक दशक पहले इस उद्योग में लगभग शून्य से शुरुआत की थी, अब दुनिया के सामने अपने सेमीकंडक्टर (चिप) निर्माण की पूरी क्षमता और इकोसिस्टम का प्रदर्शन करने जा रहा है।
इस साल SEMICON India की थीम है: “सिलिकॉन से सिस्टम तक: पूरा इकोसिस्टम बनाना।”
आज दुनिया का 4.3 ट्रिलियन डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पूरी तरह से सेमीकंडक्टर पर टिका है। स्मार्टफोन (जैसे एप्पल की 3 नैनोमीटर तकनीक वाली A19 चिप) से लेकर कार, ड्रोन, विमान, MRI मशीनें और उपग्रह तक, सब कुछ चिप से चलता है।
कोविड महामारी ने दुनिया को यह कड़ा सबक सिखाया कि स्टील या मजदूरों की नहीं, बल्कि ‘चिप की कमी’ से बड़े-बड़े कारखाने ठप पड़ सकते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में भारत की लंबी छलांग विदेशी निवेश और टैक्स सुधारों के बाद भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स में अभूतपूर्व वृद्धि की है:
उत्पादन: 2014-15 में 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 तक 13.11 लाख करोड़ रुपये (7 गुना वृद्धि)।
निर्यात: 38,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपये (11 गुना वृद्धि)।
स्मार्टफोन: कभी मोबाइल का शुद्ध आयातक रहा भारत आज दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता और शुद्ध निर्यातक है।
स्मार्टफोन अब भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद (2.59 लाख करोड़ रु.) बन गया है, जो पेट्रोलियम और आभूषणों से भी आगे है। देश में 99.2% मोबाइल भारत में ही बन रहे हैं।
चिप निर्माण की दिशा में ‘सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम’ 2021 में शुरू हुआ, जिसके पहले चरण में 76,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया।
जुलाई 2026 में सरकार ने 1.27 लाख करोड़ रुपये के साथ ‘सेमीकॉन 2.0’ को मंजूरी दी। इसका असर जमीन पर दिख रहा है।
6 राज्यों में 1.64 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाली 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें से तीन संयंत्रों में उत्पादन शुरू हो चुका है।
चिप बनाने के साथ-साथ भारत चिप डिजाइन करने वाले इंजीनियरों की नई पीढ़ी तैयार कर रहा है:
85,000 कुशल सेमीकंडक्टर इंजीनियर तैयार करने का लक्ष्य।
‘चिप्स टू स्टार्टअप’ (C2S) के तहत 320 संस्थानों के 68,000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षण।
‘ChipIN Centre’ के जरिए 500 से अधिक संस्थानों के 1 लाख इंजीनियर आधुनिक चिप डिजाइन टूल्स का निःशुल्क उपयोग कर रहे हैं।
भारत हाल ही में अमेरिका के नेतृत्व वाले ‘Pax Silica’ गठबंधन में शामिल हुआ है। इसका उद्देश्य वैश्विक सिलिकॉन और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को सुरक्षित करना है।
और यह सुनिश्चित करना है कि चिप और तकनीक का नियंत्रण लोकतांत्रिक देशों के पास रहे, न कि कुछ चुनिंदा कंपनियों या देशों के एकाधिकार में।
यशोभूमि में तीन दिनों तक चलने वाले इस महाआयोजन में 600 से ज्यादा प्रदर्शक, 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां और 15,000 वर्ग मीटर में फैले 12 राज्यों व 6 देशों के पवेलियन भारत के ‘चिप इकोसिस्टम’ की झलक पेश करेंगे।
SEMICON India 2026 भारत की इस महत्वाकांक्षा का प्रतीक है कि वह अब चिप उपभोक्ता नहीं, बल्कि चिप निर्माता के रूप में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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