एआई-सक्षम साइबर अपराधों से निपटने के लिए सरकार ने 'प्रतिबिंब' मॉड्यूल, टोल-फ्री हेल्पलाइन 1930 और विशेष 'साइबर कमांडो' जैसी कई अत्याधुनिक पहल शुरू की हैं।
एआई-सक्षम साइबर अपराधों पर केंद्र का कड़ा प्रहार: 11 हजार करोड़ बचाए, ‘प्रतिबिंब’ ऐप से 29 हजार से ज्यादा गिरफ्तार”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट
देश में तेजी से बढ़ते एआई-सक्षम (AI-Enabled) साइबर अपराधों और डिजिटल धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने कई हाई-टेक और महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में गृह राज्य मंत्री श्री बंडी संजय कुमार ने देश की डिजिटल सुरक्षा और साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए सरकार की व्यापक रणनीति की जानकारी दी।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि यद्यपि ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ राज्य के विषय हैं, लेकिन केंद्र सरकार नीतिगत मार्गदर्शन, उन्नत तकनीक और वित्तीय सहायता के जरिए राज्यों की प्रवर्तन क्षमताओं (Enforcement Capabilities) को लगातार मजबूत कर रही है।
सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम इस प्रकार हैं:
वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई ‘नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली’ (CFCFRMS) और टोल-फ्री हेल्पलाइन 1930 बेहद कारगर साबित हो रही है।
30 जून 2026 तक, 32.80 लाख से अधिक शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगों के हाथों में जाने से 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बचाई गई है।
इसके अतिरिक्त, बैंकों के सहयोग से बनाए गए ‘संदिग्ध रजिस्टर’ (Suspect Registry) के जरिए 30.48 लाख संदिग्धों और 32 लाख से अधिक म्यूल खातों की जानकारी साझा कर 25,698 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन को ब्लॉक किया गया है।
जामताड़ा और मेवात जैसे साइबर अपराध के हॉटस्पॉट से निपटने के लिए 7 संयुक्त साइबर समन्वय दल (JCCT) गठित किए गए हैं।
वहीं, अपराधियों की लाइव लोकेशन को मैप पर ट्रैक करने वाले ‘प्रतिबिंब’ (Pratibimb) मॉड्यूल की मदद से देश भर में अब तक 29,837 से अधिक साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना (Critical Info Infrastructure) को सुरक्षित रखने के लिए देश में 281 ‘साइबर कमांडो’ का एक विशेष और समर्पित कार्यबल तैयार किया गया है।
इसके अलावा, पुलिस और न्यायिक अधिकारियों को साइबर मामलों में प्रशिक्षित करने के लिए ‘साइट्रेन’ (CyTrain) पोर्टल चलाया जा रहा है, जिससे अब तक 1.63 लाख से अधिक अधिकारी जुड़ चुके हैं।
साइबर मल्टी एजेंसी सेंटर: 22 जनवरी 2025 को स्थापित यह केंद्र साइबर जासूसी और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाली गतिविधियों से निपटता है।
एआई-संचालित सिस्टम: दुर्भावनापूर्ण डोमेन और फिशिंग गतिविधियों का पता लगाने के लिए CERT-In अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग कर रहा है।
इसके साथ ही, ‘साइबर स्वच्छता केंद्र’ के जरिए लोगों के डिवाइस को सुरक्षित रखने में मदद की जा रही है।
साइबर सुरक्षा के प्रति आम जनता को जागरूक करने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर अभियान छेड़ा हुआ है।
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