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फर्जी ई-चालान साइबर ठगी: सरकार ने बचाए ₹11,158 करोड़

फर्जी ई-चालान से बैंक खाते खाली कर रहे साइबर ठग, सरकार ने 11,158 करोड़ रुपये बचाए: राज्यसभा में दी गई जानकारी”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

देशभर में साइबर धोखाधड़ी के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। आजकल साइबर ठग ‘फर्जी ई-चालान’ (Fake E-Challan) के नाम पर मोबाइल पर लिंक भेजकर आम जनता के बैंक खाते खाली कर रहे हैं।

इस गंभीर मुद्दे पर गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री बंडी संजय कुमार ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि सरकार इन साइबर अपराधों से निपटने के लिए कई कड़े कदम उठा रही है।

11 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम बचाई गई

मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) विशेष रूप से फर्जी ई-चालान का अलग से डेटा नहीं रखता है।

हालांकि, वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के तहत वर्ष 2021 में ‘नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली’ (CFCFRMS) शुरू की गई थी।

इस प्रणाली ने शानदार काम करते हुए 30 जून 2026 तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की है और 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को ठगों के हाथों में जाने से बचाया है।

‘सहयोग’ पोर्टल से 2.77 लाख अवैध साइट्स और ऐप्स ब्लॉक

साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने वाले प्लेटफॉर्म्स पर लगाम लगाने के लिए ‘सहयोग’ (Sahyog) पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है।

इसके जरिए अब तक 2,77,053 से अधिक अवैध और धोखाधड़ी वाले ऐप्स, वेबसाइटों, ई-मेल खातों और यूआरएल (URLs) को ब्लॉक किया जा चुका है।

पुलिस और न्यायिक अधिकारियों को ‘साइट्रेन’ (CyTrain) से ट्रेनिंग

चूंकि ‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ राज्य का विषय हैं, इसलिए केंद्र सरकार राज्यों की क्षमता बढ़ाने में मदद कर रही है।

‘साइट्रेन’ पोर्टल के माध्यम से 30 जून 2026 तक 1,63,344 से अधिक पुलिस और न्यायिक अधिकारियों ने पंजीकरण कराया है और उन्हें साइबर अपराध की जांच की ट्रेनिंग दी गई है।

साइबर कमांडो और डिजिटल जांच सहायता केंद्र

  • साइबर कमांडो: महत्वपूर्ण सूचना ढांचे को सुरक्षित रखने के लिए 10 सितंबर 2024 को ‘साइबर कमांडो’ कार्यक्रम शुरू किया गया था। अब तक 281 साइबर कमांडो अपना विशेष प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं।

  • डिजिटल जांच सहायता केंद्र: राज्य पुलिस को साइबर फोरेंसिक में मदद करने के लिए नई दिल्ली और असम (अगस्त 2025 में स्थापित) में अत्याधुनिक राष्ट्रीय डिजिटल जांच सहायता केंद्र बनाए गए हैं। दिल्ली के केंद्र ने अब तक 14,064 से अधिक मामलों में जांच एजेंसियों की मदद की है।

पीड़ितों को जल्द वापस मिलेगा पैसा

शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए सरकार ने एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की है। इसके तहत अप्रैल 2026 से ‘मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल’ और ‘शिकायत निवारण मॉड्यूल’ काम करने लगे हैं,

जिससे ठगी का शिकार हुए लोगों का पैसा बैंक खातों से फ्रीज़ कर उन्हें जल्द वापस लौटाने की प्रक्रिया आसान हो गई है।

Santosh SETH

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