उच्च शिक्षा का वैश्वीकरण: भारत में विदेशी कैंपस, विदेशों में IITs की धूम
उच्च शिक्षा का तेजी से हो रहा वैश्वीकरण: भारत में खुल रहे विदेशी कैंपस, IITs और IIM ने भी विदेशों में जमाई धाक”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारत का उच्च शिक्षा क्षेत्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत तेजी से वैश्विक रूप ले रहा है। एक तरफ जहां दुनिया के प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालय (FHEIs) भारत में अपने कैंपस खोल रहे हैं,
वहीं भारत के प्रमुख संस्थान जैसे IITs और IIMs भी विदेशों में अपना परचम लहरा रहे हैं। सरकार द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, शिक्षा की गुणवत्ता और वैश्विक रैंकिंग में भी भारत ने शानदार छलांग लगाई है।
भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों (FHEIs) की दस्तक
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के प्रयासों से भारत में अंतरराष्ट्रीय शिक्षा सुलभ हो रही है। UGC ने अब तक ऑस्ट्रेलिया, इटली, यूके और अमेरिका के 16 विदेशी उच्च शिक्षा संस्थानों को आशय पत्र (LOI) जारी किए हैं:
- कर्नाटक: 6 संस्थानों को LOI
- महाराष्ट्र: 6 संस्थानों को LOI (इनमें से यॉर्क विश्वविद्यालय, ब्रिस्टल विश्वविद्यालय, एबरडीन विश्वविद्यालय और इलिनोइस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी को मुंबई में कैंपस खोलने की मंजूरी मिल चुकी है)
- दिल्ली एनसीआर: 3 संस्थानों को LOI
- तमिलनाडु: 1 संस्थान को LOI
विशेष उपलब्धि: साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय ने गुरुग्राम में और न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय ने बेंगलुरु में अपने परिसर स्थापित भी कर लिए हैं।
विदेशों में भारतीय संस्थानों का विस्तार
भारत के प्रीमियर संस्थान भी अब केवल देश तक सीमित नहीं हैं। वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए इन्होंने कई देशों में कैंपस स्थापित किए हैं:
- IIT मद्रास (ज़ांज़ीबार, 2023): यहां 35 छात्रों ने डेटा साइंस, AI और ओशन स्ट्रक्चर्स में एम.टेक पूरा किया है, जबकि 100 से अधिक छात्र बीएस (BS) कार्यक्रमों में पढ़ रहे हैं।
- IIT दिल्ली (अबू धाबी, 2024): नौ पाठ्यक्रमों के साथ शुरू हुए इस परिसर में शैक्षणिक वर्ष 2025-26 तक 171 छात्र नामांकित हो चुके हैं।
- IIM अहमदाबाद (दुबई, 2025): इस परिसर ने सितंबर 2025 में 35 छात्रों के साथ एक वर्षीय फुल-टाइम एमबीए और सामान्य प्रबंधन कार्यक्रम की शुरुआत की है।
शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले भारतीय छात्र
आव्रजन ब्यूरो (BOI) के आंकड़ों के अनुसार, उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले छात्रों का रुझान लगातार बना हुआ है। हालांकि, पिछले एक-दो वर्षों में इसमें थोड़ी गिरावट भी दर्ज की गई है:
| वर्ष | विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या |
| 2021 | 4,45,580 |
| 2022 | 7,52,100 |
| 2023 | 8,94,758 |
| 2024 | 7,60,060 |
| 2025 | 6,19,264 |
वैश्विक रैंकिंग और शिक्षा की गुणवत्ता में उछाल
सरकार के सुधारों का असर अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में साफ दिख रहा है:
- QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग (2027): भारत के अब तक के सर्वाधिक 52 संस्थान इसमें शामिल हैं। (2015 में यह संख्या मात्र 11 थी)।
- ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (2025): भारत अब दुनिया में 38वें स्थान पर पहुंच गया है।
- स्टडी इन इंडिया (2018): विदेशी छात्रों को भारत में आकर्षित करने के लिए सिंगल-विंडो पोर्टल कारगर साबित हो रहा है।
- इसके अलावा UGC ने UTSAH पोर्टल, मालवीय मिशन (MMTTP) और प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस जैसी अहम योजनाएं लागू की हैं।
महाराष्ट्र में उच्च शिक्षा का ढांचा और PM-USHA योजना
देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र में महाराष्ट्र एक प्रमुख राज्य है। पूरे देश में 1,289 विश्वविद्यालय और 48,246 कॉलेज हैं, जिनमें से अकेले महाराष्ट्र में 87 विश्वविद्यालय और 5,380 कॉलेज हैं।
राज्य में लगभग 46.53 लाख छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जो इसे देश के शीर्ष सात राज्यों में शामिल करता है।
- डिजिटल एकीकरण: राज्य की शिक्षा व्यवस्था को APAAR, ABC, SWAYAM, समर्थ और पीएम विद्यालक्ष्मी जैसी पहलों से मजबूत किया जा रहा है।
- PM-USHA के तहत फंड: शिक्षा से वंचित क्षेत्रों के लिए शुरू किए गए ‘प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान’ (PM-USHA) के तहत महाराष्ट्र में कुल 144 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
- इसके लिए 1,431.31 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें केंद्र का हिस्सा 863.37 करोड़ रुपये है।











