Minister of State for Tribal Affairs Durgadas Uikey addressing Rajya Sabha on ST scholarship pending dues.

ST छात्रों की छात्रवृत्ति के बकाए पर सरकार ने दी अहम जानकारी

ST छात्रों की छात्रवृत्ति पर सरकार का बड़ा बयान: जानें किन कारणों से अटका है करोड़ों का बकाया?

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के बीच उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही विभिन्न छात्रवृत्ति (Scholarship) योजनाओं और उनके बकाया भुगतान को लेकर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है।

5 अगस्त 2026 को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके ने बताया कि मंत्रालय मुख्य रूप से चार बड़ी छात्रवृत्ति योजनाओं का संचालन कर रहा है।

उन्होंने सदन को उन कारणों की भी विस्तृत जानकारी दी, जिनकी वजह से कुछ छात्रों और शिक्षण संस्थानों का करोड़ों रुपये का भुगतान लंबित है।

ST छात्रों के लिए चल रही हैं ये 4 प्रमुख योजनाएं:

  1. मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति (Post Matric Scholarship): यह राज्य सरकारों के माध्यम से लागू की जाती है। केंद्र अपना हिस्सा राज्यों को देता है और राज्य सीधे DBT के जरिए छात्रों को पैसे भेजते हैं। इस योजना के तहत कॉलेजों का बकाया केंद्र के पास दर्ज नहीं होता।

  2. उच्च शिक्षा हेतु राष्ट्रीय छात्रवृत्ति (शीर्ष श्रेणी): यह 265 टॉप-क्लास संस्थानों में पढ़ने वाले उन ST छात्रों के लिए है, जिनकी पारिवारिक आय 6 लाख से कम है।

  3. राष्ट्रीय अध्येतावृत्ति (NFST): मास्टर डिग्री के बाद M.Phil/Ph.D के लिए हर साल 750 फेलोशिप दी जाती है। इस योजना के तहत कोई भी दावा लंबित नहीं है।

  4. राष्ट्रीय समुद्रपारीय छात्रवृत्ति (NOS): विदेश में पढ़ाई के लिए यह योजना विदेश मंत्रालय के सहयोग से चलाई जा रही है, इसमें भी किसी भी छात्र या संस्थान का कोई बकाया नहीं है।

टॉप-क्लास छात्रवृत्ति योजना में क्यों अटका है पैसा?

राज्यमंत्री ने बताया कि ‘शीर्ष श्रेणी’ छात्रवृत्ति में छात्रों को स्टाइपेंड, लैपटॉप भत्ता आदि (घटक-I) और संस्थानों को ट्यूशन फीस (घटक-II) दी जाती है। पिछले कुछ वर्षों का बकाया निम्नलिखित कारणों से अटका हुआ है:

  • छात्रों का बकाया: शैक्षणिक वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच कुछ दर्जन छात्रों का भुगतान अटका है, जिसका मुख्य कारण लाभार्थियों द्वारा ‘आधार सीडिंग’ (Aadhaar Seeding) और बैंक खाता लिंक न होना है।

  • संस्थानों का करोड़ों का बकाया: वर्ष 2021-22 और 2022-23 का पूरा भुगतान कर दिया गया है। हालांकि, वर्ष 2023-24 के लिए 5 संस्थानों (लगभग 16.85 लाख रुपये) और वर्ष 2024-25 के लिए 144 संस्थानों (लगभग 20.22 करोड़ रुपये) का ट्यूशन फीस बकाया है।

पीएफएमएस (PFMS) नियमों का पालन न करना है मुख्य वजह

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इन संस्थानों का करोड़ों रुपये का भुगतान इसलिए रोका गया है क्योंकि इन्होंने निर्धारित PFMS (सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली) और EAT अनुपालन पूरे नहीं किए हैं। इसमें बिना खर्च हुए शेष (Unspent Balance) को अपडेट न करना भी शामिल है।

शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए ‘रेड-फ्लैग’ और ‘सैनिटी-चेक’ की प्रक्रिया पूरी कर अंतिम मेरिट सूची जारी कर दी गई है और भुगतान प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मंत्रालय बकाया जारी करने के लिए संस्थानों के साथ लगातार संपर्क में है।