JAUNPUR

जौनपुर : शाहगंज की ऐतिहासिक रत्ना शुगर मिल कुर्क, लगा सरकार का बोर्ड

जौनपुर में ED का बड़ा एक्शन: पूर्वांचल की ऐतिहासिक ‘रत्ना शुगर मिल’ कुर्क, संपत्ति पर लगा भारत सरकार का बोर्ड “

जौनपुर/शाहगंज : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के शाहगंज में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्वांचल की औद्योगिक विरासत रही ऐतिहासिक ‘रत्ना शुगर मिल’ (Ratna Sugar Mill) को कुर्क कर लिया है।

ईडी ने मिल परिसर को पूरी तरह से अपने कब्जे में लेते हुए वहां संपत्ति जब्ती का आधिकारिक बोर्ड लगा दिया है।

यह सख्त कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत 31 मार्च को जारी आदेश के अनुपालन में की गई है।

मिल परिसर अब ‘भारत सरकार’ की संपत्ति, खरीद-फरोख्त पर रोक

ईडी द्वारा मिल के गेट पर लगाए गए आधिकारिक बोर्ड पर स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि यह पूरी संपत्ति अब ‘भारत सरकार’ (Government of India) के स्वामित्व में है।

इस बेशकीमती परिसर में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण, खरीद-फरोख्त या नामांतरण पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

बोर्ड पर यह सख्त चेतावनी भी दी गई है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

भगोड़े पूर्व बसपा MLC हाजी इकबाल पर कसा शिकंजा

सूत्रों के मुताबिक, यह बेशकीमती जमीन सहारनपुर के कारोबारी और पूर्व बसपा एमएलसी (MLC) हाजी मोहम्मद इकबाल के नियंत्रण में थी।

अदालत द्वारा संबंधित व्यक्ति को ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ (Fugitive Economic Offender) घोषित किए जाने के बाद ईडी ने शिकंजा कसते हुए यह बड़ी जब्ती की है।

कौड़ियों के भाव बिकी थी पूर्वांचल की ‘लाइफलाइन’

रत्ना शुगर मिल का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। वर्ष 1933 में स्थापित यह मिल कभी पूरे पूर्वांचल की लाइफलाइन मानी जाती थी।

जौनपुर, आजमगढ़, सुल्तानपुर और अंबेडकरनगर के हजारों किसान अपना गन्ना यहीं लाते थे। लेकिन 1986 में घाटे के कारण यह बंद हो गई।

1989 में सरकार ने इसे दोबारा चलाया, लेकिन स्थिति नहीं सुधरी और अंततः 2009 में इसे निजी हाथों में सौंप दिया गया।

तत्कालीन मजदूर नेता और वर्तमान में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रभानंद यादव का आरोप है कि तत्कालीन बसपा सरकार ने इसे स्क्रैप (कबाड़) के भाव में बेच दिया था, जबकि उस समय इसका सर्किल रेट ही 50 करोड़ रुपये था।

बताया जाता है कि शराब कारोबारी पोंटी चड्ढा ने इस मिल को खरीदा था और बाद में इसे पूर्व बसपा एमएलसी हाजी मोहम्मद इकबाल को बेच दिया था।

Santosh SETH

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