Mansukh Mandaviya SAI Gandhinagar

गांधीनगर : डॉ. मनसुख मांडविया ने किया 5 वर्ल्ड-क्लास सेंटर्स का शुभारंभ

गांधीनगर में भारत के नए खेल युग की शुरुआत : खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने किया वर्ल्ड-क्लास सुविधाओं का उद्घाटन, पैरा-एथलीटों पर विशेष फोकस “

गांधीनगर/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारत को ‘वैश्विक खेल महाशक्ति’ बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय युवा कार्य एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने रविवार (24 मई) को भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (NCOE), गांधीनगर में कई नई और अत्याधुनिक एकीकृत खेल अवसंरचना सुविधाओं का उद्घाटन किया।

इन विश्वस्तरीय सुविधाओं का निर्माण भारत के उच्च-प्रदर्शन खेल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और भविष्य के चैंपियनों को तैयार करने के लिए किया गया है।

इन 5 वर्ल्ड-क्लास सुविधाओं का हुआ उद्घाटन

खेल मंत्री ने साई (SAI) केंद्र में खिलाड़ियों की तैयारी को नई ऊंचाई देने के लिए निम्नलिखित सुविधाओं का लोकार्पण किया:

  1. पैरा एथलीट हॉस्टल: विशेष रूप से पैरा-खिलाड़ियों की सुगमता और गरिमा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया।

  2. केंद्रीकृत भोजन कक्ष (Centralized Dining Hall): खिलाड़ियों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को वैज्ञानिक तरीके से पूरा करने के लिए।

  3. स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग हॉल: खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता (Performance), सहनशक्ति बढ़ाने और चोटों से बचाव के लिए आधुनिक मशीनों से लैस।

  4. बहुउद्देशीय प्रशिक्षण हॉल: यह हॉल मुख्य रूप से कबड्डी प्रशिक्षण, मैच सिमुलेशन और खेल-रणनीति के लिए उपयोग किया जाएगा।

  5. मेडिटेशन पार्क (ध्यान केंद्र): मानसिक कल्याण, एकाग्रता और रिकवरी (Recovery) को मजबूत करने के लिए।

‘पीएम मोदी हैं पैरा खिलाड़ियों के सच्चे मित्र’

खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का खेल पारिस्थितिकी तंत्र (Sports Ecosystem) तेजी से बदल रहा है।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी हमारे पैरा खिलाड़ियों के सच्चे ‘परम मित्र’ हैं। उनके नेतृत्व में देश भर में न केवल खेल अवसंरचना का विस्तार हुआ है, बल्कि प्रत्येक पैरा खिलाड़ी के लिए गरिमा, सम्मान और समान अवसर भी सुनिश्चित किए गए हैं।”

पदकों की झड़ी कोई ‘आकस्मिक उपलब्धि’ नहीं

भारत के वैश्विक उत्थान का जिक्र करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि भारत ने एशियाई पैरा खेलों में 111 पदक और पेरिस पैरालंपिक 2024 में रिकॉर्ड 29 पदक हासिल किए हैं।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि हाल के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में हमारा यह रिकॉर्ड प्रदर्शन कोई आकस्मिक उपलब्धि (Fluke) नहीं है; बल्कि यह खिलाड़ियों में निरंतर निवेश, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और आधुनिक अवसंरचना का ही सुखद परिणाम है।

पैरा-स्पोर्ट्स का सबसे बड़ा हब बन रहा गांधीनगर

मंत्रालय द्वारा गांधीनगर के SAI NCOE को ‘पैरा स्पोर्ट्स का नोडल केंद्र’ घोषित किया गया है। वर्तमान में यह केंद्र छह प्रमुख पैरा-खेलों में विश्वस्तरीय सहयोग प्रदान कर रहा है, जिनमें शामिल हैं:

  • पैरा एथलेटिक्स, पैरा बैडमिंटन, पैरा टेबल टेनिस, पैरा पावरलिफ्टिंग, पैरा तैराकी और पैरा फेंसिंग।

  • इसके अलावा इन सुविधाओं का उपयोग हैंडबॉल, कबड्डी और खो-खो के प्रशिक्षण के लिए भी किया जा रहा है।

इस मौके पर डॉ. मांडविया ने कबड्डी, वॉलीबॉल और बास्केटबॉल के राष्ट्रीय कैंप में हिस्सा ले रहे खिलाड़ियों से बात की और उनका हौसला बढ़ाया।

उन्होंने कहा कि हॉस्टल और डाइनिंग हॉल जैसी सुविधाएं सिर्फ भवन नहीं हैं, बल्कि ये “भारत के भावी चैंपियनों में बड़ा निवेश हैं।”

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