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पूर्व नेपाली पीएम केपी शर्मा ओली गिरफ्तार: जेन-जी प्रदर्शन हिंसा मामला

” नेपाल में सियासी भूचाल: पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली गिरफ्तार, जेन-जी प्रदर्शनों की हिंसा मामले में बड़ा एक्शन “

नई दिल्ली/काठमांडू : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

नेपाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पिछले साल हुए हिंसक ‘जेन-जी’ (Gen-Z) विरोध प्रदर्शनों में उनकी कथित भूमिका को लेकर गिरफ्तार कर लिया गया है।

यह अहम कार्रवाई ऐसे वक्त में हुई है जब देश के नए प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने हाल ही में सत्ता की कमान संभाली है।

सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद हुई इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी ने नेपाल के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

काठमांडू वैली पुलिस के मुताबिक, केपी शर्मा ओली के साथ-साथ उनके कार्यकाल में गृहमंत्री रहे रमेश लेखक को भी सुबह हिरासत में ले लिया गया है।

दोनों नेताओं के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी राजनीतिक द्वेष का हिस्सा नहीं है, बल्कि पूरी तरह से कानून सम्मत है।

दूसरी ओर, पूर्व पीएम ओली ने इसे ‘राजनीतिक बदले की भावना’ करार देते हुए कानूनी लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है।

जेन-जी प्रदर्शन और उच्च स्तरीय जांच रिपोर्ट

पिछले साल सितंबर में नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं ने बड़े पैमाने पर ‘जेन-जी विरोध प्रदर्शन’ किए थे।

ये शांतिपूर्ण प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गए थे, जिसमें महज दो दिनों के भीतर 70 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। इस भीषण हिंसा के बाद ओली सरकार कटघरे में आ गई थी और अंततः सरकार गिर गई।

हाल ही में गठित एक उच्च स्तरीय जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि उस समय के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों ने हालात संभालने में घोर लापरवाही बरती थी।

आयोग ने ओली और रमेश लेखक समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई (अधिकतम 10 साल तक की सजा) की सिफारिश की थी।

नई सरकार का सख्त रुख

इस मामले पर नेपाल के नए गृहमंत्री सुदन गुरूंग ने सख्त लहजे में कहा कि “वादा तो वादा होता है और कानून से ऊपर कोई नहीं है।”

उन्होंने इस कार्रवाई को न्याय की दिशा में पहला कदम बताया। जांच आयोग की रिपोर्ट में नेपाल पुलिस के तत्कालीन महानिरीक्षक चंद्र कुबेर खापुंग का भी नाम है, जिससे संकेत मिलते हैं कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

यह पूरा घटनाक्रम अब नेपाल की न्याय व्यवस्था और नई सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है।

Santosh SETH

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