जौनपुर: पशुओं के लिए FMD टीकाकरण अभियान 22 जुलाई से शुरू
जौनपुर: पशुओं को FMD से बचाने के लिए 22 जुलाई से चलेगा महा-टीकाकरण अभियान, 5.70 लाख डोज तैयार”
जौनपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : वरुण यादव की रिपोर्ट
जनपद में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने और गोवंश व महिषवंश को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए पशुपालन विभाग ने कमर कस ली है।
जौनपुर में खुरपका-मुँहपका रोग (एफएमडी – FMD) से बचाव के लिए आगामी 22 जुलाई 2026 से 08 सितम्बर 2026 तक 45 दिवसीय विशेष टीकाकरण अभियान (आठवां चरण) चलाया जाएगा।
मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डा० संजय कुमार ने जनपद के सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे इस अभियान का हिस्सा बनें और अपने पशुओं का टीकाकरण अवश्य कराएं, ताकि पशु स्वस्थ रहें और दुग्ध उत्पादन प्रभावित न हो।
क्या है खुरपका-मुँहपका (FMD) रोग और इसके लक्षण?
मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डा० संजय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि एफएमडी (FMD) एक अत्यधिक संक्रामक और विषाणु जनित (Viral) रोग है।
यह बीमारी बीमार पशुओं से स्वस्थ पशुओं में बहुत तेजी से फैलती है, जिससे विशेष रूप से गाय और भैंस (गोवंश एवं महिषवंश) सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
बीमारी के प्रमुख लक्षण:
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पशुओं को तेज बुखार आना।
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चारा-पानी छोड़ देना और सुस्त हो जाना।
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दूध उत्पादन अचानक बंद हो जाना या भारी कमी आना।
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पशु के मुँह और खुर (पैरों) में छाले पड़ जाना।
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दर्द के कारण पशुओं का लंगड़ाकर चलना।
डा० संजय कुमार ने स्पष्ट किया कि इस खतरनाक संक्रामक रोग के प्रसार को रोकने के लिए टीकाकरण ही एकमात्र प्रभावी उपाय है।
टीकाकरण अभियान की पूरी तैयारी और आंकड़े
जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग ने इस 45 दिवसीय अभियान को सफल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की हैं।
एफएमडी वैक्सीन को सुरक्षित रखने के लिए प्रत्येक पशुचिकित्सालय पर ‘कोल्ड चेन’ की मुकम्मल व्यवस्था की गई है।
अभियान से जुड़े प्रमुख आंकड़े एक नजर में:
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टीकाकरण की अवधि: 22 जुलाई से 08 सितम्बर 2026
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प्राप्त वैक्सीन की मात्रा: 5,70,550 डोज
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जनपद में कुल पशु: 6,32,664 (गोवंश – 2,95,060 और महिषवंश – 3,37,604)
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कुल पशुपालक (लगभग): 2,00,000
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कुल ग्राम पंचायतें: 1,740
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टीकाकरण के लिए गठित टीमें: 43
इस अभियान के लिए जनपद के 21 विकास खण्डों और 36 पशुचिकित्सालयों के अंतर्गत टीमों का गठन किया गया है।
इन टीमों में उप मुख्य पशुचिकित्साधिकारी, पशुचिकित्साधिकारी, पशुधन प्रसार अधिकारी, पैरावेट और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को शामिल किया गया है, जो गांव-गांव जाकर पशुओं का टीकाकरण करेंगे।











