Strait of Hormuz

भारतीय जहाजों पर फायरिंग: ईरान ने कहा- ‘संबंध 5000 साल पुराने’

होर्मुज विवाद: 2 भारतीय जहाजों पर फायरिंग के बाद भारत सख्त, ईरानी राजदूत को किया तलब; ईरान ने दी सफाई

नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य में दो भारतीय तेल टैंकरों पर ईरान की नौसेना द्वारा की गई फायरिंग की घटना के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।

भारत सरकार ने इस गंभीर घटना पर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए ईरानी राजदूत को तलब कर अपना विरोध दर्ज कराया है।

वहीं, ईरान की ओर से दोनों देशों के 5,000 साल पुराने ऐतिहासिक संबंधों का हवाला देकर मामले को जल्द और शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की उम्मीद जताई गई है।

भारत का कड़ा रुख: ईरानी राजदूत को किया तलब

शनिवार को इराक से तेल लेकर आ रहे दो भारतीय व्यापारिक जहाजों— ‘जग अर्नव’ (Jag Arnav) और ‘सनमार हेराल्ड’ (Sanmar Herald)— पर ईरानी नौसेना द्वारा की गई गोलीबारी को भारत ने गंभीरता से लिया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने तत्काल प्रभाव से नई दिल्ली में ईरानी राजदूत डॉ. मोहम्मद फथली को तलब किया और अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

विदेश सचिव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत अपने व्यापारिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।

उन्होंने ईरान से आग्रह किया कि वह इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से भारतीय जहाजों की सुरक्षित और सामान्य आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए तुरंत आवश्यक कदम उठाए।

ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि की प्रतिक्रिया

इस पूरे घटनाक्रम पर भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि, डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही की भी प्रतिक्रिया सामने आई है।

डॉ. इलाही ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस विशिष्ट घटना के संबंध में फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।

हालांकि, उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों की गहराई पर जोर देते हुए कहा कि ईरान और भारत के संबंध 5,000 साल पुराने हैं और बेहद मजबूत हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान हमेशा से शांति का पक्षधर रहा है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस कूटनीतिक मामले को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।

ऐतिहासिक संबंधों का हवाला और आश्वासन

विदेश मंत्रालय में तलब किए जाने के बाद ईरानी राजदूत डॉ. मोहम्मद फथली ने भी भारत और ईरान के बीच गहरे सांस्कृतिक, सभ्यतागत और शैक्षिक संबंधों को दोहराया।

उन्होंने कहा कि दिल्ली और तेहरान के बीच आपसी बातचीत हमेशा से सफल और दोनों देशों के लिए लाभकारी रही है।

इसके साथ ही राजदूत ने भारत सरकार को आश्वस्त किया कि वे व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर भारत की चिंताओं को अपनी सरकार (तेहरान) तक पहुंचाएंगे, ताकि भविष्य में इस जलमार्ग पर समुद्री आवाजाही पूरी तरह से सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनी रहे।

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