External Affairs Minister S Jaishankar making a strong statement about European weapons used against India

यूरोपीय हथियार भारत के खिलाफ हुए इस्तेमाल: एस जयशंकर

🇮🇳 ‘यूरोप के हथियार भारत के खिलाफ हुए इस्तेमाल’: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिमी देशों को दिखाया आईना”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर पश्चिमी देशों के दोहरे मापदंडों की पोल खोल दी है।

रूस से कच्चा तेल खरीदने पर भारत की आलोचना करने वाले यूरोपीय देशों को करारा जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया है कि भारत के खिलाफ लड़े गए युद्धों में हमेशा ‘यूरोपीय देशों में बने हथियारों’ का ही इस्तेमाल होता रहा है।

उन्होंने नई दिल्ली के रणनीतिक और ऊर्जा फैसलों का पुरजोर बचाव करते हुए पश्चिम की कूटनीतिक आलोचनाओं को सिरे से खारिज कर दिया।

‘The Politics Again’ की इस रिपोर्ट में आइए विस्तार से समझते हैं विदेश मंत्री का यह तीखा बयान और उन यूरोपीय हथियारों का इतिहास जो भारत के खिलाफ इस्तेमाल हुए:

🎤 पत्रकार के सवाल का बेबाक और तीखा जवाब

यह वाकया फिनलैंड में आयोजित एक बातचीत के दौरान का है। एक पत्रकार ने रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत के रुख पर सवाल उठाया और आरोप लगाया कि भारत रूस के प्रति बहुत अधिक सहानुभूति रखता है और उससे लगातार तेल खरीद रहा है।

इस आलोचना का मजबूती से जवाब देते हुए जयशंकर ने अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए भारत के व्यावहारिक नजरिये को सामने रखा और यूरोप की हिप्पोक्रेसी (पाखंड) को उजागर किया।

“यूरोपीय देश कई सालों से ऐसे हथियार बेचते हैं, जिनका इस्तेमाल भारत पर हमला करने के लिए किया जाता है। हम भारतीयों ने कभी भी यूरोप को खतरे में डालने के लिए कुछ नहीं किया।”

— एस. जयशंकर, विदेश मंत्री, भारत सरकार

⚔️ फ्रांस, ब्रिटेन और स्वीडन के हथियारों का भारत के खिलाफ इस्तेमाल

इतिहास गवाह है कि जब भी भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष हुआ है, पाकिस्तान ने मुख्य रूप से यूरोपीय देशों में बने हथियारों के दम पर ही भारत से लड़ाई लड़ी है।

  • लंबा सिलसिला: 1965 और 1971 के युद्धों से लेकर करगिल संघर्ष तक, ब्रिटेन, स्वीडन और फ्रांस के हथियार पाकिस्तानी सेना द्वारा भारतीय जवानों के खिलाफ इस्तेमाल किए गए हैं।

  • आतंकियों तक पहुंचे हथियार: लंबे समय से ब्रिटेन, जर्मनी और बेल्जियम जैसे देशों की विभिन्न यूरोपीय रक्षा कंपनियों द्वारा बनाए गए मोर्टार सिस्टम, गोला-बारूद और राइफलें सीमाओं पर एक्टिव आतंकी गुटों के हाथों तक पहुंचती रही हैं।

🛩️ फ्रांसीसी हथियार: मिराज फाइटर जेट्स और अगोस्टा पनडुब्बियां

भारत के खिलाफ यूरोपीय हथियारों के इस्तेमाल के कई बड़े उदाहरण मौजूद हैं:

  • डसॉल्ट मिराज III और मिराज V: भारत के राफेल जैसे फ्रांसीसी विमानों का ऑपरेटर बनने से बहुत पहले, पाकिस्तान ने फ्रांस में बने मिराज फाइटर जेट्स का एक बड़ा बेड़ा तैयार कर लिया था।

  • 1971 की लड़ाई और सीमा पर तनाव के दौरान पाकिस्तानी वायुसेना ने भारतीय हवाई सुरक्षा का मुकाबला करने के लिए इन फ्रांसीसी विमानों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया।

  • अगोस्टा-क्लास पनडुब्बियां: पाकिस्तान ने फ्रांस से अगोस्टा-70 और अगोस्टा-90B पनडुब्बियां खरीदीं।

  • 1971 के युद्ध में फ्रांस निर्मित डैफने-क्लास की पनडुब्बी (PNS हंगोर) ने ही भारतीय नौसेना के फ्रिगेट INS खुकरी को डुबो दिया था।

🚀 अमेरिकी और चीनी हथियारों का भी हुआ इस्तेमाल

केवल यूरोप ही नहीं, बल्कि अमेरिका और चीन के हथियारों ने भी भारतीय सुरक्षा को चुनौती दी है:

  • F-104 स्टारफाइटर: अमेरिका में डिजाइन किया गया और यूरोप में लाइसेंस के तहत बनाया गया F-104 स्टारफाइटर विमान भी भारत के खिलाफ इस्तेमाल हो चुका है।

  • ऑपरेशन सिंदूर में चीनी हथियार: हालिया तनावों और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ चीन में बने Q-9 एयर डिफेंस सिस्टम, PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइल और J-10 फाइटर एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया।

विदेश मंत्री का यह बयान इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रक्षात्मक मुद्रा के बजाय आक्रामक और तार्किक रूप से अपना पक्ष रखता है और राष्ट्रीय हितों (National Interest) से कोई समझौता नहीं करेगा।

नोट: देशभर की राजनीति, कूटनीति और रक्षा जगत की बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।

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