‘बाबरी’ के नाम पर चुनावी बिसात : ममता के मुस्लिम वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी

“मुर्शिदाबाद के बेलडांगा से आ रही यह रिपोर्ट पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़े ध्रुवीकरण और सत्ता समीकरणों के बदलने का संकेत दे रही है। हुमायूं कबीर द्वारा ‘बाबरी’ के नाम पर शुरू किया गया यह अभियान अब एक सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन का रूप ले चुका है”

बेलडांगा (मुर्शिदाबाद) | 20 दिसंबर 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले का बेलडांगा इलाका इस समय राज्य की सियासत का सबसे गर्म केंद्र बन गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित नेता हुमायूं कबीर ने यहाँ ‘बाबरी मस्जिद’ के निर्माण का जो ऐलान किया था, उसने अब एक बड़े राजनीतिक तूफान का रूप ले लिया है। शुक्रवार को जुमे की नमाज के मौके पर बेलडांगा में उमड़ा जनसैलाब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।

मस्जिद नहीं, जज्बात की लड़ाई: 1992 के ‘जख्म’ पर राजनीति

बेलडांगा में जुमे की नमाज पढ़ने आए लोगों का कहना है कि 1992 में बाबरी विध्वंस ने जो घाव दिए थे, हुमायूं कबीर उसे भरने की कोशिश कर रहे हैं। नमाजियों ने खुलेआम कहा, “ममता बनर्जी बंगाल में राम मंदिर बनवा रही हैं, लेकिन हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद बनाने की हिम्मत दिखाई है।” प्रस्तावित मस्जिद की खासियतें:

  • डिजाइन: हूबहू अयोध्या की पुरानी बाबरी मस्जिद जैसा मॉडल।

  • भव्यता: अयोध्या का ढांचा 65 फुट ऊंचा था, जबकि बेलडांगा की मस्जिद इससे कहीं अधिक ऊंची होगी।

  • क्षमता: एक विशाल परिसर जहाँ 25,000 लोग एक साथ नमाज पढ़ सकेंगे।

चंदे का अनोखा ‘क्राउडफंडिंग’ मॉडल: ईंट से लेकर मुर्गे-बत्तख तक

मस्जिद के निर्माण के लिए 300 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए चंदा जुटाने के जो तरीके अपनाए जा रहे हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं:

  1. ईंट का दान: हर नमाजी से अपने साथ कम से कम एक ईंट लाने की अपील की गई है। शुक्रवार को हजारों लोग हाथों में ईंटें लेकर पहुंचे।

  2. पशुओं की नीलामी: जो लोग नकद राशि नहीं दे सकते, वे दान में मुर्गे और बत्तख ला रहे हैं। इन पक्षियों की मौके पर ही नीलामी की जा रही है और उससे मिलने वाला पैसा मस्जिद फंड में जमा किया जा रहा है।

  3. संग्रह: अब तक 5 करोड़ रुपये कैश और लगभग 2 करोड़ रुपये का निर्माण मैटेरियल (सीमेंट, सरिया) जमा हो चुका है।

22 दिसंबर: नई पार्टी का उदय और TMC को चुनौती

हुमायूं कबीर ने ऐलान किया है कि वह 22 दिसंबर को अपनी नई राजनीतिक पार्टी का गठन करेंगे। उनका सीधा हमला ममता बनर्जी पर है। कबीर ने कहा, “मुसलमान अब ममता के बहकावे में नहीं आएंगे। टीएमसी केवल मुसलमानों का वोट लेती है, लेकिन उनके जज्बातों के लिए कुछ नहीं करती।”

यह कदम ममता बनर्जी के लिए बड़ी मुश्किल पैदा कर सकता है, क्योंकि मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में हुमायूं कबीर की पकड़ मजबूत होती दिख रही है।

बाबरी इकोनॉमी: मस्जिद के नाम पर चमका व्यापार

हैरानी की बात यह है कि मस्जिद बनने से पहले ही वहाँ एक छोटा बाजार विकसित हो गया है।

  • मर्चेंडाइज: बाबरी मस्जिद की तस्वीर और हुमायूं कबीर के नाम वाली टी-शर्ट्स 150 रुपये में धड़ल्ले से बिक रही हैं।

  • रोजगार: स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि इस भीड़ की वजह से उनके पास काम और पैसे की कोई कमी नहीं है।

2026 की राह होगी मुश्किल

TMC ने शुरुआती दौर में हुमायूं कबीर को ‘बीजेपी की बी-टीम’ बताकर खारिज करने की कोशिश की थी, लेकिन जमीन पर उमड़ रही भीड़ और करोड़ों का चंदा कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले ‘बाबरी’ का यह कार्ड बंगाल की राजनीति को पूरी तरह से बदल सकता है।

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