नीट विवाद और छात्र आंदोलन से उत्साहित विपक्ष अब आगामी विधानसभा चुनावों, विशेषकर उत्तर प्रदेश में 'Gen-Z' वोटर्स को साधने के लिए विशेष रणनीति पर काम कर रहा है।
NEET बवाल का ‘पॉलिटिकल इम्पैक्ट’: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से गदगद विपक्ष, क्या यूपी चुनाव में ‘Gen-Z’ के सहारे खेला करेंगे राहुल और अखिलेश?
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
नीट (NEET) पेपर लीक विवाद और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक पहुंचे युवाओं के इस आंदोलन ने विपक्ष को एक बड़ी राजनीतिक संजीवनी दे दी है।
सड़क से लेकर संसद तक एकजुटता दिखाकर विपक्ष ने एक बड़ी मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस छात्र आंदोलन का असली असर अगले साल की पहली छमाही में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में देखने को मिलेगा।
इन सबमें सबसे ज्यादा नजरें उत्तर प्रदेश (UP) पर टिकी हैं, जहां कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (SP) गठबंधन मिलकर सत्ताधारी भाजपा को सीधी टक्कर देने की तैयारी में हैं।
छात्र शक्ति ने सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया है, लेकिन राहुल गांधी और अखिलेश यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे संसद और सड़क पर दिखे इस ऊर्जा और उत्साह को चुनाव तक कैसे बनाए रखें।
उत्तर प्रदेश की राजनीति हमेशा से जाति और धर्म के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे माहौल में ‘Gen-Z’ (नई युवा पीढ़ी) को जाति-धर्म से ऊपर उठकर रोजगार और शिक्षा के मुद्दे पर अपने साथ जोड़े रखना विपक्ष के लिए आसान नहीं होगा।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने भी विपक्ष की इस रणनीति की काट तैयार कर ली है।
कांग्रेस और सपा पहले भी युवाओं के मुद्दे उठाती रही हैं, लेकिन अब आगामी चुनावों में ‘युवा और रोजगार’ उनके प्रचार अभियान का मुख्य हथियार बनने जा रहे हैं:
कांग्रेस का ‘छात्रों की गूंज’ अभियान: राहुल गांधी युवाओं से सीधे जुड़ने के लिए ‘छात्रों की गूंज’ अभियान चला रहे हैं।
इसी रणनीति के तहत हाल ही में देहरादून में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित कर युवाओं की नब्ज टटोलने की कोशिश की गई है।
सपा का ‘विजन इंडिया’ और नया ‘PDA’: अखिलेश यादव पिछले एक साल से ‘विजन इंडिया’ (Vision India) अभियान के जरिए देश के बड़े शहरों में युवाओं से शिक्षा और रोजगार पर सीधा संवाद कर रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि अखिलेश अपने ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को अब युवाओं के सामने एक नए और आधुनिक अंदाज में पेश कर रहे हैं।
नीट विवाद पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और छात्रों के आंदोलन को मिले भारी जनसमर्थन से विपक्ष को यह समझ आ गया है कि जन-मुद्दों पर सरकार को किस तरह घेरा जा सकता है।
इससे पहले, परिसीमन विधेयक को लेकर आ रही चर्चाओं के कारण ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठने लगे थे और विपक्ष दबाव में था।
लेकिन इस आंदोलन ने उन्हें फिर से फ्रंटफुट पर ला दिया है। हालांकि, संसद में एनडीए (NDA) की ताकत को देखते हुए केंद्र के राजनीतिक समीकरणों में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद अभी कम है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कांग्रेस का मनोबल सातवें आसमान पर है। इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ होने वाले आगामी सीट बंटवारे (Seat Sharing) पर पड़ना तय माना जा रहा है।
कांग्रेस का रुख: बढ़े हुए आत्मविश्वास के साथ कांग्रेस अब सपा से 100 से ज्यादा सीटों की मजबूती से मांग कर सकती है।
समाजवादी पार्टी का रुख: सपा फिलहाल कांग्रेस को उतनी ही सीटें देने के पक्ष में है, जितनी उसने 2022 के विधानसभा चुनाव में अपने अन्य सहयोगी दलों को दी थीं।
चुनावों की सुगबुगाहट के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि युवाओं का यह गुस्सा वोट में तब्दील होता है या भाजपा अपनी रणनीति से एक बार फिर बाजी पलट देती है।
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