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यूपी, पंजाब समेत 5 राज्यों में फरवरी-मार्च 2027 में हो सकते हैं चुनाव !

चुनावी रणभेरी: यूपी, पंजाब और उत्तराखंड समेत 5 राज्यों में फरवरी-मार्च 2027 में हो सकते हैं विधानसभा चुनाव, जनगणना प्रक्रिया ने दिए संकेत”

नई दिल्ली : संतोष सेठ की रिपोर्ट : THE POLITICS AGAIN

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर के आगामी विधानसभा चुनावों का राजनीतिक खाका अब साफ होता दिख रहा है।

केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में जनगणना प्रक्रिया की तारीखों में किए गए बदलाव ने इस बात के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि इन पांचों राज्यों में विधानसभा चुनाव फरवरी से मार्च 2027 के बीच एक साथ कराए जा सकते हैं।

मणिपुर की समय-सीमा से तय होगा शेड्यूल

2022 की तरह ही 2027 में भी चुनाव आयोग के सामने इन पांच राज्यों के चुनाव एक साथ कराने की चुनौती होगी।

  • कार्यकाल समाप्ति: मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल सबसे पहले 13 मार्च 2027 को समाप्त होगा। इसके बाद गोवा (14 मार्च), पंजाब (16 मार्च), उत्तराखंड (28 मार्च) और यूपी (22 मई 2027) का नंबर है।

  • यूपी पर असर: परंपरा के अनुसार, आयोग सबसे पहले खत्म होने वाले कार्यकाल (मणिपुर) के हिसाब से शेड्यूल बनाता है।

  • ऐसे में यूपी के चुनाव कार्यकाल खत्म होने से लगभग दो महीने पहले ही (फरवरी-मार्च में) कराए जा सकते हैं। चुनाव आयोग जनवरी 2027 में चुनाव कार्यक्रम का ऐलान कर सकता है।

जनगणना की तारीखों में बदलाव का बड़ा कारण

जनगणना 2027 की प्रक्रिया इस चुनावी समीकरण में एक अहम कारक बन गई है:

  • केंद्र ने यूपी, पंजाब, उत्तराखंड के गैर-बर्फीले इलाकों और गोवा में जनसंख्या गणना का चरण 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 के बीच कराने की अधिसूचना जारी की है।

  • सामान्य परिस्थितियों में यह प्रक्रिया फरवरी में होती है, लेकिन चुनाव और जनगणना (दोनों में सरकारी कर्मचारियों की जरूरत) के बीच टकराव टालने के लिए इसे पहले कराया जा रहा है।

  • वहीं, मणिपुर में जनगणना के ‘हाउसलिस्टिंग’ चरण को फिलहाल टाल दिया गया है।

मतदाता सूचियों का अंतिम रूप

मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) भी चुनावी बिगुल बजने का संकेत दे रहा है।

  • यूपी: मतदाता संख्या 13.4 करोड़ दर्ज की गई (13.2% की कमी)।

  • गोवा: 10.6 लाख मतदाता (10.2% कमी)।

  • मणिपुर: 19.3 लाख मतदाता (7.6% कमी)।

  • पंजाब और उत्तराखंड में अंतिम मतदाता सूची कुछ महीनों में जारी होगी।

इन प्रशासनिक और चुनावी तैयारियों ने साफ कर दिया है कि 2027 का पहला और सबसे बड़ा चुनावी महासंग्राम अब ज्यादा दूर नहीं है। राजनीतिक दलों के लिए चुनावी घड़ियां टिक-टिक करने लगी हैं।

Santosh SETH

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