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Economic Superpower: भारत ने रचा इतिहास! 1 साल में 5 बड़े ‘ट्रेड डील’, दुनिया की 50% GDP वाले देशों से जुड़ा हिंदुस्तान

“भारत के आर्थिक इतिहास में यह स्वर्णिम अध्याय लिखा जा रहा है। मंदी की आहटों के बीच जब दुनिया के बड़े-बड़े देश संघर्ष कर रहे हैं, भारत ने कुछ ही दिनों के भीतर दो बड़े व्यापारिक समझौते (Trade Deals) करके सबको चौंका दिया है”

नई दिल्ली ‘The Politics Again’ संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पिछले एक साल में भारत ने कुल 5 प्रमुख ट्रेड डील साइन की हैं। इन समझौतों का दायरा इतना विशाल है कि जिन देशों के साथ हाथ मिलाया गया है, उनकी मिली-जुली जीडीपी दुनिया की कुल जीडीपी का 50% से भी ज्यादा है।

अमेरिका: सबसे बड़ा पार्टनर, सबसे नई डील

ताजा और सबसे महत्वपूर्ण समझौता अमेरिका के साथ हुआ है। पिछले कुछ महीनों से टैरिफ और तनाव की खबरों के बीच यह डील भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत है।

  • आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2025 में भारत का 20% निर्यात अकेले अमेरिका को गया।

  • अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है।

  • वर्ष 2014 से अब तक भारत 37 विकसित देशों के साथ 8 मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) को अंतिम रूप दे चुका है।

दुनिया भारत के साथ बिज़नेस क्यों करना चाहती है?

7% की रफ्तार और 140 करोड़ का भरोसा

जहां चीन और यूरोप जैसी अर्थव्यवस्थाएं सुस्त पड़ रही हैं, वहीं भारत 7% की विकास दर से दौड़ रहा है। दुनिया के लिए भारत आकर्षण का केंद्र क्यों है, इसके 3 बड़े कारण हैं:

  1. विशाल बाजार: 140 करोड़ की आबादी और तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग (Middle Class), जो खर्च करने की क्षमता रखता है।

  2. China Plus One: कंपनियां चीन का विकल्प खोज रही हैं और भारत की PLI स्कीम (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) उन्हें लुभा रही है।

  3. युवा शक्ति और टेक्नोलॉजी: दुनिया की सबसे ज्यादा युवा आबादी और डिजिटल पेमेंट में भारत की बादशाहत।

अगला नंबर इनका: चिली, पेरू और GCC

अच्छी खबरें अभी रुकी नहीं हैं। भारत अब चिली (महत्वपूर्ण खनिजों के लिए), पेरू और कनाडा के साथ बातचीत के अंतिम चरण में है।

साथ ही, पश्चिम एशिया के 6 शक्तिशाली देशों के समूह GCC (खाड़ी सहयोग परिषद) ने भी भारत के साथ FTA के लिए हाथ बढ़ाया है।

इसका सीधा मतलब है—आने वाले दिनों में भारतीय सामानों के लिए दुनिया के दरवाजे पूरी तरह खुलने वाले हैं।

“आने वाला वर्ष भारत को एक ‘इंटरनेशनल प्लेयर’ के रूप में स्थापित करेगा। इन समझौतों से न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि देश में विदेशी निवेश (FDI) की बाढ़ आने की भी संभावना है”

Santosh SETH

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