लद्दाख में 'श्वेत क्रांति': अमित शाह ने करगिल में रखी 25 करोड़ के सोलर डेयरी प्लांट की आधारशिला
लद्दाख में ‘श्वेत क्रांति’ का नया अध्याय: अमित शाह ने करगिल में रखी 10,000 लीटर क्षमता वाले आधुनिक डेयरी प्लांट की आधारशिला
करगिल/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के दुर्गम इलाकों में ‘श्वेत क्रांति’ (White Revolution) को नई गति देने और स्थानीय पशुपालकों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया गया है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को करगिल में 10,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले एक अत्याधुनिक डेयरी प्रसंस्करण संयंत्र (Dairy Processing Plant) की आधारशिला रखी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन के तहत शुरू की गई यह परियोजना लद्दाख की क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और दुग्ध उत्पादकों को सीधा लाभ पहुंचाने में एक मील का पत्थर साबित होगी।
परियोजना की लागत और मुख्य विशेषताएं
इस प्लांट की स्थापना राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी ‘इंडियन डेयरी मशीनरी कंपनी’ द्वारा की जा रही है।
कुल लागत: इस आधुनिक डेयरी प्लांट के निर्माण में लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
फंडिंग: इसे मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) के तहत लागू किया जा रहा है।
इसमें 12.74 करोड़ रुपये का अनुदान, 10 करोड़ रुपये की सहायता राष्ट्रीय डेयरी विकास फाउंडेशन (NDDF) से और शेष राशि LUTDCF फंड के माध्यम से दी जा रही है।
सौर ऊर्जा से संचालन: लद्दाख की ऊंचाई और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए यह संयंत्र पूरी तरह से 350 किलोवाट सौर ऊर्जा (Solar Power) प्रणाली पर चलेगा, जो इसे स्वच्छ और टिकाऊ बनाएगा।
तकनीक और आधुनिकीकरण पर जोर
लद्दाख के डेयरी क्षेत्र को पूरी तरह से आधुनिक बनाने के लिए कई नई तकनीकी पहल की गई हैं:
मोबाइल परीक्षण और शीतलन: दूध संग्रह के लिए आधुनिक मोबाइल ‘मिल्क कलेक्शन’ और ‘कूलिंग सिस्टम’ स्थापित किए जाएंगे।
AI और डिजिटल पेमेंट: गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ‘एआई (AI) आधारित निगरानी प्रणाली’ और ‘डिजिटल ऑटोमेटेड मिल्क कलेक्शन सिस्टम’ (AMCS) लागू किया गया है। किसानों को उनके दूध का सीधा और समय पर डिजिटल भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है।
भारतीय सेना बनी बड़ा बाजार; 1700 किसानों को सीधा लाभ
इस पहल का सकारात्मक असर लद्दाख में जमीनी स्तर पर दिखने लगा है:
किसानों का बढ़ता नेटवर्क: यह पहल एक गांव के मात्र 74 किसानों से शुरू हुई थी, और आज इस नेटवर्क से करीब 1,700 किसान जुड़ चुके हैं।
दैनिक संग्रह और भुगतान: वर्तमान में दैनिक दूध संग्रह लगभग 7,000 लीटर तक पहुंच गया है और किसानों को अब तक कुल 15 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है।
सेना को आपूर्ति: भारतीय सेना के साथ नियमित दूध आपूर्ति व्यवस्था से स्थानीय पशुपालकों को एक बड़ा और स्थिर बाजार मिला है।
भविष्य की योजनाएं: पनीर, दही और मदर डेयरी से साझेदारी
अधिकारियों ने बताया कि केवल कच्चा दूध ही नहीं, बल्कि मूल्य संवर्धन (Value Addition) के तहत पनीर और दही जैसे उत्पादों के निर्माण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
इसके लिए ‘मदर डेयरी’, ‘सफल’ और ‘धारा’ जैसे राष्ट्रीय ब्रांडों के साथ साझेदारी कर उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाले दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराने की योजना है।
यह पूरा मॉडल ‘आत्मनिर्भर लद्दाख’ की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
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