अमेरिका ने 75 देशों का वीजा क्यों रोका?

ईरान में ‘MIGA’ की गूँज: ट्रंप ने दी सैन्य हस्तक्षेप और 25% वैश्विक टैरिफ की चेतावनी

“ईरान में आर्थिक बदहाली से शुरू हुआ विद्रोह अब एक व्यापक जन-क्रांति का रूप ले चुका है। जनवरी 2026 के इन 14 दिनों में हिंसा ने जो रौद्र रूप दिखाया है, उसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है”

तेहरान/वाशिंगटन, संतोष सेठ की रिपोर्ट 

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘Make Iran Great Again’ (MIGA) का नारा बुलंद करते हुए न केवल प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है, बल्कि ईरान के व्यापारिक साझेदारों पर भारी प्रतिबंधों का भी ऐलान कर दिया है।

‘MIGA’: ट्रंप का नया राजनीतिक हथियार

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर सीधे ईरानी जनता को संबोधित किया। उन्होंने लिखा, “ईरानी देशभक्तों, विरोध जारी रखें! अपने संस्थानों पर कब्जा करें।”

ट्रंप ने इस आंदोलन को ‘MIGA’ (Make Iran Great Again) का नाम दिया है, जिसे विशेषज्ञ ईरान में सत्ता परिवर्तन (Regime Change) के स्पष्ट संकेत के रूप में देख रहे हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि मदद “रास्ते में है,” जिसका अर्थ सैन्य हस्तक्षेप से निकाला जा रहा है।

2000 से अधिक मौतें: लहूलुहान हुई तेहरान की सड़कें

ईरान से आ रही खबरें विचलित करने वाली हैं। आधिकारिक सूत्रों और मानवाधिकार संगठनों (HRANA) के अनुसार:

  • मौतों का आंकड़ा: पिछले दो हफ्तों में 2,000 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बल दोनों शामिल हैं।

  • हिंसा का कारण: मुद्रा (रियाल) के मूल्य में ऐतिहासिक गिरावट और आसमान छूती महंगाई ने आम जनता को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया।

  • संस्थानों पर हमला: प्रदर्शनकारियों ने कई सरकारी इमारतों और संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रहार: 25% ‘ईरान टैरिफ’

ट्रंप ने ईरान को अलग-थलग करने के लिए एक अभूतपूर्व आर्थिक हथियार का इस्तेमाल किया है। उन्होंने घोषणा की है कि:

“जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा, उसके अमेरिका को होने वाले निर्यात पर 25% का अतिरिक्त आयात शुल्क (Tariff) लगाया जाएगा।”

इस फैसले का सबसे बड़ा असर चीन, भारत, तुर्की और यूएई जैसे देशों पर पड़ेगा। भारत के लिए यह दोहरा झटका हो सकता है, क्योंकि भारत पहले से ही अन्य व्यापारिक मुद्दों पर अमेरिकी टैरिफ का सामना कर रहा है।

निर्वासित युवराज की अपील

ईरान के निर्वासित युवराज रजा पहलवी ने भी इस आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने ट्रंप से अपील की है कि वे ईरान के धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करें। पहलवी ने कहा कि ईरानी जनता अब इस ‘आतंकवादी शासन’ से मुक्ति चाहती है और ट्रंप उनके लिए आशा की किरण हैं।

कूटनीति पर ताला

ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक प्रदर्शनकारियों की “बेमतलब हत्या” बंद नहीं होती, तब तक ईरानी अधिकारियों के साथ कोई बातचीत नहीं होगी। उन्होंने पहले से प्रस्तावित सभी उच्च-स्तरीय बैठकें रद्द कर दी हैं।

दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने कहा है कि वे “युद्ध और बातचीत” दोनों के लिए तैयार हैं, लेकिन वे अमेरिकी धमकियों के आगे नहीं झुकेंगे।


विश्लेषण: आगे क्या?

ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट और संचार माध्यमों पर पाबंदी के बावजूद विद्रोह की आग ठंडी नहीं हो रही है। यदि ट्रंप वास्तव में सैन्य कार्रवाई का विकल्प चुनते हैं, तो मध्य पूर्व (Middle East) एक बड़े युद्ध की चपेट में आ सकता है। साथ ही, 25% टैरिफ की धमकी ने वैश्विक व्यापार में एक अनिश्चितता पैदा कर दी है।

The Politics Again डेस्क

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