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अमेरिका-ईरान सीजफायर से कच्चा तेल 20% टूटा, 91 डॉलर पर आया भाव

वैश्विक बाजार में भूचाल: अमेरिका-ईरान सीजफायर से क्रूड ऑयल ‘धड़ाम’, कीमतों में 20% की ऐतिहासिक गिरावट “

नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: द पॉलिटिक्स अगेन : श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट 

अमेरिका और ईरान के बीच अचानक हुए 2 हफ्ते के सीजफायर (युद्धविराम) के ऐलान ने वैश्विक तेल बाजार में भूचाल ला दिया है।

पिछले 40 दिनों से युद्ध की आशंकाओं के कारण जो ‘वॉर प्रीमियम’ (War Premium) कच्चे तेल की कीमतों में जुड़ा था, वह खबर आते ही अचानक खत्म हो गया।

इसके परिणामस्वरूप कुछ ही घंटों के भीतर क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) लगभग 20% टूटकर 117 डॉलर प्रति बैरल से औंधे मुंह गिरकर 91 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है।

‘The Politics Again’ के आर्थिक डेस्क के अनुसार, इसे कोविड-19 महामारी के बाद से तेल बाजार की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट माना जा रहा है।

संकट की जड़: ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का डर हुआ खत्म

इस पूरी जंग और तेल की कीमतों में उछाल के केंद्र में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) रहा है।

यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जहां से वैश्विक सप्लाई का करीब 20% कच्चा तेल गुजरता है।

पिछले 40 दिनों से ईरान द्वारा इस मार्ग को बंद करने की धमकियों ने ग्लोबल सप्लाई चेन पर बड़ा खतरा पैदा कर दिया था, जिससे कीमतें 117 डॉलर के पार पहुंच गई थीं।

सीजफायर के तहत होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रखने की सहमति बनते ही बाजार ने राहत की सांस ली और कीमतें धड़ाम हो गईं।

ट्रंप का ऐलान और 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में अहम बैठक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस युद्धविराम की घोषणा करते हुए दावा किया कि अमेरिका ने अपने सैन्य लक्ष्य हासिल कर लिए हैं।

ट्रंप ने बताया कि उन्हें ईरान की ओर से एक 10-सूत्रीय प्रस्ताव मिला है, जिस पर आगे की बातचीत होगी।

कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, 10 अप्रैल को इस गंभीर मुद्दे पर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच अहम बातचीत होने की संभावना है।

ईरान की कड़ी शर्तें: ‘यह जंग का अंत नहीं’

एक तरफ बाजार राहत महसूस कर रहा है, वहीं ईरान ने साफ कर दिया है कि यह सीजफायर जंग का पूर्ण अंत नहीं है।

ईरान का दावा है कि उसने अपने ज्यादातर सैन्य लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। आगे की शांति के लिए ईरान ने अमेरिका के सामने बेहद कड़ी शर्तें रखी हैं, जिनमें:

  • मिडिल-ईस्ट से अमेरिकी सेना की पूर्ण वापसी।

  • ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंधों को तत्काल खत्म करना।

  • युद्ध में हुए नुकसान के मुआवजे की मांग शामिल है।

निवेशकों और भारत जैसे देशों के लिए क्या हैं मायने?

तेल की कीमतों में आई इस 20% की भयंकर गिरावट का वैश्विक बाजारों पर मिला-जुला असर पड़ेगा।

  • राहत: भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह बहुत बड़ी खुशखबरी है। तेल सस्ता होने से महंगाई दर में कमी आएगी और सरकारी खजाने पर बोझ घटेगा।

  • झटका: दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियों और क्रूड ऑयल में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए यह गिरावट एक बड़े झटके की तरह आई है, जिससे उन्हें रातों-रात भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

Santosh SETH

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