गुजरात निकाय चुनाव: BJP ने तोड़े रिकॉर्ड, 700+ सीटों पर निर्विरोध जीत; कांग्रेस ने उम्मीदवारों को किया 'अंडरग्राउंड' | The Politics Again
गुजरात निकाय चुनाव में BJP का ऐतिहासिक प्रदर्शन: 700 से ज्यादा सीटों पर निर्विरोध जीत; कांग्रेस-AAP ने लगाया डराने-धमकाने का आरोप
गांधीनगर: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
गुजरात स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम करते हुए रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया है।
चुनाव से पहले ही भाजपा ने 700 से अधिक सीटों पर निर्विरोध जीत हासिल कर ली है। हालांकि, इस ऐतिहासिक जीत के बीच भारी राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है।
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) ने भाजपा और पुलिस प्रशासन पर उम्मीदवारों को डराने, धमकाने और जबरन नामांकन वापस कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
भाजपा की बड़ी छलांग: 2021 के मुकाबले कई गुना ज्यादा निर्विरोध सीटें उपमुख्यमंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, भाजपा ने 300 से अधिक नई सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज की है, जिसके बाद कुल निर्विरोध सीटों का आंकड़ा 700 के पार पहुंच गया है।
पिछला रिकॉर्ड: वर्ष 2021 के निकाय चुनावों में भाजपा को 220 सीटों पर निर्विरोध जीत मिली थी, जिसकी तुलना में इस बार का आंकड़ा बहुत अधिक है।
प्रमुख नगरपालिकाएं: कड़ी, ऊंझा और गनदेवी जैसी प्रमुख नगरपालिकाओं में भाजपा ने बिना चुनाव लड़े ही अपना परचम लहरा दिया है।
विपक्ष के गंभीर आरोप और ‘मिशन अननोन’ भाजपा की इस एकतरफा जीत पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
कांग्रेस और अन्य दलों का आरोप है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से ‘भाजपा के एजेंट’ के रूप में काम कर रहे हैं।
चुनाव आयोग से शिकायत: कांग्रेस नेता अमित चावडा ने राज्य चुनाव आयोग से शिकायत की है कि पुलिस कांग्रेस उम्मीदवारों के घरों पर जाकर उन्हें फॉर्म वापस लेने के लिए धमका रही है।
25 लाख रुपये का ऑफर: अहमदाबाद के रामोल वार्ड से उम्मीदवार बीनाबेन मोदी ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें अपना नामांकन वापस लेने के लिए 25 लाख रुपये का लालच दिया गया।
कांग्रेस का ‘मिशन अननोन’: खरीद-फरोख्त और दबाव से अपने उम्मीदवारों को बचाने के लिए कांग्रेस ने ‘मिशन अननोन’ शुरू किया है। इसके तहत पार्टी ने अपने 65 से अधिक उम्मीदवारों को गुप्त रिसॉर्ट्स और सुरक्षित स्थानों पर छिपा दिया है।
AAP और AIMIM की मुसीबतें बढ़ीं
आम आदमी पार्टी (AAP): कई शहरी निकायों में AAP को मजबूत उम्मीदवार तलाशने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा है। दबाव के डर से सूरत जैसे क्षेत्रों में AAP को भी अपने उम्मीदवारों को सुरक्षित ठिकानों पर भेजना पड़ा है।
AIMIM: असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण है। पार्टी को अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारने और उन्हें दबाव में फॉर्म वापस लेने से रोकने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
भाजपा का पलटवार: “विकास से प्रभावित होकर लिया नाम वापस” विपक्ष के इन सभी आरोपों को भाजपा ने सिरे से खारिज कर दिया है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा कि कई विपक्षी उम्मीदवारों ने भाजपा सरकार के विकास कार्यों से प्रभावित होकर स्वेच्छा से अपना नाम वापस लिया है।
भाजपा नेताओं ने इसे विपक्ष की कमजोरी और जनता के बीच उनके घटते जनाधार का परिणाम बताया है।
चुनावी गणित और सड़कों पर संग्राम प्रदेश के 393 स्थानीय निकायों में चुनाव हो रहे हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, नाम वापसी के आखिरी दिन तक कुल 1,572 उम्मीदवारों ने अपने फॉर्म वापस लिए हैं।
मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है, लेकिन जमीनी हालात भाजपा के पक्ष में भारी नजर आ रहे हैं।
नाम वापसी के आखिरी दिन वडोदरा, सूरत, मेहसाणा और बनासकांठा में भारी हंगामा देखने को मिला।
कई जगहों पर भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस और हिंसक झड़पें हुईं, जिसके बाद हालात को काबू में करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
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