लोकसभा में PM मोदी का विपक्ष पर प्रहार: "महिला आरक्षण का विरोध करने वाले चुनाव हारेंगे, क्रेडिट आप ले लें" | The Politics Again
लोकसभा में PM मोदी की हुंकार: “महिला आरक्षण का विरोध करने वाले चुनाव हारेंगे, विपक्ष चाहे तो मैं विज्ञापन में उनकी फोटो छपवा दूंगा”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर एक बेहद आक्रामक, भावुक और निर्णायक भाषण दिया।
सदन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने इस विधेयक को 2029 तक हर हाल में लागू करने की वकालत की और विपक्ष को कड़ी चेतावनी दी।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो लोग अपनी सीट खोने के डर से इस बिल का विरोध कर रहे हैं, उन्हें महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी और वे चुनाव हार जाएंगे।
सदन में सर्वसम्मति की अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने यहां तक कह दिया कि उन्हें इस बिल का कोई ‘क्रेडिट’ (श्रेय) नहीं चाहिए, विपक्ष चाहे तो वह अपनी फोटो के साथ विज्ञापन छपवा ले, जिसका खर्च भी सरकार उठाएगी।
भाषण की मुख्य और अहम बातें:
1. ‘विरोध करने वाले चुनाव हारेंगे, महिलाएं अब मुखर हैं’
प्रधानमंत्री ने विपक्ष को चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध करेंगे, उन्हें इसकी भारी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
उन्होंने कहा, “कुछ लोग अपनी सीट खोने की वजह से इस बिल का विरोध कर रहे हैं। जो आज इस बिल का विरोध करेगा, वह चुनाव हार जाएगा।”
पीएम ने याद दिलाया कि 25-30 साल पहले महिलाओं में इतनी राजनीतिक चेतना नहीं थी, लेकिन आज पंचायत चुनावों से जीत कर आई लाखों बहनें ‘वोकल’ (मुखर) हो गई हैं। अगर उनके हक का विरोध हुआ, तो वे माफ नहीं करेंगी।
2. क्रेडिट का ‘ब्लैंक चेक’: “विपक्ष अपनी फोटो छपवा ले”
प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण को राजनीतिक चश्मे से न देखने की अपील की।
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वे बिल रोकने के लिए तकनीकी बहाने बना रहे हैं।
पीएम ने कहा, “हमें महिला आरक्षण पर क्रेडिट नहीं चाहिए। मैं विपक्ष को क्रेडिट का ब्लैंक चेक दे रहा हूं। जैसे ही ये पारित हो जाए, मैं कल विज्ञापन देकर सबका धन्यवाद करने को तैयार हूं। क्रेडिट आप ले लो… आपको जिसकी फोटो छपवानी है, मैं सरकारी खर्चे से छपवाने को तैयार हूं।”
3. “25-30 साल पहले हो जाना चाहिए था, हम प्रायश्चित कर रहे हैं”
प्रधानमंत्री ने माना कि इस बिल को पास करने में देश ने पहले ही बहुत देरी कर दी है।
उन्होंने कहा कि अगर यह 25-30 साल पहले लागू हो जाता, तो आज व्यवस्थाएं काफी परिपक्व हो चुकी होतीं।
उन्होंने सदन से कहा कि यह अहंकार में न रहें कि हम नारी शक्ति को कुछ ‘दे रहे’ हैं, बल्कि दशकों से अटके इस बिल को पास कर हम अपने पुराने विलंब का ‘प्रायश्चित’ कर रहे हैं।
4. 2029 का लक्ष्य और ‘विकसित भारत’ की नई परिभाषा
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ सर्वसम्मति से पास हुआ था, लेकिन कम समय के कारण 2024 में इसे लागू करना संभव नहीं था।
उन्होंने कहा, “अब 2029 में हमारे पास समय है। अगर 2029 में भी नहीं करेंगे तो स्थिति क्या बनेगी? ज्यादा देर होगी तो महिलाओं का भरोसा डगमगाएगा।”
विकसित भारत का अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ उत्तम रेल या इंफ्रास्ट्रक्चर ही विकास नहीं है। देश की नीति निर्धारण में 50 प्रतिशत जनसंख्या (महिलाओं) की सीधी भागीदारी समय की सबसे बड़ी मांग है।
5. सपा से खास अपील और सर्वसम्मति पर जोर
खुद को अति पिछड़े समाज का बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनकी जिम्मेदारी सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की है।
उन्होंने विशेष रूप से समाजवादी पार्टी (SP) से महिला आरक्षण बिल पास कराने में सहयोग की अपील की।
उन्होंने अपने संबोधन का अंत इस इच्छा के साथ किया कि पुरानी मर्यादाओं से बाहर निकलकर यह बिल पूरी तरह सर्वसम्मति से पास होना चाहिए, क्योंकि देश का आधा जिम्मा उठाने वालों का संसद में आने का पूरा हक है।
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