UP Industries WFH Gas Crisis

यूपी: गैस संकट के कारण उद्योगों में 2 दिन WFH होगा लागू

यूपी में गहराया औद्योगिक संकट: गैस की किल्लत और बढ़ती लागत के बीच सरकार का बड़ा फैसला, उद्योगों में हफ्ते में 2 दिन लागू होगा ‘WFH’

लखनऊ: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास की रफ्तार के बीच एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश में उत्पादन लागत (Production Cost) में लगातार हो रही वृद्धि और गैस की भारी कमी के चलते कई छोटे-बड़े उद्योगों पर ताला लटकने का खतरा मंडराने लगा है।

इस गंभीर स्थिति से निपटने और उद्योगों को फौरी राहत देने के लिए श्रम विभाग की एक उच्च स्तरीय बैठक में कई अहम और बड़े फैसले लिए गए हैं।

ऊर्जा की खपत को कम करने के उद्देश्य से सरकार ने अब कार्यालयों और उद्योगों में सप्ताह में दो दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ (Work From Home – WFH) व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।

श्रम विभाग की बैठक के प्रमुख फैसले

गैस संकट और उद्योगों में छंटनी के खतरे को देखते हुए श्रम विभाग ने रणनीति में बड़े बदलाव किए हैं:

  • 2 दिन का WFH: ऊर्जा (बिजली और गैस) की खपत को नियंत्रित करने के लिए यह तय किया गया है कि औद्योगिक कार्यालयों और ऐसे संस्थानों में जहां संभव हो, सप्ताह में दो दिन कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम (WFH) दिया जाएगा।

  • शिफ्ट में होगा संचालन: ऊर्जा के एक साथ पड़ने वाले भारी दबाव को कम करने के लिए कार्यालयों और फैक्ट्रियों को अलग-अलग ‘शिफ्ट’ (Shifts) में संचालित करने का निर्णय लिया गया है। इससे उत्पादन भी सुचारू रहेगा और ऊर्जा की बचत भी होगी।

नौकरियों पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा

श्रम विभाग और औद्योगिक अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश में अचानक गैस की आपूर्ति (Gas Supply) बुरी तरह प्रभावित हुई है।

इसके कारण कारखानों को चलाने में भारी परेशानी आ रही है और उनकी उत्पादन लागत तेजी से बढ़ गई है।

लागत बढ़ने के कारण कई उद्योग छंटनी (Layoffs) करने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे प्रदेश में एक बड़े वर्ग की नौकरी पर सीधा खतरा मंडराने लगा है।

सरकार की कोशिश है कि ऊर्जा की खपत कम करके फैक्ट्रियों को बंद होने से बचाया जाए ताकि नौकरियां सुरक्षित रहें।

जल्द जारी होंगे विस्तृत दिशा-निर्देश

इस फैसले को जमीन पर उतारने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और श्रम विभाग जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश (SOP/Guidelines) जारी करने वाले हैं।

इसमें स्पष्ट किया जाएगा कि किन-किन औद्योगिक क्षेत्रों और दफ्तरों में WFH और शिफ्ट सिस्टम किस तरह से लागू किया जाएगा।