DRI Seizes E-Cigarettes 120 Crore

DRI का बड़ा एक्शन, 120 करोड़ की 3 लाख ई-सिगरेट जब्त

DRI का बड़ा एक्शन: चीन से ‘फर्नीचर’ बताकर हो रही थी 120 करोड़ के 3 लाख E-Cigarettes की तस्करी, भंडाफोड़”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने देश में प्रतिबंधित निकोटीन उत्पादों और ई-सिगरेट (Vape) की तस्करी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है।

डीआरआई ने पिछले कुछ दिनों में महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और पश्चिम बंगाल के कई प्रमुख बंदरगाहों, हवाई अड्डों और आईसीडी (इनलैंड कंटेनर डिपो) पर सघन अभियान चलाकर एक अंतरराष्ट्रीय ई-सिगरेट तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया है।

120 करोड़ रुपये की 3 लाख ई-सिगरेट (वेप्स) जब्त

विशिष्ट खुफिया इनपुट्स के आधार पर कार्रवाई करते हुए, डीआरआई की टीमों ने सीमा शुल्क (Customs) की जांच से बचने के लिए गलत तरीके से घोषित किए गए कई संदिग्ध आयात खेपों की पहचान की और उन्हें ट्रैक किया।

  • विस्तृत जांच और छापेमारी के दौरान विभिन्न ब्रांडों, स्वादों और विशिष्टताओं की लगभग 3,00,000 (3 लाख) इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट/वेप्स जब्त की गई हैं।

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब्त की गई इन ई-सिगरेटों की कुल कीमत 120 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।

चीन से ‘फर्नीचर’ के नाम पर हो रही थी तस्करी

तस्करों के काम करने का तरीका (Modus Operandi) बेहद चौंकाने वाला था। डीआरआई की जांच में खुलासा हुआ है कि ये सभी प्रतिबंधित ई-सिगरेट चीन (China) से आयात की जा रही थीं।

कस्टम अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए, आयात दस्तावेजों में इन्हें “फर्नीचर” और “धातु की कुर्सी के पुर्जे” (Metal Chair Parts) जैसी वस्तुओं के रूप में घोषित किया गया था और उन्हीं के बीच छिपाकर भारत लाया जा रहा था।

भारत में ई-सिगरेट पर है पूर्ण प्रतिबंध

गौरतलब है कि भारत सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में और विशेषकर युवाओं को निकोटीन के नुकसान से बचाने के लिए ई-सिगरेट पर पूरी तरह बैन लगा रखा है।

  • भारत में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट और सभी इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (ENDS) का उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन ‘इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019’ के तहत पूरी तरह से प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है।

डीआरआई की यह भारी जब्ती देश में प्रतिबंधित उत्पादों की तस्करी रोकने और युवाओं के स्वास्थ्य की रक्षा करने की दिशा में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

मामले में आगे की जांच जारी है और रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।