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कानूनी पचड़ों से न डरें: जानिये ‘राह-वीर’ योजना और ‘गोल्डन आवर’ का महत्व

“भारत में हर साल लाखों लोग सड़क दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। अक्सर लोग मदद के लिए इसलिए आगे नहीं आते क्योंकि उन्हें पुलिस की पूछताछ, अदालती चक्करों और अस्पताल के खर्चों का डर सताता है”

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट, 04 / 01 / 2026 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

लेकिन अब समय बदल चुका है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ‘गुड समैरिटन’ (नेक आदमी) नियमावली और ‘राह-वीर’ योजना ने मददगारों को एक अभेद्य सुरक्षा कवच और सम्मान प्रदान किया है।

क्या है ‘गोल्डन आवर’ और इसकी अहमियत?

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा (Golden Hour) सबसे महत्वपूर्ण होता है।

  • इस समय के भीतर यदि घायल को अस्पताल पहुँचा दिया जाए, तो मौत और स्थायी विकलांगता के खतरे को 80% तक कम किया जा सकता है।

  • केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं के कारण देश को अपनी जीडीपी का लगभग 3% नुकसान होता है। समय पर सहायता इस आर्थिक और मानवीय क्षति को रोक सकती है।

राह-वीर योजना: मदद करने पर ₹25,000 का पुरस्कार

सरकार ने मददगारों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘राह-वीर’ योजना शुरू की है:

  • वित्तीय पुरस्कार: गोल्डन आवर में घायल की जान बचाने में मदद करने वाले व्यक्ति को 25,000 रुपये और प्रशंसा पत्र दिया जाता है।

  • सम्मान: एक व्यक्ति साल में 5 बार तक यह पुरस्कार प्राप्त कर सकता है।

मददगारों के अधिकार: अब डरने की जरूरत नहीं

मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 134ए के तहत मददगारों को निम्नलिखित अधिकार प्राप्त हैं:

  • कानूनी सुरक्षा: नेक आदमी पर किसी भी तरह का सिविल या आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जा सकता।

  • गुमनामी का अधिकार: यदि आप नहीं चाहते, तो पुलिस या अस्पताल आपसे नाम, पता या फोन नंबर देने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।

  • अस्पताल की जिम्मेदारी: अस्पताल आपसे इलाज के लिए पैसे की मांग नहीं कर सकता और न ही आपको वहां रुकने के लिए मजबूर किया जा सकता है।

  • सिर्फ एक बार बयान: यदि आप गवाह बनना चाहते हैं, तो आपसे केवल एक बार आपकी सुविधानुसार जगह पर पूछताछ की जाएगी।

राह-वीर बनने के लिए क्या करें और क्या न करें?

क्या करें (Do’s) क्या न करें (Don’ts)
बिना डरे तुरंत घायल की सहायता करें। पुलिस या कानूनी उलझनों की चिंता न करें।
घायल को निकटतम अस्पताल पहुँचाएं। अस्पताल में रुकने या भुगतान करने का दबाव न लें।
अस्पताल से ‘एक्नॉलेजमेंट रसीद’ माँगें। गवाही देने के लिए खुद को बाध्य न समझें।
जरूरत पड़ने पर 112 या 108 नंबर पर कॉल करें। अधिकारियों द्वारा हिरासत में लिए जाने की अनुमति न दें।

इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म

राह-वीर बनने के लिए आपको डॉक्टर या किसी विशेष प्रशिक्षण की जरूरत नहीं है, बस आपके भीतर सहायता करने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए। याद रखें, सड़क पर तड़पते किसी व्यक्ति और उसकी मौत के बीच ‘आप’ ही एकमात्र उम्मीद हो सकते हैं।

विशेष संदेश: “किसी की जान बचाने के लिए डॉक्टर होना जरूरी नहीं, बस इंसान होना जरूरी है।”

Santosh SETH

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