“आज 20 अक्तूबर को पूरे देश में दिवाली मनाई जा रही है। यह कार्तिक माह की अमावस्या तिथि है। इस दिन घरों से लेकर मंदिरों में लक्ष्मी पूजन का भव्य आयोजन किया जाता है। इसके प्रभाव से जीवन में खुशियां, सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है”
नई दिल्ली 20 / 10 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट
दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है। लक्ष्मी पूजन के साथ-साथ इस दिन भगवान गणेश, माता सरस्वती और भगवान कुबेर की पूजा करने का विधान होता है। हर वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या तिथि के दिन प्रदोष काल में महालक्ष्मी पूजन का खास महत्व होता है।
प्रदोष काल वह समय होता है जब सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त। यह समय लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है। लक्ष्मी पूजन के लिए स्थिर लग्न भी बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। यानी प्रदोष काल और स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन करना शुभ लाभों में वृद्धि और सर्वोत्तम माना जाता है।
वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ लग्न स्थिर लग्न लग्न माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि दिवाली की रात को अमावस्या तिथि, प्रदोष काल और स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन करने पर माता लक्ष्मी घर में अंश रूप में वास करने लगती हैं।
लक्ष्मी पूजा के शुभ मुहर्त
दीपावली 2025- निशिता काल पूजा मुहूर्त
निशिता काल- रात्रि 11:41 से 12:31 तक
सिंह लग्न काल- सुबह 01:38 से 03:56 तक
दिवाली लक्ष्मी पूजन मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः
ॐ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा
ॐ श्री ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः
धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च। भगवान् त्वत्प्रसादेन धनधान्यादिसम्पदः
लक्ष्मी पूजा विधि
प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन का महत्व
प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व इसलिए माना गया है क्योंकि यह समय आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शक्तिशाली और शुभफलदायी होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, सूर्यास्त के बाद का लगभग दो घंटे का समय प्रदोष काल कहलाता है, जो दिन और रात के मिलन का संधिकाल होता है।
इस समय ब्रह्मांड में सात्विक और दिव्य ऊर्जा का प्रवाह अपने उच्चतम स्तर पर होता है, जिससे की गई पूजा अत्यधिक प्रभावशाली और फलदायी मानी जाती है। विशेष रूप से दीपावली के दिन यह काल और भी शुभ हो जाता है।
क्योंकि मान्यता है कि इसी समय मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक पर भ्रमण करती हैं और उन घरों में प्रवेश करती हैं जहाँ स्वच्छता, दीपों की रौशनी, भक्ति और श्रद्धा से युक्त वातावरण होता है।
जो व्यक्ति प्रदोष काल में विधिपूर्वक लक्ष्मी पूजन करता है, उसके घर में मां लक्ष्मी की कृपा से स्थायी रूप से धन, सुख और समृद्धि का वास होता है। अतः यह काल केवल पूजा का नहीं, बल्कि ईश्वर से जुड़ने और जीवन में सौभाग्य को आमंत्रित करने का सर्वोत्तम अवसर माना गया है।
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