न्याय विभाग द्वारा गोवा में आयोजित दिशा 2.0 क्षेत्रीय कार्यशाला; इसका उद्देश्य कानूनी जागरूकता, टेली-लॉ और प्रो बोनो सेवाओं के माध्यम से न्याय तक आम जन की पहुंच को सुलभ बनाना है।
दिशा 2.0: न्याय विभाग द्वारा आज गोवा में क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन, ‘न्याय प्रबोध’ अभियान रहेगा आकर्षण का केंद्र”
गोवा: संतोष सेठ की रिपोर्ट (THE POLITICS AGAIN)
न्याय तक आम नागरिकों की समग्र और सुलभ पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से न्याय विभाग (विधि और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार) ‘दिशा (DISHA) 2.0’ योजना के तहत आज (21 सितंबर 2026) गोवा में एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन कर रहा है।
यह कार्यक्रम सुबह 10:30 बजे से बार काउंसिल ऑफ इंडिया ट्रस्ट द्वारा संचालित इंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च (IIULER) के सभागार में शुरू होगा।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रौद्योगिकी-आधारित कानूनी सेवाओं, कानूनी जागरूकता और देश भर में ‘प्रो बोनो’ (Pro Bono) कानूनी सहायता को मजबूत करना है।
इस गरिमामयी कार्यक्रम में गोवा के राज्यपाल मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। उनके साथ भारत सरकार के विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और गोवा सरकार के लोक निर्माण, बंदरगाह व कानूनी मापन मंत्री भी उपस्थित रहेंगे।
आयोजन में केंद्र व राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ-साथ कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), ग्रामीण विकास मंत्रालय, विधि संस्थानों के प्रतिनिधि और न्याय से जुड़े कई हितधारक (Stakeholders) हिस्सा लेंगे।
इस कार्यशाला का एक प्रमुख आकर्षण “न्याय प्रबोध: न्याय की जागृति” अभियान रहेगा।
इसके तहत कानूनी जागरूकता बढ़ाने के लिए बनाई गई सर्वश्रेष्ठ रीलों (90 सेकंड में अपने अधिकार जानें) का प्रदर्शन किया जाएगा।
साथ ही एक विशेष नारा (Slogan) प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। इस पहल का सीधा उद्देश्य नागरिकों को उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के प्रति साक्षर बनाना और न्याय व्यवस्था में जनता की भागीदारी बढ़ाना है।
कार्यक्रम के दौरान गोवा में दिशा 2.0 की सफलताओं को दर्शाने वाली एक विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई जाएगी।
इसके बाद टेली-लॉ (Tele-Law) लाभार्थियों, पैनल वकीलों, ग्राम स्तरीय उद्यमियों (VLEs) और न्याय सहायकों के साथ सीधा संवाद होगा।
यह सत्र दर्शाएगा कि कैसे तकनीक दूरदराज के इलाकों में न्याय की पहुंच को आसान बना रही है।
इसके अलावा, गोवा के लॉ स्कूलों के छात्रों और संकाय सदस्यों (जो ‘न्याय बंधु’ प्रो बोनो कार्यक्रम से जुड़े हैं) के साथ भी चर्चा की जाएगी।
यह सत्र युवा कानूनी पेशेवरों के बीच मुफ्त कानूनी सहायता (Pro Bono) की संस्कृति को बढ़ावा देने पर केंद्रित होगा।
कार्यक्रम के अंत में गणमान्य व्यक्ति कानूनी सशक्तिकरण और न्याय की समान पहुंच के संवैधानिक दृष्टिकोण पर अपने विचार रखेंगे।
न्याय विभाग टेली-लॉ, न्याय बंधु, और विधि-संजीवनी जैसी पहलों के जरिए यह सुनिश्चित कर रहा है कि न्याय हर नागरिक के लिए सुलभ, किफायती और समझने योग्य हो।
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