साइबर ठगों पर ‘डिजिटल स्ट्राइक’: सरकार ने बचाए 8,189 करोड़ रुपये, 20 हजार से ज्यादा गिरफ्तारियां; संसद में गृह मंत्रालय का जवाब
“देश में बढ़ते साइबर अपराधों के खिलाफ केंद्र सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अब बड़े परिणाम दे रही है”
नई दिल्ली/आजमगढ़ “The Politics Again” संतोष सेठ की रिपोर्ट
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की मुस्तैदी के चलते 31 दिसंबर 2025 तक आम जनता के 8,189 करोड़ रुपये ठगों के हाथों में जाने से बचा लिए गए हैं।
हेल्पलाइन ‘1930’ बनी ढाल
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, ‘नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली’ (CFCFRMS) और हेल्पलाइन नंबर 1930 के जरिए 23.61 लाख से अधिक शिकायतों पर कार्रवाई की गई।
त्वरित रिपोर्टिंग के कारण जालसाज पैसे निकाल नहीं पाए और हजारों करोड़ रुपये बचा लिए गए।
‘सस्पेक्ट रजिस्ट्री’ का कमाल: ₹9000 करोड़ के ट्रांजेक्शन रुके
सितंबर 2024 में शुरू की गई ‘सस्पेक्ट रजिस्ट्री’ (Suspect Registry) गेम-चेंजर साबित हुई है।
-
म्यूल अकाउंट्स पर चोट: बैंकों के सहयोग से 26.48 लाख ‘म्यूल अकाउंट्स’ (धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते) की पहचान की गई।
-
परिणाम: इस रजिस्ट्री की मदद से 9,055.27 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन (Transactions) को होने से पहले ही रोक दिया गया।
‘प्रतिबिंब’ से 20,853 गिरफ्तारियां
सरकार ने साइबर अपराधियों की लोकेशन ट्रेस करने के लिए ‘प्रतिबिंब’ (Pratibimb) मॉड्यूल तैयार किया है। यह मॉड्यूल अपराधियों के ठिकानों को मानचित्र (Map) पर दिखाता है।
इसके जरिए राज्य पुलिस को सटीक जानकारी मिली, जिसके परिणामस्वरूप 20,853 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।
सिम कार्ड और IMEI ब्लॉक
अपराध की जड़ पर प्रहार करते हुए सरकार ने 31 दिसंबर 2025 तक 12.21 लाख फर्जी सिम कार्ड और 3.03 लाख मोबाइल हैंडसेट (IMEI) ब्लॉक किए हैं, ताकि इनका दोबारा इस्तेमाल न हो सके।
ई-एफआईआर की शुरुआत
पीड़ितों की सुविधा के लिए अब थाने के चक्कर काटने की जरूरत कम हो रही है। दिल्ली, राजस्थान, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश और गोवा में साइबर अपराधों के लिए ‘ई-एफआईआर’ (e-FIR) प्रणाली लागू कर दी गई है।
🛑 साइबर ठगी हो जाए तो क्या करें? (Golden Hour Guide)
(विशेषज्ञ सलाह: ओ.पी. जायसवाल, प्रभारी – साइबर क्राइम, आजमगढ़)
अक्सर लोग ठगी होने के बाद घबरा जाते हैं और कीमती समय बर्बाद कर देते हैं। आजमगढ़ साइबर क्राइम प्रभारी ओ.पी. जायसवाल के अनुसार, ठगी होने के बाद का पहला 1 घंटा (Golden Hour) सबसे महत्वपूर्ण होता है।
अगर इस दौरान सही कदम उठाया जाए, तो आपका पैसा वापस मिलने की संभावना 90% तक बढ़ जाती है।
श्री जायसवाल की 5 महत्वपूर्ण सलाह:
-
तुरंत 1930 डायल करें: जैसे ही आपको पता चले कि आपके साथ फ्रॉड हुआ है, बिना एक मिनट गंवाए 1930 (नेशनल साइबर हेल्पलाइन) पर कॉल करें। ओ.पी. जायसवाल बताते हैं कि “जितनी जल्दी आप सूचना देंगे, पुलिस और बैंक उतनी ही तेजी से पैसा फ्रीज (Hold) कर पाएंगे।”
-
मैसेज डिलीट न करें: फ्रॉड से जुड़े मैसेज, ट्रांजेक्शन आईडी और डेबिट का स्क्रीनशॉट लेकर रखें। यह जांच में सबसे बड़ा सबूत होता है।
-
वेबसाइट पर शिकायत: हेल्पलाइन पर कॉल करने के साथ-साथ www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
-
नजदीकी साइबर सेल जाएं: ओ.पी. जायसवाल सलाह देते हैं कि ऑनलाइन शिकायत के बाद अपने जिले के साइबर क्राइम थाने या नजदीकी पुलिस स्टेशन जाकर एफआईआर (FIR) की कॉपी जरूर लें।
-
लालच और डर से बचें: “जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।” किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, वीडियो कॉल पर ब्लैकमेलिंग से डरें नहीं और लॉटरी के लालच में न आएं।











