व्यापार निवारण उपायों पर मीडिया ब्रीफिंग करते हुए व्यापार उपचार महानिदेशक
भारतीय उद्योगों की रक्षा के लिए DGTR का बड़ा कदम; डंपिंग और अनुचित विदेशी सब्सिडी पर लगेगी लगाम, MSME को मिली बड़ी राहत “
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
वैश्विक बाजारों में भारतीय उत्पादकों और निर्यातकों को ‘समान अवसर’ (Level Playing Field) देने तथा विदेशी कंपनियों की अनुचित व्यापार प्रथाओं से बचाने के लिए वाणिज्य विभाग के व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) ने कमर कस ली है।
‘The Politics Again’ की बिजनेस और इकोनॉमी डेस्क के अनुसार, नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष मीडिया ब्रीफिंग में व्यापार उपचार महानिदेशक (महानिदेशक और अपर सचिव) श्री अमिताभ कुमार ने भारतीय उद्योगों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कई महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों और डिजिटल पहलों की जानकारी साझा की।
महानिदेशक ने स्पष्ट किया कि महानिदेशालय द्वारा किए जाने वाले उपाय कोई ‘आयात प्रतिबंध’ नहीं हैं, बल्कि यह घरेलू बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता बनाए रखने के कानूनी साधन हैं।
🛡️ क्या हैं व्यापार निवारण उपाय? (आसान भाषा में समझें)
जब विदेशी कंपनियां या सरकारें भारतीय बाजार को प्रभावित करने की कोशिश करती हैं, तब विश्व व्यापार संगठन (WTO) के ढांचे के तहत DGTR तीन मुख्य मोर्चों पर जांच कर सरकार को कार्रवाई की सिफारिश करता है:
एंटी डंपिंग (Anti-Dumping): जब कोई विदेशी कंपनी अपने खुद के देश के बाजार की तुलना में भारत में बहुत ही सस्ती और अस्वाभाविक कीमतों पर माल बेचने (खपाने) लगती है।
एंटी सब्सिडी (Anti-Subsidy / Countervailing Duty): जब विदेशी सरकारें अपने देश के निर्यातकों को भारी वित्तीय सहायता (सब्सिडी) देती हैं, जिससे उनके उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहद सस्ते हो जाते हैं और भारतीय उत्पादकों को नुकसान होता है।
सुरक्षा उपाय (Safeguards): जब किसी उत्पाद के आयात में अचानक और अप्रत्याशित भारी वृद्धि हो जाती है, जिससे घरेलू विनिर्माण को गंभीर खतरा पैदा हो जाता है।
अल्प शुल्क नियम (Lesser Duty Rule): DGTR संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए केवल उतनी ही सीमा तक शुल्क (Duty) की सिफारिश करता है, जितनी घरेलू उद्योग को होने वाले नुकसान (क्षति) को दूर करने के लिए आवश्यक हो,
ताकि उपभोक्ताओं और अनुप्रवाह उद्योगों (Downstream Sectors – जो कच्चे माल से अंतिम उत्पाद बनाते हैं) के हितों की भी रक्षा हो सके।
📈 डिजिटल बदलाव और MSME के लिए सुगम पहुंच
भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और बिखरे हुए छोटे उद्योगों को व्यापार उपचार तंत्र का लाभ आसानी से मिल सके, इसके लिए डीजीटीआर ने बड़े सुधार किए हैं:
एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म (24 अक्टूबर 2025): इस प्लेटफॉर्म के लॉन्च होने से अब ऑनलाइन फाइलिंग, संरचित प्रस्तुतिकरण, डिजिटल संचार और सुरक्षित दस्तावेज प्रबंधन पूरी तरह से डिजिटल हो गया है।
यह घरेलू उत्पादकों, निर्यातकों और विदेशी सरकारों के लिए एक ‘एकल-खिड़की’ (Single-Window) की तरह काम करता है।
छोटे उद्योगों को राहत: पहले छोटे उत्पादकों के लिए आवेदन करना जटिल होता था, लेकिन जुलाई 2021 में जारी सरलीकृत आवेदन प्रारूप के बाद से छोटे और खंडित उद्योगों के लिए प्रक्रियात्मक चुनौतियां बहुत कम हो गई हैं।
🌍 भारतीय निर्यातकों के लिए ‘ट्रेड डिफेंस विंग’ (Trade Defense Wing)
बैठक में बताया गया कि भारत केवल अपने घरेलू बाजार की रक्षा नहीं कर रहा, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी अपने निर्यातकों के साथ खड़ा है।
वर्ष 2016 में स्थापित किया गया डीजीटीआर का ‘ट्रेड डिफेंस विंग’ विदेशी देशों में एंटी-डंपिंग या प्रतिपूरक शुल्क की जांच का सामना कर रहे भारतीय निर्यातकों की कानूनी और प्रशासनिक मदद करता है।
यह विंग विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, विदेशी दूतावासों और निर्यात संवर्धन परिषदों (Export Promotion Councils) के बीच नोडल मंच के रूप में समन्वय स्थापित करता है।
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