जौनपुर : निजी क्षेत्र में आरक्षण और जातीय जनगणना की मांग को लेकर प्रदर्शन
भीम आर्मी का हल्ला बोल: निजी क्षेत्र में आरक्षण, जातीय जनगणना और मॉब लिंचिंग पर सख्त कानून की मांग, सौंपा ज्ञापन “
जौनपुर : द पॉलिटिक्स अगेन : वरुण यादव की रिपोर्ट
दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और आदिवासी वर्गों के अधिकारों को लेकर ‘भीम आर्मी जय भीम’ संगठन ने एक बार फिर हुंकार भरी है।
सोमवार को संगठन के जिलाध्यक्ष कंचन राव के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
संगठन ने लोकतंत्र के सभी स्तंभों में समाज के शोषित और वंचित वर्गों की उचित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कई बड़ी और अहम मांगें उठाई हैं, जिनमें जातीय जनगणना से लेकर निजी क्षेत्र में आरक्षण तक के मुद्दे शामिल हैं।
‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’
ज्ञापन सौंपते हुए जिलाध्यक्ष कंचन राव ने कहा कि संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने शोषित और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए आरक्षण की जो व्यवस्था की थी, उसका पूरा लाभ आज 75 साल बाद भी इन वर्गों को नहीं मिल पाया है।
संगठन ने ‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ के सिद्धांत पर निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं:
-
निजी क्षेत्र में आरक्षण: केवल सरकारी ही नहीं, बल्कि निजी उद्योगों (Private Sector) में भी आरक्षण लागू किया जाए।
-
पदोन्नति और बैकलॉग: पदोन्नति (Promotion) में आरक्षण को तुरंत बहाल किया जाए और वर्षों से खाली पड़े बैकलॉग के सभी पदों को जल्द से जल्द भरा जाए।
शिक्षा और रोजगार: NEET-UPSC में अनुपातिक आरक्षण की मांग
छात्रों और युवाओं के अधिकारों को लेकर भी भीम आर्मी ने कड़ा रुख अपनाया है।
-
संगठन ने मांग की है कि NEET, JEE और UPSC जैसी देश की शीर्ष प्रतियोगी परीक्षाओं में SC/ST, OBC और अल्पसंख्यकों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाए।
-
इसके साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में संविधान के अनुच्छेद-15 के तहत ‘जीरो बैलेंस’ (Zero Balance) पर प्रवेश की व्यवस्था जारी रखी जाए और UGC के नियमों को सख्ती से लागू किया जाए।
जातीय जनगणना और ‘लैटरल एंट्री’ पर कड़ा ऐतराज
राजनीतिक हिस्सेदारी के मुद्दे पर संगठन ने केंद्र और राज्य सरकारों से तुरंत ‘जातीय जनगणना’ (Caste Census) कराने की मांग की है।
उनका तर्क है कि वास्तविक आंकड़े सामने आने के बाद ही समाज के हर वर्ग की सच्ची हिस्सेदारी तय की जा सकती है।
इसके अलावा, भीम आर्मी ने सरकारी सेवाओं में सीधे ऊंचे पदों पर होने वाली ‘लैटरल एंट्री’ (Lateral Entry) व्यवस्था का कड़ा विरोध करते हुए इसे पूरी तरह से बंद करने की मांग की है।
मॉब लिंचिंग पर बने सख्त कानून, गाय घोषित हो ‘राष्ट्रीय पशु’
सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे पर संगठन ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कुछ बेहद अहम मांगें प्रशासन के सामने रखी हैं:
-
मॉब लिंचिंग पर लगाम: दलित, मुस्लिम, पिछड़े, अल्पसंख्यक और आदिवासियों के खिलाफ हो रही मॉब लिंचिंग (Mob Lynching) की घटनाओं को रोकने के लिए एक बेहद सख्त कानून बनाया जाए।
-
फर्जी एनकाउंटर की CBI जांच: गोकशी के कथित झूठे मुकदमों और पुलिस द्वारा किए जा रहे फर्जी एनकाउंटर की निष्पक्ष सीबीआई (CBI) जांच कराई जाए।
-
राष्ट्रीय पशु की मांग: गाय के नाम पर हो रही हिंसा को रोकने और उसकी रक्षा के लिए संगठन ने गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ (National Animal) घोषित करने की अनूठी मांग भी उठाई है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान भीम आर्मी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और भारी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।











