DDA conducting drone survey over Yamuna O Zone to identify encroachments in Delhi

दिल्ली : यमुना ओ-जोन में डीडीए का बड़ा अभियान

यमुना ओ-जोन में डीडीए का बड़ा अभियान, ड्रोन सर्वे शुरू; 90 अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई की तैयारी”

नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

राजधानी दिल्ली में यमुना के ओ-जोन (बाढ़ क्षेत्र) को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने बड़े स्तर पर अभियान तेज कर दिया है।

दिल्ली हाई कोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों के बाद डीडीए ने दूसरे चरण का ड्रोन सर्वे शुरू किया है।

इस सर्वे का उद्देश्य ओ-जोन की वास्तविक सीमा का निर्धारण करना, नए अतिक्रमण पर नजर रखना और लोगों को नियमों के प्रति जागरूक करना है।

डीडीए के अनुसार, यमुना का कुल ओ-जोन क्षेत्र लगभग 9,700 हेक्टेयर में फैला हुआ है। इसमें से करीब 807 हेक्टेयर भूमि पर लगभग 90 अवैध कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं।

इन कॉलोनियों से निकलने वाला सीवेज और गंदा पानी सीधे यमुना नदी में पहुंच रहा है, जिससे नदी का प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।

इसी मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वह नगर निगम (MCD), डीडीए और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर अवैध कॉलोनियों को हटाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना (रोडमैप) तैयार करें।

डीडीए के रिकॉर्ड के अनुसार, ओ-जोन में उसके स्वामित्व वाली लगभग 3,969.54 हेक्टेयर भूमि है, जिसमें से करीब 184.2 हेक्टेयर क्षेत्र अवैध कब्जे की चपेट में आ चुका है।

प्राधिकरण इस भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए लगातार अभियान चला रहा है और हाल के महीनों में कई स्थानों से अवैध कब्जे हटाकर जमीन खाली कराई गई है।

अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ डीडीए पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। खाली कराई गई भूमि पर नेचर पार्क, बांसेरा, बायोडायवर्सिटी पार्क और रिवरफ्रंट जैसे पर्यावरणीय विकास परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य यमुना के पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करना और दिल्लीवासियों को हरित सार्वजनिक स्थल उपलब्ध कराना है।

डीडीए ने मदनपुर खादर, सोनिया विहार और करावल नगर समेत संवेदनशील क्षेत्रों में लगभग 300 सार्वजनिक सूचना बोर्ड (साइनबोर्ड) लगाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

इन बोर्डों के माध्यम से लोगों को ओ-जोन की सीमाओं और वहां निर्माण संबंधी नियमों की जानकारी दी जाएगी ताकि भविष्य में नए अतिक्रमण को रोका जा सके।

एनजीटी में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, दूसरे चरण का ड्रोन सर्वे अगले दो महीनों में पूरा होने की संभावना है।

इसके बाद सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और अतिक्रमण हटाने का अभियान तेज किया जाएगा।

यमुना के बाढ़ क्षेत्र को सुरक्षित रखने और प्रदूषण कम करने की दिशा में डीडीए का यह अभियान राजधानी के पर्यावरण संरक्षण और शहरी नियोजन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।