Delhi : 14 साल बाद आज से शुरू होगा कृषि भूमि का दाखिल-खारिज, एलजी के आदेश पर 166 गांवों के लिए लगेंगे 74 शिविर

“फाइल फोटो “

“दिल्ली के उपराज्यपालके आदेश पर शुक्रवार से 5 अक्टूबर तक दिल्ली के 166 गांवों के लिए 74 शिविर लगाए जाएंगे। शिविर में आकर शहरीकृत गांव के निवासी दाखिल-खारिज करवा सकेंगे”

नई दिल्ली 20 / 09 / 2024 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

दिल्ली में 14 साल बाद शुक्रवार से कृषि भूमि का दाखिल-खारिज शुरू होगा। दिल्ली के उपराज्यपाल के आदेश पर शुक्रवार से 5 अक्टूबर तक दिल्ली के 166 गांवों के लिए 74 शिविर लगाए जाएंगे। शिविर में आकर शहरीकृत गांव के निवासी दाखिल-खारिज करवा सकेंगे।

राजनिवास से मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली के शहरीकृत गांवों में एक बार फिर से उत्तराधिकार के आधार पर कृषि भूमि के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) होने की प्रक्रिया 20 सितंबर से शुरू हो जाएगी। दिल्ली में यह 14 साल से बंद थी। इसके कारण लाखों दिल्लीवासी अपने उत्तराधिकार के प्रकृति प्रदत्त अधिकारों से वंचित थे।

अधिकारी ने बताया कि एलजी ने 17 सितंबर को आम लोगों की मांग को देखते हुए प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर उत्तराधिकार के आधार पर दाखिल-खारिज की अनुमति देने की घोषणा की। एलजी के आदेश पर दिल्ली के सभी 11 राजस्व जिलों के 166 गांवों में पांच अक्टूबर तक 74 शिविर लगाए जाएंगे। 

 

एलजी ने आदेश दिया कि म्यूटेशन के लिए गांव के निवासियों को डीएम या अन्य अधिकारी के कार्यालय के चक्कर न लगाने की जरूरत पड़े। एलजी ने अधिकारियों और कर्मचारियों को लोगों के दरवाजे पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

इसे लेकर एलजी ने बुधवार को एक एक विस्तृत आदेश जारी कर इसके लिए जिलों-गांवों में आयोजित किए जाने वाले शिविरों की संख्या सूची जारी की है। एलजी ने डीएम व एसडीएम को शिविरों का दौरा कर प्रक्रिया की निगरानी करने और इसका सुचारू रूप से संचालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है।

दिल्ली के ग्रामीणों के साथ राजनिवास में आयोजित संवाद में दाखिल-खारिज की मांग उठी थी। दिल्ली के सभी सातों सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी उपराज्यपाल से मुलाकात कर, इस संबंध में अपना पक्ष रखा था।

एलजी ने इससे पहले दिल्ली के शहरीकृत गांवों में कृषि भूमि के स्वामित्व अधिकारों को उत्तराधिकार के आधार पर दर्ज करने की घोषणा की थी। यह निर्णय उन लोगों की लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करेगा, जो 2010 से उत्तराधिकार के अपने अधिकार से वंचित हैं।

Santosh SETH

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